आईएनएस विराट का कबाड़ होना

भारतीय नौसेना में 30 वर्षेों तक सक्रिय रूप से काम करने के बाद अंततः उसका विमान वाहक युद्ध पोत आईएनएस विराट 19 सितंबर 2020 को अपने आखिरी सफर पर निकल पड़ा। उसे काफी पहले ही सेवा निवृत्त कर दिया गया था। इसके पहले वह ब्रिटिश नौसना में भी करीब 30 वर्षों तक रह चुका था। इसे पहली बार शाही ब्रिटिश नौसेना में 1959 में शामिल किया गया था तब उसका नाम एचएमएस हर्मीज था। उसने फ़ॉकलैंड युद्ध में भी हिस्सा लिया था। उसके दो साल बाद ब्रिटिश सेना ने उसे सेवा निवृत्त कर दिया था।

भारत सरकार ने ब्रिटेन से उसे 1987 में खरीदा था व उसका नाम विराट रखा था। इस तरह से उसने भारतीय व ब्रिटिश नौसेना की 60 साल तक सेवा की। वह दुनिया का सबसे पुराना युद्ध विमानवाहक पोत था। वैसे तो उसे 6 मार्च 2017 को ही सेवा निवृत्त कर दिया गया था क्योंकि यह तब तक 2258 दिनों तक समुद्र में 22623 घंटे तक की यात्रा कर बहुत लंबी दूरिया तय कर चुका था।

यह दूरी पूरी दुनिया में छह चक्कर लगाने जितनी मानी जाती है। वह दो साल तक इसलिए मुंबई में ही रहा क्योंकि तब तक उसके भविष्य को लेकर सरकार अंतिम फैसला नहीं कर पाई थी। महाराष्ट्र व आंध्र प्रदेश की सरकारे उसे नौसेना के एक संग्रहालय में परिवर्तित करना चाहती थी मगर बात नहीं बनी। इस जहाज को तोड़े जाने के लिए गुजरात के अलंग इलाके के लिए उसके अंतिम सफर पर रवाना कर दिया गया। जहां उसके टुकड़े-टुकड़े कर उसका काम में लाया जा सकने वाला सामान निकलकर एक साल के अंदर उसका नामो-निशान समाप्त कर दिया जाएगा।

इस जहाज को पिछले माह मेटल स्क्रेप कारपोरेशन ने नीलाम कर दिया था व इसे श्रीराम ग्रुप नामक कंपनी ने 38.54 करोड़ रुपए में खरीदा था। जब शनिवार की सुबह 11.30 पर यह विशाल विमान वाहक युद्ध पोत अंतिम यात्रा पर रवाना हुआ तो उसे अंतिम विदाई देने के लिए बड़ी संख्या में नौसेना के अधिकारी व नागरिक वहां मौजूद थे। इसकी नीलामी पर बड़ी तादाद में लोगों ने दुख जताया है वे चाहते हैं कि आपरेशन पराक्रम सरीखे अहम आपरेशनों में हिस्सा ले चुके इस जहाज का संरक्षण किया जाए। भारतीय नौसेना में परिचालन के दौरान आईएनएस विराट पर चालक दल समेत 1500 कर्मियो का बेड़ा रहता था। अलग-अलग वर्षों में आईएनएस विराट के परिचालन बोर्ड में शामिल रहे चार अधिकारी बाद में भारतीय नौसेना के प्रमुख भी बने। इसे नीलामी में खरीदने वाली कंपनी इसे खींचकर अलंग ले जा रही है वहां तक पहुंचने में इसे दो दिन लग जाएंगे। अलंग में जहाजो को विघटन करने का दुनिया का सबसे बड़ा यार्ड है।

इस विमान वाहक युद्ध पेात में विभिन्न विभागो ने 22622 घंटो से अधिक समय तक उड़ाने भरी है। गिनीज बुक ऑफ रिकार्ड्स के मुताबिक द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान बनाया गया आईएनएस विराट दुनिया में सबसे लंबे समय तक चलने वाला युद्ध पोत है। अलंग को दुनिया के जहाजो की कब्रगाह मानी जाती है। यहां दुनियाभर से सेवानिवृत्त किए जा चुके या सेवा से हटाए जा चुके जहाज टुटने के लिए आते हैं। पुरी दुनिया में भारत, बांग्लादेश व पाकिस्तान में ही जहाजो को तोड़ने का काम होता है।

अलंग गुजरात के भावनगर शहर के करीब स्थित शहर है। ऐसा माना जाता है कि दुनिया भर के पानी के जहाज यही तोड़े जाने के लिए लाए जाते हैं। जहां सैनिक युद्धपोतो से लेकर तेलवाहक टैंकर, सामान व कारो को ले जाने वाले पुराने हो चुके जहाज लाए जाते हैं। जब ज्वार आता है तो समुद्र की ऊंची लहरो के कारण यह जहाज किराने तक पहुंच जाते है व भाटा आने पर पानी घटने के बाद यह जहाज वहीं किनारे पर फंस जाते है व वहां काम करने वाले हजारों मजदूर इन्हें तोड़ने का काम शुरू कर देते हैं।

उसमें मौजूद काम आ सकने वाले सामान जैसे फर्नीचर, फिटिंग, पुराने इंजन आदि निकाल लिए जाते हैं व इन्हें अलग से बेच दिया जाता है। समय-समय पर इस काम की आलोचना होती रही है क्योंकि वहां काम करने वालो को बहुत बुरी हालात में काम करना पड़ता है। उन्हें गैसो रसायनो के बीच काम करना पड़ता है। वहां कोई अच्छा अस्पताल भी नहीं है निकटतम अस्पताल 50 किलोमीटर दूर है।

जब फांसीसी विमान वाहक युद्धपोत कलोमेंसू को वहां लाया जा रहा था तो काफी विवाद हुआ था। तब सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी 2006 में उसके यहां लाए जाने पर रोक लगा दी थी व फ्रांस को अंततः उसे ब्रिटेन के एक जहाज तोड़ने वाले उद्योग को भेजना पड़ा। हिंदुस्तान में जहाज तुड़वाना सस्ता पड़ता है क्योंकि यहां इंसान की जिदंगी की कोई कीमत नहीं है व मजदूरी बहुत सस्ती है। अब जापान के साथ मिलकर गुजरात सरकार वहां के हालात बेहतर बनाने की कोशिश कर रही है। जहां पर्यावरण के लिए पैदा होने वाले खतरो से बचाव के प्रयास किए जाएंगे।

वहां कुछ साल पहले गैस कटर से एक बड़े डिब्बे को काटते समय विस्फोट हो जाने के कारण 5 मजदूर मारे गए थे व करीब आधा दर्जन गंभीर रूप से घायल हो गए थे। यह उद्योग 10 किलोमीटर के इलाके में फैला हुआ है। जब सुप्रीम कोर्ट ने जहाज क्लींमेंसू के प्रवेश पर रोक लगाई तब उसे बताया गया था कि इस फांसीसी जहाज पर खतरनाक रसायन भरे हुए हैं। इनमें बेहद जहरीला एस्बबस्टस भी शामिल है जिसकी मात्रा 50 से 1000 टन तक मानी गई थी। यहां जहाज तोड़ने का धंधा काफी मुनाफा देने वाला माना जाता है। इससे निकलने वाला कबाड बहुत महंगा बिकता है।

खासतौर पर विराट पर लगे स्टोनलेस स्टील से जो पाइप व दूसरे सामान तैयार किए जाएंगे उनकी मोटर साईकिल उद्योग में काफी मांग है। कबाड़ में निकली धातुएं अहमदाबाद स्थित लोहा बनाने वाली फाउंड्री को बेच दी जाती है। दो मोटर साईकिल निर्माता कंपनियों ने इस विराट जहाज को खरीदने वाली कंपनी से संपर्क भी स्थापित कर लिया है। इसे लौहे की रसियो से खींचकर अलंग के तट पर पहुंचा दिया है। केंद्रीय जहाजरानी. मंत्री मनसुख मंडाविया ने धन्यवाद विराट कहते हुए सफाई दी है कि केंद्र सरकार जहाज को स्मारक में बदलने के लिए 500 करोड़ रुपए खर्च करने के लिए तैयार थी मगर पाया गया कि जहाज का अगला हिस्सा 10-15 साल में गल जाएगा। अतः उसने यह विचार त्याग दिया और अब जल्दी ही गिनीज बुक आफ रिकार्ड में सबसे लंबे अरसे तक नौसेना में रहने का रिकार्ड बनाने वाला युद्ध जहाज कुछ माह में तोड़कर गला दिया जाएगा।

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