हांगकांग पर चीन का पलटवार

हांगकांग में अधिकारों के जन आंदोलन पिछले साल खूब चर्चित रहा था। कोरोना संकट खड़ा होने के पहले तक वहां चीन की कम्युनिस्ट सरकार बचाव की मुद्रा में नजर आती थी। लेकिन अब उसने पलट कर वार किया है। चीनी कांग्रेस के मौजूदा अधिवेश में हांगकांग सुरक्षा कानून का प्रस्ताव पेश किया गया है। उसका मकसद है देशद्रोह और तोड़फोड़ वाले मामलों में सख्त कानूनी कार्रवाई की अनुमति देना।

चीन का कम्युनिस्ट शासन पहले से चेतावनी देता आया था कि वह हांगकांग में सामने आ रहे मतभेदों और चीन-विरोध को बर्दाश्त नहीं करेगा। हांगकांग चीन अपना अर्ध-स्वायत्त शहर राज्य है।

ताजा प्रस्तावित कानून के पहले भी सन 2003 में चीन ने इससे मिलते जुलते कानून का प्रस्ताव ले आया था। उस समय बड़े स्तर हुए विरोध के चलते उसको इसे वापस लेना पड़ा था। मगर अब चीन के सालाना संसद सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ली केछियांग ने कहा कि हांगकांग में चीन राष्ट्रीय सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए हांगकांग में लागू कानूनी तंत्र एवं व्यवस्था में सुधार करेगा। इसके लिए उसने हांगकांग के मिनी-संविधान का सहारा लिया है।

इस संविधान के बेसिक लॉ के अनुच्छेद 23 में लिखा है कि देशद्रोह जैसे गंभीर मामलों में वहां राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लागू करना चाहिए। इससे पहले इस अनुच्छेद का इस्तेमाल नहीं किया गया है। हांगकांग में प्रेस और अभिव्यक्ति की आजादी के मूल्यों की काफी मान्यता रही है, जबकि मुख्यभूमि चीन में स्थिति इसके बिल्कुल उलट मानी जाती है।

1997 में जब अपने उपनिवेश हांगकांग को ब्रिटेन ने वापस चीन को सौंपा था, तभी इन मूल्यों को सुरक्षित रखने को लेकर समझौता हुआ था। हांगकांग में चीन का कठपुतली प्रशासन है। उसकी नेता कैरी लैम हैं, जिनके रुख की पिछले साल के आंदोलन के दौरान काफी आलोचना हुई थी। अब लैम ने नए कानून के मामले में चीन का पूरा समर्थन करने का एलान किया है।

इस वक्त बीजिंग में चल रही पीपुल्स कांग्रेस यानी राष्ट्रीय जन संसद  में हिस्सा ले रही लैम ने इस कानून का समर्थन किया है। हाल के महीनों में कोरोना के चलते हांगकांग में लॉकडाउन रहा है। इस कारण इस कदम का ज्यादा विरोध सड़कों के बजाए इंटरनेट पर हो रहा है। सोशल मीडिया साइटों और चैटिंग ऐप्स में हांगकांग के लोकतंत्र समर्थक कार्यकर्ता फिर से विरोध प्रदर्शन को शुरू करने का आह्वान कर रहे हैं। इसमें वे कितना कामयाब होंगे, उस पर ही इस कानून का भविष्य निर्भर करेगा।

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