भयभीत महिलाओं का देश - Naya India
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भयभीत महिलाओं का देश

भारतीय समाज में महिलाएं भयभीत रहती हैं। उन्हें महसूस होता है कि घर से बाहर निकलना खतरनाक है। वैसे घरों के अंदर भी उनकी स्थिति कोई बहुत बेहतर नहीं होती। बात सिर्फ अधिकारों और समान सुविधाओं से वंचित रहने की नहीं हैं। बल्कि घरों के अंदर यौन शोषण और हिंसा का उनका शिकार होना सामान्य बात है। बहरहाल, हाल में बलात्कार और हत्या की घटनाओं ने घरों से बाहर जाने वाली महिलाओं की मनोदशा पर खास ध्यान खींचा है। हालत कैसी है इसकी मिसाल राष्ट्रीय राजधानी में देखने को मिली। दिल्ली में लड़कियों के दिल से घर से बाहर निकलने का डर खत्म कराने के मकसद से कराए एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। उसके आयोजक हैरान रह गए जब उन्होंने देखा कि कार्यक्रम में लड़कियों से ज्यादा पुरुष मौजूद थे। उसकी वजह यह थी कि ज्यादातर औरतें और लड़कियां अपने साथ किसी ना किसी पुरुष को लेकर आईं थीं। यह कार्यक्रम लड़कियों में सड़क पर निकलने का डर खत्म करने के लिए आयोजित किया गया था। तेलंगाना और देश के कई दूसरे हिस्सों में हाल में हुई बलात्कार की घटनाओं के बाद इसका आयोजन हुआ। आयोजकों में शामिल एक महिला पुलिस सब इंस्पेक्टर ने कहा- हमें उम्मीद थी कि महिलाएं निडर हो कर सड़कों पर निकलेंगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

तथ्य यह है कि भारत में महिलाओं के खिलाफ यौन हिंसा की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। ताजा आंकड़ों के मुताबिक 2017 में औसतन हर दिन बलात्कार के 90 मामले सामने आए। यही वो पृष्ठभूमि है जिसमें जब तेलंगाना की 27 साल की पशु चिकित्सक के बलात्कार और हत्या की खबर आई, तो पूरे देश में गुस्सा फैल गया। भारत सरकार ने महिलाओं के खिलाफ यौन हिंसा के मामले में कानून को निर्भया बलात्कार कांड के बाद बेहद सख्त बना दिया था। लेकिन उससे ऐसी घटनाएं नहीं रुकीं। कारण है कि कानूनों का पालन कराने में सरकार अब भी लचर है। बीते हफ्ते ही उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में एक बलात्कार पीड़िता को कुछ लोगों ने कोर्ट जाने के दौरान जला डाला जिसकी बाद में दिल्ली के एक अस्पताल में मौत हो गई। इन घटनाओं से यह साफ है कि अपराधियों के मन में कानून का डर नहीं है। इससे आम लोगों का न्याय तंत्र पर भरोसा कमजोर हुआ है। लेकिन यह खतरनाक स्थिति है। दरअसल यह लगातार अधिक खतरनाक होती जा रही है।

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