सेंसरशिप का पड़ेगा साया?

क्या‍ नेटफ्लिक्स और अमेजॉन प्राइम जैसी सेवाओं पर अब भारत में सेंसरशिप लगेगी? ऐसी चिंताएं गहरा गई हैं। भारत के मौजूदा सियासी माहौल में ऐसी चर्चाओं पर लोग सहज भरोसा करने लगते हैं। गौरतलब है कि भारत में फिल्मों और टेलीविजन से जुड़ी प्रमाणन संस्थाएं कॉन्टेंट का नियंत्रण करती हैं। लेकिन तेजी से लोकप्रिय होती स्ट्रीमिंग सेवाओं के कार्यक्रमों को सेंसर करने का कोई कानून नहीं है। बताया जाता है कि केंद्र सरकार इसको लेकर फिक्रमंद है। साथ ही पिछले कुछ महीनों में पुलिस और अदालतों के सामने कई शिकायतें लाई गईं जिनमें अश्लीलता दिखाने और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोप थे। इस साल जनवरी में भी सेंसरशिप को लेकर इस तरह की चिंताएं उभरी थीं और तब नेटफ्लिक्स और हॉटस्टार ने एक स्व-नियंत्रण संहिता पर हस्ताक्षर किए थे। अमेजॉन ने इस संहिता से जुड़ने से मना कर दिया था और कहा था कि मौजूदा कानून पर्याप्त हैं। लेकिन सरकारी अधिकारियों का कहना कि स्व-नियंत्रण सबके लिए एक जैसा नहीं है और इससे चिंता उभर रही है। गौरतलब है कि पिछले साल नेटफ्लिक्स के सीरीयल- सेक्रेड गेम्स- के खिलाफ एक अदालत में केस किया गया था। इस कार्यक्रम के कुछ दृश्यों और भारत के एक पूर्व प्रधानमंत्री के बारे में इसकी की गई कथित अपमानजनक टिप्पणी के खिलाफ शिकायत उसमें की गई थी।

लेकिन ये केस खारिज हो गया था। इसके बाद पिछले महीने एक भारतीय नेता ने भी पुलिस से शिकायत कर नेटफ्लिक्स पर हिंदुओं को बदनाम करने का आरोप लगाया। बताया जाता है कि इन सब घटनाओं से सरकार की चिंता बढ़ गई है और इसको लेकर केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालयों में बातचीत चल रही है। कोशिश ये है कि ऐसे कॉन्टेंट प्रदाताओं के लिए एक स्वीकारयोग्य विनियमन तैयार हो सके। अभी सभी विकल्पों को जांचा जा रहा है। इन विकल्पों में एक स्वनियंत्रण संहिता शामिल है, जिसमें सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं होगा या एक ऐसी संहिता जिसकी सरकार ही देखरेख करेगी। या फिर ऐसे कदम उठाए जाएं, जिनसे ये सुनिश्चित किया जा सके कि मनोरंजन कंपनियां अपने कार्यक्रमों के लिए पहले से स्वीकृति लेंगी। बहरहाल, अगर विनियमन हुआ तो इन सेवाओं को अपने पूरे वैश्विक कॉन्टेंट में भारत के हिसाब से बदलाव लाने पड़ेंगे, जो कि इनके लिए काफी बड़ा, खर्चीला और समय लेने वाला सरदर्द बन जाएगा। सवाल यह है कि जो चीजें बाकी दुनिया देश सकती है, वह भारत में आपत्तिजनक क्यों होना चाहिए?

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