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समय पर सावधानी जरूरी

केंद्र ने कोरोना संक्रमण के मामले में राज्य सरकारों को परामर्श जारी किया है। राज्यों को उसे गंभीरता से लेना चाहिए। चीन में बन रही स्थिति के मद्देनजर उन्हें ये बात ध्यान में रखनी चाहिए कि दुनिया को इस महामारी से अभी मुक्ति नहीं मिली है।

चीन में कोरोना संक्रमण के मामलों में वृद्धि को देखते हुए भारत सरकार ने राज्यों को उचित दिशा-निर्देश जारी किए हैँ। इनमें कोरोना संक्रमित मरीजों की जिनोम-स्वीक्वेंसिंग करने को कहा गया है। राज्य सरकारों को केंद्र के परामर्श को गंभीरता से लेना चाहिए। उन्हें विश्व स्वास्थ्य संगठन की इस टिप्पणी पर भी गौर करना चाहिए कि चीन में संक्रमण की नई लहर को देखते हुए अभी कहना ठीक नहीं रह गया है कि दुनिया को इस महामारी से मुक्ति मिल गई है। चीन से आ रही खबरों के मुताबिक वहां संक्रमण की लहर कोविड-19 वायरस के ओमिक्रोन वैरिएंट एक सब वैरिएंट से आई है, जो संक्रामक तो है, लेकिन ज्यादा खतरनाक नहीं है।

इसके बावजूद नए वैरिएंट्स के उभरने की संभावना लगातार बनी हुई है। इसलिए एहतियात जरूरी है। आशा है कि भारत सरकार स्थिति पर नजर बनाए रखेगी और जरूरी हुआ तो फिर से ठीक समय पर कोरोना संबंधी प्रतिबंधों को लागू किया जाएगा। चीन में जीरो-कोविड नीति बदल दिए जाने के बाद देश के शहरी और ग्रामीण इलाकों में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। बीजिंग में दो लोगों की मौतों की पुष्टि हो चुकी है। इसके अलावा कई शहरों में फिर से संक्रमण रोकने के नियम लागू किए गए हैँ। खुद चीन के संक्रमण रोग विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अभी स्थिति और बिगड़ेगी। चीन के रोग नियंत्रण केंद्र में संक्रामक रोग विभाग के प्रमुख वू जुनयू ने कहा है कि इस वर्ष सर्दी के मौसम में कोरोना की तीन लहरें आने की आशंका है, जिसमें अभी पहली आई हुई है। मौजूदा लहर के जनवरी के मध्य तक जारी रहने की संभावना है। इस स्थिति से भारत सहित पास-पड़ोस के सभी देशों के कान खड़े हो जाने चाहिए। हालांकि अब टीकाकरण की ऊंची दर के कारण पहले जैसी तबाही होने की आशंका नहीं है, इसके बावजूद कोरोना वायरस अभी भी इतना शक्तिशाली बना हुआ है, जो आम जीवन को अस्त-व्यस्त कर सकता है। इसलिए कोई जोखिम नहीं उठाया जा सकता। केंद्र और राज्यों के लिए यह उचित होगा कि पूरी चौकसी बरतें और जरूरत के मुताबिक कदम उठाएं।

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