केंद्र-राज्यः टकराव का नया दौर

नागरिकता संशोधन कानून को लेकर केंद्र और कई राज्यों के बीच टकराव बढ़ता जा रहा है। फिलहाल यह सबसे ज्यादा जाहिर केरल के संदर्भ में हुआ है। लेकिन जल्द ही गैर-भाजपा शासित दूसरे राज्य भी इस सूची में शामिल हो सकते हैं। पंजाब विधानसभा इस कानून के खिलाफ प्रस्ताव पारित कर चुकी है। राज्य की कांग्रेस सरकार एलान कर चुकी है कि वह भी केरल की तर्ज पर इस कानून की संवैधानिकता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी। केरल ने संविधान के अनुच्छेद 131 के तहत चुनौती दी है, यानी उसने इस कानून को संघीय व्यवस्था का उल्लंघन बताया है। अब केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने माकपा नेतृत्व वाली लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) सरकार से रिपोर्ट मांगी है। पूछा है कि उन्हें सूचित किए बिना कैसे राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट चली गई। राज्य के मुख्य सचिव से इस संबंध में रिपोर्ट मांगी गई है। राज्यपाल और सरकार में उस वक्त से टकराव चल रहा है, जब राज्य विधानसभा ने नये कानून को निरस्त करने के लिए पिछले महीने एक प्रस्ताव पारित किया था। खान ने सीएए के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने के फैसले की सूचना उन्हें नहीं दिए जाने को लेकर भी सरकार से अप्रसन्नता जताई थी। केरल सरकार ने नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ विधानसभा में प्रस्ताव लाया था। इसके साथ ही केरल सरकार ने इस कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। नागरिकता संशोधन कानून और अन्य नियमों को चुनौती देते हुए केरल ने कहा था कि यह कानून अनुच्छेद 14, 21 और 25 के तहत मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है। यह कानून अनुचित और तर्कहीन है। केरल के बाद पंजाब विधानसभा में बीते हफ्ते सत्तारूढ़ कांग्रेस ने नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया, जिसे सदन में पारित कर दिया गया। नए नागरिकता कानून के खिलाफ पहले से ही कई याचिकाएं दायर की गई हैं और केरल की याचिका में भी करीब-करीब वैसी ही दलीलें दी गईं हैं। राज्य ने कहा कि यह कानून धर्म के आधार पर भेदभाव करता है। इस कानून में अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से 2015 के पहले भारत आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के लोगों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान है। लेकिन इसको लेकर देश में बड़ा जन आंदोलन छिड़ चुका है। इसी के साथ विपक्ष से भी सरकार का टकराव बढ़ गया है, जो अब केंद्र-राज्य टकराव के बीच जाहिर होने लगा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Shares