जीवन में ऐसा बुरा वक्त कभी नहीं देखा

मैं अंधविश्वासी नहीं हूं। मगर अब तक के अपने अनुभवो के बाद मैंने माना है कि पुरानी कहावतों, रोग, गंडा ताबीज आदि चीजों का कुछ सीमा तक असर होता है। कम-से-कम नुकसान किए जाने या होने के मामले में तो उनका जरूर असर होता है। बचपन में बुजुर्गो को कहते हुआ सुना था कि इंसान बड़ा कौर भले ही खा ले मगर उसे बड़ा बोल कभी नहीं बोलना चाहिए।जब नरेंद्र मोदी पहली बार सत्ता में आए थे तो आसमान छू चुकी तेल की कीमते गिरने लगी थी। इससे उत्साहित होकर वे सार्वजनिक रूप से खुद ही यह कहने लगे कि यह सस्ता मेरी वजह से हो रहा है क्योंकि राजा या देश के प्रशासक के भाग्य के साथ ही देश का भाग्य जुड़ा होता है क्योंकि मैं भाग्यशाली हूं। अतः देश का फायदा हो रहा है।

अब जब चारों तरफ कोरोना वायरस के कारण हाहाकार मचा हुआ है तो इसका श्रेय किसे दिया जाना चाहिए? मैंने अपने जीवन में अनेक बार बुरे समय देखें मगर इतना बुरा समय नहीं देखा कि जबकि हालात आपको यह अनुभव करा दे कि नजरबंदी या घर में ही कैद किए जाने का मतलब क्या होता है। हमने व हमारी सरकार ने जो कदम उठाए हैं उनके कारण हम लोग घर में ही नजरबंद होकर अपनी बरबादी देख रहे हैं। अखबार वालो ने खुद ही अखबार देना बंद कर दिए हैं। टीवी खोलो तो कोरोना के सिवाए कुछ नहीं दिखता है। सारी खबरें एक जैसी।

बदले है तो सिर्फ इससे प्रभावित होने वाले लोगों व देशों के आंकड़े। जीवन की पूंजी जहां लगाकर हर महीने कुछ आर्थिक राशि प्राप्त करने की सोची थी वह शेयर बाजार गिरने के सारे रिकार्ड तोड़ रहा है। आपका पैसा बैंको में सुरक्षित नहीं है। घर पर तो रखने का सवाल ही पैदा नहीं होता है। म्यूचुअल फंड के जरिए आप इस क्षेत्र के विशेषज्ञ के जरिए जो थोड़ी बहुत कल्पना कर सकते हैंपर अब उसकी क्या स्थिति होगी?जब आप की गलती किए बिना आपका नुकसान होता है तो आप बौखला जाते हैं। यह प्रकृति की ऐसी मार है जो कि हर देश हर वर्ग के व्यक्ति पर पड़ रही है। एक छोटे से वायरस ने हर इंसान को हाथ पर हाथ रखकर बैठने में मजबूर कर दिया है। सारे काम धंधे ठप्प है जो आज नहींहो रहे हैं। सरकारें खुद ही पूर्ण कर्फ्यू लगा रही है।

एकाध रोज तो अपने घरों की बालकानी में खड़े होकर शाम 5 बजे थाली बजा कर खुशी का इजहार करना अच्छा लग सकता है पर रोज ऐसा करता तो मानो हर दिन जुशौदा पीने जैसा है। मैंने तो कनाड़ा के बाद पहली बार भारत में घर पर पूजा करते हुए भगवान पर फूल व प्रसाद नहीं चढ़ाया क्योंकि यह डर बैठा हुआ है कि पता नहीं माला के फूल किन-किन हाथों से गुजरे हो व उनके हाथ लगाने वालो की तबियत कैसी रही हो।हम लोगों ने तो इंसानों के साथ-साथ भगवान को भी क्वारंटाइन कर दिया है। घर का मंदिर तो खुला है मगर सोसायटी के मंदिर को ताला जड़ दिया गया है। जब हम भगवान को अलग-थलग कर रहे है तो सोसायटी के सुरक्षाकर्मियो का क्या कहना जोकि आजकल काफी सुबह ही आ जाते हैं। पूछने पर पता चला कि घर से जल्दी निकलने के कारण उन लोगों ने चाय तक नहीं पी थी।

अतः पत्नी ने घर पर उन लोगों के लिए चाय नाश्ता तैयार करवाया व अगले दिन इस समस्या का स्थायी हल ढूंढ़ने के लिए प्रेसीडेंट व सेक्रेटरी से बात की व तय हुआ की सोसायटी में ही रहने वाला कर्मचारी उन्हें चाय उपलब्ध करवाए व हम लोग उसे इस एवज में एक राशि देंगे। कई बार तो लगता है कि लोगों का भगवान तक से विश्वास उठता जा रहा है। हालात बद से बदत्तर होते जा रहे हैं। मुझे तो कई बार लगता है कि भगवान तो मानों हिंदी फिल्म का वह दरोगा है जोकि खलनायक के साथ हाथ मिलाता है व आम निर्दोष के कहने, गिडगिडाने पर भी कुछ न कर अपने हाथ खोल देता है।

कुल मिलाकर मैंने अपने जीवन में कभी इतने खराब हालात नहीं देखें। आप कोरोना से डर के कारण घर के बाहर ही नहीं निकल पा रहे हों। भगवान तक इससे डर गए है व उनके घरों मंदिरों में ताले डालकर लोगों को दर्शन करने से रोका जा रहा हो। पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था की ऐसी-तैसी हो गई हो। ऐसे में मुझे एक चुटकूला याद आता है। एक बार किसी-ने-किसी से पूछा कि अगर तुम जंगल में जा रहा हो व सामने से शेर आ जाए तो तुम क्या करोगे? जवाब मिला कि मैं क्या करूंगा? जो कुछ भी करना होगा वह शेर ही करेगा। अब कोरोना वायरस से निपटने का कोई हल ढूंढ़ न पा रहे हो कारणवश यह चुटकूला याद आ गया है। हम वायरस के सामने खड़े निहत्थे इंसान जैसे हैं?

3 thoughts on “जीवन में ऐसा बुरा वक्त कभी नहीं देखा

  1. राजनीति में जीतना बेहद जरूरी है क्योंकि हारे हुए लोग देश की सेवा नहीं कर सकते।
    जीतने के लिए जो कहा वह सही।
    सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद अब भारत के लिए उनसे बेहतर प्रधानमंत्री मिलना मुश्किल है।

  2. Sir, bura waqt hai, lenin phir bhi hum san sath sath hai, aap bhagwaan oar pura vishwas rakhein, ye waqt humhey bagut kuch sikha kar jayega, apno k sath honey ka ek sukadh ehsaas, lekin ishey apni sari jindagi yaad rakhna . Wo uparwala kuch na kuch sikhata humhey.

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