भारत डटे, लड़े चीन से!

यह मैं कई बार लिख चुका हूं। लेकिन पिछले दस दिनों में अंतरराष्ट्रीय राजनीति में चीन को घेरने की जितनी कार्रवाईयां हुई हैं, चीन जितना बदनाम हुआ है उनके चलते भारत के लिए वक्त है चीन को आंखे दिखाने का। यह मामूली बात नहीं है कि भारत ने चीन के 59एप्स पर प्रतिबंध लगाया तो उसको अमेरिका, उसके विदेश मंत्री ने बाकी देशों, विश्व मीडिया से कहा कि भारत ने अच्छा काम किया। दूसरें देशों को भी ऐसा करना चाहिए। अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया ने बाकायदा चीन के खिलाफ ठोस कार्रवाई की है। यूरोपीय देशों में भी चीन के खिलाफ नफरत है।

यदि ऐसा है तो भारत क्यों सीमा पर वैसा ही दबाव नहीं बनाता जैसे चीन ने बनाया हुआ है। चीन की सेना पीछे नहीं हट रही है तो हम क्यों हटें?चीनी सैनिक यदि किसी चौकी से आगे बढ़ते दिख रहे हैं तो भारत को दूसरी, अपने अनुकूल चौकी से सैनिकों को आगे क्यों नहीं बढ़ाना चाहिए?जब ब्रिटेन ने चीन की नंबर एक संचार कंपनी हुआवे, उसकी 5जीतकनीक पर पाबंदी लगाई है और अमेरिकी विदेश मंत्री अलग-अलग देशों की यात्रा करके चीनी संचार कंपनियों पर पाबंदी लगाने को कह रहे हैं तो मोदी सरकार को भी भारत में काम कर रही बड़ी चीनी कंपनियों के धंधों पर रोक लगाने के नए ऐलान करने चाहिए। हिसाब से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मौका लपकना चाहिए। उन्हें प्रचार करना चाहिए कि उन्होंने चीन के 59एप्स पर पाबंदी लगाई तो दुनिया के बाकी देश उसे फॉलो कर रहे हैं। चीन ने भारत से पंगा लिया तो प्रधानमंत्री ने सख्ती दिखाई और दुनिया उनकी तारीफ कर रही है!

लेकिन तब सीमा का यह रोना-धोना बंद होना चाहिए कि कूटनीति से हम चीन को मनाने की कोशिश में हैं। वक्त चीन को जैसे का तैसा जवाब देने का है। भारत न हमलावर था और न हमलावर है। संकट चीन का बनाया हुआ है और वह उसकी सेना से है तो भारत को अपनी सेना से ही उसको जवाब देना चाहिए। चीन के हुक्मरान सीमा पर सेना आगे बढ़ा रहे हैं, तैनात कर रहे हैं और भारत कूटनीति करे तो यह दुनिया में माहौल बनाने के नाते ठीक है लेकिन दुनिया के समर्थन से भारत की सेना को पराक्रम दिखाने का मौका चूकना होगा। ट्रंप या किसी को भी मध्यस्थ बनाने की जरूरत इसलिए नहीं है क्योंकि डोनाल्ड ट्रंप हो या ब्रिटेन के बोरिस जॉनसन सब हांगकांग से ले कर वायरस के तमाम मुद्दों में चीन के खिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं। जब ये चीन को कूटनीति से मना सकना संभव नहीं मान रहे हैं, सीधे फैसले ले रहे हैं, चीन की परवाह नहीं कर रहे है तो ऐसा रवैया भारत सरकार क्यों नहीं अपना सकती।

इसलिए भारत के लिए दुनिया में बने माहौल के बीच चीन को जवाब देने कामौका है। उसे हैसियत दिखलाने की इससे बेहतर स्थिति फिर कभी नहीं बनेगी। चीन से अपने आपको व्यापारिक तौर पर मुक्त बनाने, उससे कारोबार तोड़ने और अपने को आत्मनिर्भर बनाने के मकसद में आज जैसा वक्त भविष्य में कभी नहीं बनेगा। चीन से सचमुच दुश्मनी दिखला कर भारत को दुनिया से जतलाना चाहिए कि वह उससे लड़ सकता है। उसके बराबर का दमखम लिए हुए है।

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