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इसे हलके से ना लें

भारत-नेपाल सीमा पर शुक्रवार को जो घटना हुई, उसे दोनों देशों की सरकारों ने स्थानीय घटना कहकर ज्यादा तव्वजो नहीं दी। अगर आम दिन होते, तो इसे ऐसा ही माना जाता। लेकिन दोनों देशों के बीच रिश्तों में आज जिस तरह का तनाव है और नेपाल में जिस तरह की भारत विरोधी भावना फैली हुई है, उसके मद्देनजर इस घटना को नजरअंदाज कर देना शायद उचित नहीं होगा। बल्कि इसे गहराती बीमारी के एक लक्षण के रूप में देखना शायद ज्यादा सही होगा। भारत और नेपाल के बीच सीमा महज औपचारिक ही रही है। दोनों तरफ से दूसरी तरफ जाना आम बात रही है। इसकी वजह उस इलाके में सदियों से जारी रोटी-बेटी के रिश्ते हैं। ऐसे में मेलजोल आम बात है। मगर इसी सिलसिले में अगर बात इतनी बिगड़ जाए कि नेपाली पुलिस गोली चला दे, जिसमें एक भारतीय की मौत हो जाए, तो यह सामान्य घटना नहीं हो सकती। इस घटना में सीमा पर तैनात नेपाल सशस्त्र पुलिस बल की गोलीबारी में 22 साल के एक भारतीय युवक की मौत हो गई। जबकि दो अन्य घायल हो गए। घटना बिहार में सीतामढ़ी से लगी नेपाल सीमा के पास हुई। भारतीय अधिकारियों ने बताया कि नेपाल सशस्त्र पुलिस बल (एनएपीएफ) ने घटना के बाद एक व्यक्ति को गिरफ्तार भी किया है, जिसकी पहचान 45 वर्षीय लगन यादव के रूप में की गई है। इस घटना का से पहले दोनों देशों के बीच सीमा विवाद गंभीर रूप ले चुका है।

नेपाल के जारी नए राजनीतिक मानचित्र में लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा को नेपाली सीमा में दिखाया गया है, जबकि भारत इसे अपना हिस्सा मानता रहा है। भारत ने अब साफ कहा है कि ये तीनों इलाके उत्तराखंड के हिस्से हैं। गौरतलब है कि भारत ने जम्मू- कश्मीर और लद्दाख को दो केंद्र शासित प्रदेश बनाने के बाद पिछले वर्ष नवंबर में अपना नया मानचित्र जारी किया था। भारत के नए मानचित्र में इन इलाकों को उत्तराखंड के हिस्से के तौर पर दिखा गया है। तभी से नेपाल ने इस पर अपना दावा जताना शुरू कर दिया। अब उसने इन इलाकों को अपने नक्शे में शामिल कर लिया है। बेहतर होगा कि अब भारत सरकार इन सारे घटनाक्रमों को एक दूसरे जुड़ा मानते हुए स्थिति को सुधारने के लिए आवश्यक कूटनीतिक कदम उठाए। जिस समय चीन और पाकिस्तान से भारत के संबंध बिगड़ रहे हैं, एक और सीमा पर तनाव भारत के हित में नहीं होगा।

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