ईरान की हुई किरकरी

इस्लामिक देशों में महिलाओं का क्या हाल है, किमिया अलीजादेह का मामला उसकी ही एक मिसाल है। ईरान की एकमात्र ओलंपिक पदक विजेता अलीजादेह ने देश छोड़ दिया है। 21 वर्षीय तायक्वोंडो खिलाड़ी अलीजादेह ने इस बारे में एक पोस्ट सोशल मीडिया पर लिखा। इसमें उन्होंने देश छोड़ने के अपने इरादे का एलान किया। कहा- मैं ईरान में लाखों प्रताड़ित महिलाओं में से एक हूं। उन्होंने सरकार पर राजनीतिक हथकंडे के लिए ‘पाखंड, अन्याय और महिलाओं पर अत्याचार’करने का आरोप लगाया। अलीजादेह ने 2016 में ईरान के लिए ओलंपिक में तायक्वोंडो में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रचा था। अलीजादेह का ये एलान ऐसे वक्त हुआ, जब ईरान और अमेरिका के बीच क्षेत्र में तनाव बढ़ा हुआ है। ईरान के सबसे ताकतवर कमांडर जनरल कासिम सुलेमानी की अमेरिकी हमले में मौत के बाद दोनों देश आक्रामक रवैया अपनाए हुए हैं। कासिम की मौत के बाद आठ जनवरी को यूक्रेन एयरलाइंस का बोइंग 737-800 विमान क्रैश हुआ था, जिसमें सवार 176 लोग मारे गए थे। इसके बाद ईरान ने पिछले हफ्ते कबूल किया कि उसकी सेना ने गलती से यूक्रेन के यात्री विमान को निशाना बना दिया था। ईरान सरकार की तरफ से जारी बयान में इसे इंसानी भूल बताया गया था। ईरान ने हादसे के दो दिन बाद तक विमान पर मिसाइल से टकराने की बात से इनकार किया था। इस विमान हादसे में सबसे ज्यादा ईरान के 82 और कनाडा के 63 यात्री मारे गए थे। हाल के महीनों में देश छोड़ने वाली अलीजादेह अकेली जानी मानी खिलाड़ी नहीं हैं। ओलंपिक खिलाड़ी और 2018 में अंतरराष्ट्रीय जूडो चैंपियनशिप जीतने वाले सैयद मोल्लाई ने ईरान छोड़कर मंगोलिया की नागरिकता पहले ही ले ली थी। दरअसल ईरान नहीं चाहता था कि मोल्लाई टोक्यो में वर्ल्ड जूडो चैंपियनशिप में हिस्सा लें। ईरान को आशंका थी कि उनका सामना इजराइली खिलाड़ी से हो सकता है। ऐसे में मोल्लाई को चैंपियनशिप में हिस्सा ना लेने का आदेश दिया गया। लेकिन मोल्लाई सरकार के आदेश की फिक्र किए बिना टोक्यो गए और सेमीफाइनल तक पहुंचे। एक और ईरानी पैरा खिलाड़ी जिसने 2020 टोक्यो ओलंपिक में जगह बना ली है, पिछले साल जुलाई में देश छोड़कर नीदरलैंड्स में शरण ले थी। अलीजादेह भी नीदरलैंड्स में ही मौजूद हैं। ईरान सरकार ने कहा है कि किसी भी खिलाड़ी को जबरन देश में रोककर नहीं रखा जा सकता। मगर यह तय है कि अलीजादेह के मामले से ईरान की भारी किरकरी हुई है।

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