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क्रिकेट प्रबंधकों की बेरहमी

भारत का क्रिकेट प्रबंधन किस हद तक असंवेदनशील और लालची है, इसकी ही ये मिसाल है कि इस वक्त जब देश अभूतपूर्व मानव निर्मित आपदा से मर्माहत है, उसके बीच भी उसने इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) का आयोजन जारी रखा है। जबकि खुद खिलाड़ी भी इसकी पीड़ा झेलने को मजबूर हो चुके हैँ। ताजा मामला दिल्ली कैपिटल्स टीम के गेंदबाज रविचंद्रन अश्विन का है। उन्होंने एलान किया है कि वे इस साल के आईपीएल से हट रहे हैं, क्योंकि उनका परिवार कोविड-19 से जूझ रहा है। उन्होंने एक ट्विट में लिखा- “कल से मैं इस साल के आईपीएल से ब्रेक ले रहा हूं। मेरा परिवार कोविड-19 से लड़ रहा है और इस मुश्किल वक्त में मैं उनका साथ देना चाहता हूं।

अगर सब ठीक रहा है तो मैं खेलने के लिए लौटूंगा।” कोविड महामारी ने निजी और सामूहिक विपत्तियों की ऐसी कथा लिखी है, जिसके बारे में पहले कल्पना भी कठिन था। ऐसे में जिसने बिल्कुल निजी पीड़ा नहीं झेली है, वह भी अपने आस-पास से मिल रही खबरों से सदमाग्रस्त है। इसके बीच क्रिकेट का तमाशा जारी रखना मानव मन पर प्रहार करने जैसी घटना है। कुछ पूर्व विदेशी खिलाड़ियों ने भी इस प्रहार को महसूस किया है। मसलन, ऑस्ट्रेलिया के पूर्व विकेटकीपर- बल्लेबाज ऐडम गिलक्रिस्ट ने सवाल उठाया है कि जब भारत में कोरोना के डरावने आंकड़े आ रहे हैं, तब क्या आईपीएल का जारी रखना उचित है। गौरतलब है कि ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर एजे टाई ने कोरोना के बढ़ते मामलों के चलते आईपीएल बीच में ही छोड़ने का फैसला किया। रविवार को टाई ने मुंबई से दोहा के लिए उड़ान भरी, जहां से वह ऑस्ट्रेलिया चले गए। राजस्थान रॉयल्स के लिए खेलने वाले टाई ने मीडिया को बताया कि कुछ और ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी भी ऐसा ही करने पर विचार कर रहे हैं। ऐसा विचार अनेक भारतीय खिलाड़ियों के मन भी होगा। लेकिन अपने दब्बूपन के कारण वे बोलने से हिचक रहे होंगे। टाई की इस बात पर गौर किया जाना चाहिए कि खिलाड़ियों में डर है कि उन्हें लॉकडाउन के कारण ऑस्ट्रेलिया लौटने में परेशानी हो सकती है। इस वक्त सारी दुनिया क ध्यान भारत पर है। वहां भारत के लोगों के लिए प्रार्थनाएं की जा रही हैं और सहायता सामग्रियां भेजी जा रही हैँ। लेकिन इसके बीच भारत की क्रिकेट कॉम्युनिटी मौज में मस्त है।

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