Gujarati businessmen Ambani Adani दोनों का डंका एक सा!
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अंबानी और अडानी : दोनों का डंका एक सा!

Gujarati businessmen Ambani Adani

देश और पूरी दुनिया में इस समय मुकेश अंबानी और गौतम अडानी का डंका बज रहा है। सोशल मीडिया के भक्त लंगूरों के मुताबिक दुनिया की राजनीति और कूटनीति में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का डंका है तो कारोबार की दुनिया में दो गुजराती कारोबारियों अंबानी और अडानी का डंका बज रहा है। हर दिन उनकी संपत्ति में बेहिसाब बढ़ोतरी हो रही है। यह ऐसा अद्भुत संयोग है कि भारत सरकार जो भी नीति बना रही है उसका फायदा इन दो कारोबारियों को हो रहा है। इनके अलावा भी दो-चार कारोबारी हैं, जिनको कुछ लाभ हुआ है लेकिन इन दो कारोबारियों की कमाई असीमित है। ताजा खबर है कि रिलायंस समूह के चेयरमैन मुकेश अंबानी और अडानी समूह के संस्थापक गौतम अडानी एशिया के सबसे अमीर कारोबारी बन गए हैं। इन दोनों ने चीन के बड़े कारोबारियों जैक मा और झोंग शानशेन को पीछे छोड़ दिया है। बाजार पूंजीकरण के लिहाज से रिलायंस समूह देश की सबसे बड़ी कंपनी है, जबकि अडानी समूह देश में सबसे तेजी से बढ़ने वाला कारोबारी समूह है। Gujarati businessmen Ambani Adani

अंतरराष्ट्रीय मीडिया समूह ब्लूमबर्ग की अरबपतियों की सूची के मुताबिक मुकेश अंबानी की दौलत 84 अरब डॉलर से ज्यादा हो गई है और वे दुनिया के 12वें सबसे अमीर व्यक्ति बन गए है। इस साल अब तक अंबानी की दौलत में 7.62 अरब डॉलर का इजाफा हुआ है। गौतम अडानी उनके ठीक पीछे हैं और उनकी संपत्ति बढ़कर 77 अरब डॉलर के पार हो गई है। इस साल उनकी संपत्ति में 43.2 अरब डॉलर का इजाफा हुआ है। ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के मुताबिक, वे दुनिया के 14वें सबसे अमीर शख्स हैं। दोनों एक सौ अरब डॉलर की संपत्ति वाले चुनिंदा कारोबारियों की सूची में शामिल होने के लिए तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। कोरोना वायरस की महामारी शुरू हुई थी तो भारत का शेयर बाजार 30 हजार अंक के आसपास था, जो पूरे महामारी के दौरान बढ़ता रहा और अब 60 हजार अंक के करीब पहुंच गया है। शेयर बाजार में दोनों कारोबारियों के शेयरों में जबरदस्त उछाल आया है। अडानी समूह की कंपनियों के शेयर तो दो सौ, तीन सौ फीसदी से ज्यादा बढ़े हैं।

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बहरहाल, केंद्र सरकार जो भी फैसला कर रही है उसका सीधा फायदा इन दो कंपनियों को मिल रहा है। सरकार ने तीन कृषि कानून बनाए तो उसका सीधा फायदा अडानी को मिल रहा है, जिसने बड़े पैमाने पर कृषि उत्पादों के कारोबार में एंट्री की है। सरकार ने नेशनल मोनेटाइजेशन प्लान बनाया तो माना जा रहा है कि अगले चार साल में देश की अनेक सार्वजनिक संपत्तियां इन दो कंपनियों के हाथ में जाएंगी। सरकार एलपीजी के ऊपर से सब्सिडी खत्म कर रही है तो उसका भी सबसे ज्यादा फायदा रिलायंस समूह को होने का अनुमान है। अभी तीन निजी कंपनियां एलपीजी सिलिंडर आपूर्ति का काम करती हैं, जिनमें रिलायंस अव्वल है। चूंकि सरकार पहले सिलिंडर पर सब्सिडी देती थी इसलिए रिलायंस की इस क्षेत्र में बहुत रूचि नहीं थी। लेकिन अब सब्सिडी लगभग खत्म है और बची खुची सब्सिडी इस साल के अंत तक खत्म हो जाएगी।

अब तक रिलायंस गैस का ध्यान कॉमर्शियल एलपीजी पर था क्योंकि रसोई गैस की सब्सिडी उन्हें नहीं मिलती है। सब्सिडी का लाभ सिर्फ सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को मिलता है। सब्सिडी खत्म होने के बाद वह रसोई गैस के कारोबार में भी आएगी और देश के दो करोड़ टन घरेलू गैस के सालाना कारोबार पर कब्जे के लिए काम करेगी। उसके लिए इससे हजारों करोड़ रुपए के नए कारोबार का रास्ता खुल गया है।

By हरिशंकर व्यास

भारत की हिंदी पत्रकारिता में मौलिक चिंतन, बेबाक-बेधड़क लेखन का इकलौता सशक्त नाम। मौलिक चिंतक-बेबाक लेखक-बहुप्रयोगी पत्रकार और संपादक। सन् 1977 से अब तक के पत्रकारीय सफर के सर्वाधिक अनुभवी और लगातार लिखने वाले संपादक।  ‘जनसत्ता’ में लेखन के साथ राजनीति की अंतरकथा, खुलासे वाले ‘गपशप’ कॉलम को 1983 में लिखना शुरू किया तो ‘जनसत्ता’, ‘पंजाब केसरी’, ‘द पॉयनियर’ आदि से ‘नया इंडिया’ में लगातार कोई चालीस साल से चला आ रहा कॉलम लेखन। नई सदी के पहले दशक में ईटीवी चैनल पर ‘सेंट्रल हॉल’ प्रोग्राम शुरू किया तो सप्ताह में पांच दिन के सिलसिले में कोई नौ साल चला! प्रोग्राम की लोकप्रियता-तटस्थ प्रतिष्ठा थी जो 2014 में चुनाव प्रचार के प्रारंभ में नरेंद्र मोदी का सर्वप्रथम इंटरव्यू सेंट्रल हॉल प्रोग्राम में था। आजाद भारत के 14 में से 11 प्रधानमंत्रियों की सरकारों को बारीकी-बेबाकी से कवर करते हुए हर सरकार के सच्चाई से खुलासे में हरिशंकर व्यास ने नियंताओं-सत्तावानों के इंटरव्यू, विश्लेषण और विचार लेखन के अलावा राष्ट्र, समाज, धर्म, आर्थिकी, यात्रा संस्मरण, कला, फिल्म, संगीत आदि पर जो लिखा है उनके संकलन में कई पुस्तकें जल्द प्रकाश्य। संवाद परिक्रमा फीचर एजेंसी, ‘जनसत्ता’, ‘कंप्यूटर संचार सूचना’, ‘राजनीति संवाद परिक्रमा’, ‘नया इंडिया’ समाचार पत्र-पत्रिकाओं में नींव से निर्माण में अहम भूमिका व लेखन-संपादन का चालीस साला कर्मयोग। इलेक्ट्रोनिक मीडिया में नब्बे के दशक की एटीएन, दूरदर्शन चैनलों पर ‘कारोबारनामा’, ढेरों डॉक्यूमेंटरी के बाद इंटरनेट पर हिंदी को स्थापित करने के लिए नब्बे के दशक में भारतीय भाषाओं के बहुभाषी ‘नेटजॉल.काम’ पोर्टल की परिकल्पना और लांच।

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