nayaindia Gujarat anti conversion law  बीते कुछ समय में कई हाई कोर्टों ने साहसी
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Chargesheet filed former IAS

Gujarat anti conversion law  दूसरा ट्रेंड यह है कि हाई कोर्ट जो उम्मीद जगाते हैं, अक्सर सुप्रीम कोर्ट उस पर पानी फेर देता है। सुप्रीम कोर्ट में जब मामला जाता है, तो जज कड़ी टिप्पणियां करते हैं और सरकार से कठिन सवाल पूछते हैं। लेकिन जब मौका फैसला देने या आदेश जारी करने आता है, तो कुछ उलटा ही होता है।

बीते कुछ समय में कई हाई कोर्टों ने साहसी और संवैधानिक रुख दिखाया है। ये ट्रेंड पिछले साल पहले लॉकडाउन के समय से दिखने लगा था, जब प्रवासी मजदूरों को लेकर कई हाई कोर्टों ने ऐसे निर्देश जारी किए, जो सरकार को पसंद नहीं आए। हाल में व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े कई मामलों में भी यह देखने को मिला है। लेकिन दूसरा ट्रेंड यह है कि हाई कोर्ट जो उम्मीद जगाते हैं, अक्सर सुप्रीम कोर्ट उस पर पानी फेर देता है। सुप्रीम कोर्ट में जब मामला जाता है, तो जज कड़ी टिप्पणियां करते हैं और सरकार से कठिन सवाल पूछते हैं। लेकिन जब मौका फैसला देने या आदेश जारी करने आता है, तो कुछ उलटा ही होता है। हाल में माननीय न्यायाधीशों के कोर्ट के बाहर शानदार भाषण देने के बावजूद इस जमीनी हालत पर फर्क नहीं पड़ा है।

इसीलिए धार्मिक स्वतंत्रता के मामले में दिए गुजरात हाई कोर्ट के आदेश का अंतिम हश्र क्या होगा, अभी कहना कठिन है। लेकिन फिलहाल यही कहा जाएगा कि एक और हाई कोर्ट संवैधानिक भावना की रक्षा के लिए खड़ा हुआ है। मुद्दा गुजरात धार्मिक स्वतंत्रता (संशोधन) अधिनियम- 2021 का है। इस बारे में अधिसूचना गुजरात सरकार ने बीते जून में जारी की थी। इसके तहत 2003 के मूल कानून में कई संशोधन किए गए थे। जमीयत उलामा-ए-हिंद की गुजरात इकाई और मुजाहिद नफीस नाम के एक गुजराती नागरिक ने नए कानून के खिलाफ हाई कोर्ट में अलग-अलग याचिकाएं दर्ज कीं। उनका कहना था कि नए कानून के कई प्रावधान असंवैधानिक हैं। मामले में सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने 19 अगस्त को नए कानून की कई धाराओं पर रोक लगा दी थी।

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अदालत का कहना था कि बिना किसी जबरदस्ती, लालची या धोखे से किए गए अंतर-धार्मिक विवाह करने वालों को अनावश्यक उत्पीड़न से बचाने के लिए इन प्रावधानों पर रोक लगाना जरूरी है। इनमें सबसे ज्यादा विवाद धारा पांच पर है। इस धारा के अनुसार किसी भी धार्मिक पुजारी को किसी का धर्म परिवर्तन कराने से पहले जिला मजिस्ट्रेट से इजाजत लेनी होगी। धर्म परिवर्तित करने वाले को भी जिला मजिस्ट्रेट को इस बारे में एक तय फॉर्म में इसकी जानकारी देनी होगी। इसी धारा पर लगाई लगी रोक को हटाने के लिए गुजरात सरकार ने हाई कोर्ट से अपील की थी। लेकिन बीते शुक्रवार को कोर्ट ने अपील खारिज कर दी। तो मामला अब सर्वोच्च न्यायालय में जाएगा। देखें, वहां क्या होता है?

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