लोकतांत्रिक जवाबदेही से बेखबर?

भारतीय जनता पार्टी छह साल से सत्ता में है। इसके पहले भी 1998 से 2004 तक केंद्र की सत्ता में रह चुकी है। यानी कुल 12 साल। 12 साल को एक युग कहा जाता है। लेकिन ऐसा लगता है कि एक युग तक सत्ता संभालने के तजुर्बे के बावजूद बीजेपी के नेता लोकतांत्रिक जवाबदेही के सिद्धांत को गले नहीं उतार पाए हैं। कायदा यह है कि लोकतंत्र में विपक्ष, सिविल सोयासटी या मीडिया कोई सवाल उठाए तो, सरकार या सत्ताधारी पार्टी उसका माकूल जवाब सामने रखे। मगर ऐसा कोई सवाल या सलाह आने पर बीजेपी के नेता आक्रोश में आकर जवाबी सवाल पूछने लगते हैं। ऐसा ही पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बयान पर हुआ। उन्होंने चीन की अभी जारी घुसपैठ के बारे में प्रधानमंत्री को एक अहम सलाह दी और सरकार के तौर-तरीके की आलोचना की। इस पर बीजेपी के अध्यक्ष जेपी नड्डा ने जवाबी हमला बोल दिया। इल्जाम लगाया कि मनमोहन सिंह के शासनकाल में 2010 से 2013 के बीच भारत ने सैकड़ों वर्ग किलोमीटर जमीन चीन को सरेंडर कर दिया। उस दरम्यान चीन के घुसपैठ की 600 से ज्यादा घटनाएं हुईं। इस पर कांग्रेस सीनियर लीडर पी चिदंबरम ने कहा कि ये बात ठीक है कि 2010 से 2013 के बीच घुसपैठ की घटनाएं हुई थीं। लेकिन उस दौरान भारत की जमीन के किसी हिस्से पर चीन का कब्जा नहीं हुआ।

ना किसी भारतीय सैनिक की चीन के फौजियों हाथों मौत हुई। अब मुद्दा यह है कि राष्ट्रीय सुरक्षा का यह सवाल क्या इस तरह दलगत तू तू- मैं मैं में बदलना चाहिए? यहां यह जरूर याद रखना चाहिए कि जब भाजपा विपक्ष में थी, तो ऐसे मामलों में उसका रुख आज की कांग्रेस की तुलना में कहीं ज्यादा आक्रामक रहता था। 2004 से 2014 के बीच- जब केंद्र में यूपीए सरकार थी- भाजपा ने चीन और दूसरे पड़ोसी देशों से भारत के रिश्तों के मामले में राजनीतिक प्रस्ताव पारित किए थे, श्वेत पत्र यानी ह्वाइट पेपर जारी करने की मांग की थी और सरहदी इलाकों का जायजा लेने के लिए अपने दल वहां भेजे थे। तब चीन या किसी दूसरे पड़ोसी देश से तनाव पैदा होने का कोई मामला सामने आता था, तो बीजेपी ने बढ़-चढ़ कर प्रेस कांफ्रेंस करते थे। उनमें तब की सरकार पर जम कर हमला बोला जाता था। यह विपक्षी दल के रूप में उसका कर्त्तव्य था। लेकिन सवाल यह है कि बीजेपी को आज क्यों यह महसूस होता कि जो पार्टियां आज विपक्ष में हैं, उनका भी ये कर्त्तव्य है कि वो सरकार से सवाल पूछें?

One thought on “लोकतांत्रिक जवाबदेही से बेखबर?

  1. भारत की जनता ने विपक्ष को इस लायक छोड़ा ही नहीं कि वह कुछ कह सके।राष्ट्रवाद और मो शा की अंधभक्ति में जनता विवेकहीन हो गई है।

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