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किस्मत अगले 25 साल में तय होगी!

प्रधानमंत्री ने गुरुवार को पालनपुर की सभा में कहा और उससे पहले भी कई बार कहा है कि गुजरात का इस बार का चुनाव विधायक या सरकार चुनने के लिए नहीं है, बल्कि अगले 25 साल के लिए गुजरात की किस्मत चुनने का है। इस बात को उन्होंने हिमाचल प्रदेश के चुनाव में अलग करह से कहा था। वहां उन्होंने किस्मत वाली बात नहीं की थी लेकिन यह कहा था कि विधायक के उम्मीदवार पर ध्यान देने की जरूरत नहीं है, मोदी को वोट देना है, मोदी की ताकत बढ़ानी है, कमल पर बटन दबाना है। गुजरात में भी उम्मीदवार का कोई मतलब नहीं है, गुजरात के लोगों को अगले 25 साल में गुजरात की किस्मत तय करने के लिए वोट करना है।

अब सवाल है कि किस्मत अगले 25 साल में तय होगी तो पिछले 27 साल में क्या हुआ? गुजरात में 27 साल से भारतीय जनता पार्टी की सरकार है। उसमें से 13 साल खुद नरेंद्र मोदी मुख्यमंत्री रहे हैं, जिनके बारे में दावा है कि उनके जैसा कोई नहीं हुआ। उन्होंने पूरे राज्य में विकास की गंगा बहा दी। फिर भी किस्मत अगले 25 साल में तय होगी! पिछले 27 साल में से साढ़े 14 साल यानी आधे से ज्यादा डबल इंजन की सरकार रही है। यानी केंद्र और राज्य दोनों जगह भाजपा की सरकार रही है। पहले छह साल अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री थे और पिछले साढ़े आठ साल से खुद नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री हैं। दिल्ली से ही गुजरात की सरकार चल रही है। फिर भी किस्मत तय नहीं हुई है। किस्मत अगले 25 साल में तय होगी! प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि कांग्रेस ने गुजरात को बरबाद कर दिया। सोचें, वह कांग्रेस जो 27 साल से राज्य की सत्ता से बाहर है और इन 27 सालों में सिर्फ 11 साल केंद्र सरकार में रही है। उससे ज्यादा साढ़े 14 साल खुद भाजपा की केंद्र में सरकार रही है। फिर भी कांग्रेस ने गुजरात को बरबाद कर दिया। सोचें, कांग्रेस ने विपक्ष में रह कर भी गुजरात को बरबाद कर दिया और ढाई दशक तक सरकार चला कर भाजपा और नरेंद्र मोदी गुजरात को आबाद नहीं कर सके!

हैरानी इस बात पर नहीं है कि प्रधानमंत्री ऐसी बात कर रहे हैं। वे हमेशा ऐसी बात करते हैं।  हैरानी इस बात पर है कि गुजरात के लोग इस पर यकीन कर रहे हैं और वे फिर भाजपा को वोट देंगे क्योंकि उनको भी लग रहा है कि कांग्रेस ने गुजरात को बरबाद कर दिया। कांग्रेस पर प्रधानमंत्री का दूसरा आरोप यह है कि उसने गुजरात और गुजरातियों को देश व दुनिया में बदनाम किया। वे हर बार की तरह इस बार भी छह-सात करोड़ गुजरातियों की अस्मिता का मामला उठा रहे हैं। देश के 140 करोड़ लोगों के प्रधानमंत्री गुजरात का चुनाव जीतने के लिए अस्मिता का दांव लगा रहे हैं। मेधा पाटकर कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा में शामिल हो गईं तो प्रधानमंत्री दो दिन तक उनके नाम पर वोट मांगते रहे। उनको गुजरात विरोधी बता कर उन्होंने लोगों से कांग्रेस को वोट नहीं देने की अपील की।

बहरहाल, जो पिछले 27 साल में नहीं हुआ वह अगले 25 साल में होगा। भाजपा के लगातार 27 साल तक शासन में रहने के बावजूद पांच में से एक गुजराती गरीबी रेखा के नीचे है। खुद राज्य सरकार ने पिछले साल विधानसभा में यह जानकारी दी थी कि राज्य के 31 लाख से ज्यादा परिवार गरीबी रेखा के नीचे हैं। भूख यानी हंगर इंडेक्स में गुजरात 13वें स्थान पर है और बड़े राज्यों में बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ व मध्य प्रदेश ही उससे नीचे हैं। बाकी सारे बड़े राज्य उससे ऊपर हैं। जब इस बारे में पूछा जाता है तो राज्य के नेता कहते हैं कि गुजरात की महिलाएं फैशन और सौंदर्य पर ज्यादा ध्यान देती हैं इसलिए खाना नहीं खाती हैं। मानव विकास सूचकांक में गुजरात में 11वें स्थान पर है। दस राज्य उससे ऊपर हैं। ऐसे राज्य, जहां किसी एक पार्टी की इतने लंबे समय तक सरकार नहीं रही या किसी महामानव ने उन राज्यों में सरकार नहीं चलाई वे राज्य गुजरात से काफी ऊपर हैं। यह उस गुजरात की हकीकत है, जो भाजपा की सरकार बनने से पहले से एक विकसित राज्य रहा है, जहां बड़े उद्योग पहले से हैं, जिसके एक शहर को भारत का मैनेचेस्टर कहा जाता था। कपड़े से लेकर हीरा और पेट्रोकेमिकल्स का हब है गुजरात और फिर भी लोगों को अगले 25 साल की किस्मत तय करने के लिए वोट करना है।

By हरिशंकर व्यास

भारत की हिंदी पत्रकारिता में मौलिक चिंतन, बेबाक-बेधड़क लेखन का इकलौता सशक्त नाम। मौलिक चिंतक-बेबाक लेखक-बहुप्रयोगी पत्रकार और संपादक। सन् 1977 से अब तक के पत्रकारीय सफर के सर्वाधिक अनुभवी और लगातार लिखने वाले संपादक।  ‘जनसत्ता’ में लेखन के साथ राजनीति की अंतरकथा, खुलासे वाले ‘गपशप’ कॉलम को 1983 में लिखना शुरू किया तो ‘जनसत्ता’, ‘पंजाब केसरी’, ‘द पॉयनियर’ आदि से ‘नया इंडिया’ में लगातार कोई चालीस साल से चला आ रहा कॉलम लेखन। नई सदी के पहले दशक में ईटीवी चैनल पर ‘सेंट्रल हॉल’ प्रोग्राम शुरू किया तो सप्ताह में पांच दिन के सिलसिले में कोई नौ साल चला! प्रोग्राम की लोकप्रियता-तटस्थ प्रतिष्ठा थी जो 2014 में चुनाव प्रचार के प्रारंभ में नरेंद्र मोदी का सर्वप्रथम इंटरव्यू सेंट्रल हॉल प्रोग्राम में था। आजाद भारत के 14 में से 11 प्रधानमंत्रियों की सरकारों को बारीकी-बेबाकी से कवर करते हुए हर सरकार के सच्चाई से खुलासे में हरिशंकर व्यास ने नियंताओं-सत्तावानों के इंटरव्यू, विश्लेषण और विचार लेखन के अलावा राष्ट्र, समाज, धर्म, आर्थिकी, यात्रा संस्मरण, कला, फिल्म, संगीत आदि पर जो लिखा है उनके संकलन में कई पुस्तकें जल्द प्रकाश्य। संवाद परिक्रमा फीचर एजेंसी, ‘जनसत्ता’, ‘कंप्यूटर संचार सूचना’, ‘राजनीति संवाद परिक्रमा’, ‘नया इंडिया’ समाचार पत्र-पत्रिकाओं में नींव से निर्माण में अहम भूमिका व लेखन-संपादन का चालीस साला कर्मयोग। इलेक्ट्रोनिक मीडिया में नब्बे के दशक की एटीएन, दूरदर्शन चैनलों पर ‘कारोबारनामा’, ढेरों डॉक्यूमेंटरी के बाद इंटरनेट पर हिंदी को स्थापित करने के लिए नब्बे के दशक में भारतीय भाषाओं के बहुभाषी ‘नेटजॉल.काम’ पोर्टल की परिकल्पना और लांच।

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