अजित पवार की एक्सक्लूसिव कवरेज!

कई बार तो लगता है कि बहुत अच्छे समय जनसत्ता से रिटायर हो गया। इसकी बड़ी वजह यह है कि जब देखता हूं कि आज पत्रकारिता में क्या हो रहा है या करवाया जा रहा है तो मन को बेहद कोफ्त होती है। नवीनतम मामला महाराष्ट्र के घटनाक्रम के दौरान का है। सबसे तेज व अपनी टीआरपी सबसे ज्यादा होने का दावा करने वाले एक खबरिया चैनल में अपनी कवरेज के दौरान अजीत पवार की एक्सक्लूसिव कवरेज दिखाई जोकि किसी और टीवी पर नहीं थी।

चैनल ने पट्टी चलाई कि हमारी अजीत पवार से बात देखिए। चैनल के पत्रकार ने अजीत पवार से पूछा कि नवीनतम घटनाक्रम के बारे आप क्या कहना चाहते हैं तो उन्होंने चिल्ला कर कहा कि मैं इस बारे में कुछ नहीं कहना चाहता हूं। इसे चैनल ने उनकी एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में बदल दिया। मतलब कि यह कहना कि वे कुछ नहीं कहेंगे यह भी बातचीत है!

इसे देखकर एक घटना याद आ गई। बात तक की है जब इस सरकार के सत्ता में आने के बाद एक अहम पद पर नियुक्त किए गए तथाकथित समाजवादी होने का दावा करने वाले वरिष्ठ पत्रकार हमारे ब्यूरो चीफ थे। उन्होंने अपने एक मुंह लगे पसंदीदा रिपोर्टर को तत्कालीन प्रधानमंत्री के उम्मीदवार अटल बिहारी वाजपेयी का इंटरव्यू करने के लिए भेजा। क्योंकि वे अपने आपको स्टार रिपोर्टर होने का दावा करते थे व कुछ भी असंभव को संभव कर दिखाने की बात करते थे।

दो दिन बाद शाम को दफ्तर लौटकर उस रिपोर्टर ने बताया कि बहुत गजब का मामला है। वाजपेयी जी के घर का दरवाजा तो नहीं खुला मगर मैं एक विशेष खबर लेकर लौटा हूं। मैंने उनके कुत्ते के बारे में पूरी जानकारी एकत्र कर ली है। आप फोटोग्राफर को भेजकर कुत्ते की फोटो खिंचवा लीजिए। उसका नाम, उम्र सबकुछ हासिल कर लिया है। उस दिन मुझे लगा कि अब पत्रकारिता में नया मोड़ आ रहा है।

फिर कुछ दिनों बाद एक खबरिया चैनल पर खबर सुनने को मिली कि उत्तर प्रदेश में एक रेल दुर्घटना हो गई थी। दिल्ली मुख्यालय में बैठे एंकर ने अपने लखनऊ खबरिया संवाददाता से पूछा कि आखिर इस दुर्घटना की वजह क्या थी? इस पर उसने कहा कि अभी पांच मिनट पहले ही रेलवे के प्रवक्ता ने इतना ही कहा है कि यहां से करीब 250 कि.मी. दूर एक छोटी दुर्घटना हुई है। उसके पास खुद भी यह जानकारी नहीं है कि इसमें कितने लोग हताहत हुए,जनधन की हानि क्या रही। इस पर एंकर ने उससे पूछा कि वैसे आप को क्या लगता है यह तकनीकी गड़बड़ी के कारण घटी या मानवीय भूल के कारण।

संवाददाता ने फिर कहा कि अभी तक हम लोगों को कोई खबर नहीं है। बाद में जब संवाददाता मुझसे दिल्ली में मिला तो मैंने उससे इस घटना का जिक्र करते हुए पूछा कि जब तुम कह चुके थे कि कोई जानकारी ही नहीं हैं तो क्या एंकर का यह पूछना जरूरी था कि इसकी वजह क्या थी। इस पर रिपोर्टर ने कहा कि कहावत है कि हमारे धंधे में दो ही तरह के लोगों को नौकरी मिलती है। इसके बाद उसने जो कुछ कहा उसका शब्द यह था कि या तो वह खूबसूरत हो अथवा मूर्ख हो। दिल्ली से आदेश आते कि आप तीन मिनट तक इस बारे में बोलना है तो ऐसी हालत में जबरन सवाल पूछने और बोलते रहने के अलावा हम लोग और क्या कर सकते हैं। फिर मैंने कभी ऐसी बातों पर आपत्ति नहीं जताई।

वैसे मेरे समय में एक अखबार था जो कि हरियाणा, पंजाब व जम्मू में बहुत लोकप्रिय था। हिंदी के इस अखबार के संपादक बहुत प्रभावशाली व्यक्ति थे व सांसद भी रह चुके थे। एक बार उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की तस्वीर छापी व नीचे लिखा कि संपादकजी, प्रधानमंत्री नेहरू के साथ। चित्र में संपादकजी नजर नहीं आ रहे थे। सच्चाई तो यह थी कि चित्र में संपादकजी कहीं थे ही नहीं।

वे अक्सर अपने अखबार के विदेशी अखबारो में छपी अश्लील तस्वीरे छापते और उनके नीचे लिखते थे कि आज कल दुनिया में पत्रकारिता का स्तर कितना गिर गया है। अखबार में पाठको को मोहित करने के लिए कितनी गंदी तस्वीरे छापी जा रही है। इनमें से कुछ तस्वीरे जनता की जानकारी के लिए पुनः छाप रहा हूं। एक बार जब उनका इससे मन नहीं भरा तो उन्होंने एक चित्र के नीचे लिखा- कार से उतरती अभिनेत्री चित्र में अभिनेत्री के स्तन स्पष्ट नजर आ रहे हैं। हद हो गई अश्लीलता की। कई बार लगता है कि क्या अब हम उसी तरह की पत्रकारिता की और बढ़ रहे हैं।

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