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Thursday, May 13, 2021
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भगवान का ही भरोसा करें!

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बीते रविवार को दिल्ली के एक प्राइवेट अस्पताल की नर्स की कोरोना वायरस के संक्रमण से मौत हो गई। अगले दिन उनके सहकर्मियों ने आरोप लगाया कि मृत नर्स को अस्पताल इस्तेमाल किए हुए निजी सुरक्षा किट (पीपीई) को पहनने के लिए मजबूर करता था। ऐसी ही स्थिति अन्य कर्मचारियों के साथ भी है। वैसे ये कहानी किसी एक अस्पताल की नहीं है। दरअसल, यह भारत में स्वास्थ्य कर्मियों को की बदहाली की कहानी है। और अगर बड़े संदर्भ में देखें तो यह भारत की पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था के बीमार होने की कथा है।

ऐसे में कोरोना महामारी और उसके साथ अन्य बीमारियों का इस देश में इलाज कैसे होगा, इसको लेकर चिंताएं गहरी होती जा रही हैं। विशेषज्ञ इस बात पर सहमत हैं कि कोरोना संक्रमण का कर्व फ्लैट नहीं हो रहा है। अमेरिका की मिशिगन यूनिवर्सिटी की एक टीम का अनुमान है कि भारत में जुलाई की शुरुआत तक 6,30,000 से लेकर 21 लाख तक की आबादी कोरोना की चपेट में आ सकती है। भारत इतने अधिक मरीजों को कैसे संभालेगा?

अपने देश के अस्पताल सामान्य दिनों में ही मरीजों से भरे रहते हैं। शायद इसीलिए केंद्र सरकार ने अब इस बीमारी की गंभीरता को कम करके बताना शुरू कर दिया है। कहा गया है कि कोरोना के सारे मरीजों को अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत नहीं पड़ती। भारत सरकार के पिछले साल के आंकड़े बताते हैं कि देश के अस्पतालों में करीब 7,14,000 बिस्तर हैं। आर्थिक सहयोग और विकास संगठन ओईसीडी के ताजा आंकड़ों के मुताबिक देश में प्रति 1000 लोगों पर 0.5 बिस्तर मौजूद हैं। इसकी तुलना अगर दूसरे देशों से करें तो चीन में यह आंकड़ा 4.3 और अमेरिका में 2.8 है। हकीकत यही है कि भारत के करोड़ों लोग सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर निर्भर हैं। खास तौर से ऐसा ग्रामीण इलाकों में है। कुल मिलाकर अस्पताल में भर्ती होने वाले 55 फीसदी लोग निजी अस्पतालों में जाते हैं। बीते दो दशकों में देश के बड़े शहरों में निजी अस्पतालों का बड़ी तेजी से विकास हुआ है। मगर इन तक पहुंच सिर्फ भारत के अमीर और मध्यवर्गीय लोगों की ही है। वैसे भी कोरोना जैसी महामारी के समय निजी क्षेत्र के अस्पतालों की भूमिका और प्रासंगिकता सवालों के घेरे में है। जबकि सरकारी अस्पतालों में अस्पतालों में बिस्तरों और गंभीर मरीजों की देखभाल के लिए कर्मचारियों की भारी कमी है। इंतजाम कमजोर हैं। ऐसे में ये कहना क्या गलत होगा कि सिर्फ ईश्वर का ही भरोसा है!

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