कश्मीर में लाख मुसीबतें

नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी को लेकर उठे विवाद के बीच कश्मीर की चर्चा कहीं छिप गई है। जबकि कश्मीर में हालात लगातार खराब बने हुए हैं। वहां कारोबार चौपट है। कश्मीर को लेकर भारत सरकार पर अंतरराष्ट्रीय दबाव की हालत यह है कि अब सरकार को विदेशी राजदूतों को वहां ले जाने की योजना बनानी पड़ी है। वैसे यह तय नहीं है कि विदेशी राजदूतों का दौरा कब होगा- अथवा होगा भी या नहीं। मगर इसके लिए नई दिल्ली स्थित दूतावासों से संपर्क किया गया है। पांच अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 के एक खंड को छोड़ कर बाकी सभी खंडों को निष्प्रभावी करके जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा हटा दिया था। साथ ही जम्मू-कश्मीर राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों- जम्मू कश्मीर और लद्दाख में बांट दिया गया। सरकार ने अनुच्छेद 35ए को भी हटा दिया और स्थायी निवासियों को मिले खास अधिकार खत्म कर दिए थे। अनुच्छेद 370 हटाने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 अगस्त को देश के नाम संबोधन में कहा था कि धीरे-धीरे हालात सामान्य हो जाएंगे और लोगों की परेशानी भी कम होती चली जाएगी। लेकिन कश्मीर के लोग पाबंदियों की वजह से भारी आर्थिक नुकसान उठा रहे हैं। कश्मीर चैंबर ऑफ कॉमर्स का कहना है कि घाटी की अर्थव्यवस्था बुरी तरह से चौपट हो गई है। करीब 18,000 करोड़ का आर्थिक नुकसान घाटी को अब तक होने का अनुमान लगाया गया है। ट्रांसपोर्ट, शिकारा, हस्तशिल्प और पर्यटन जैसे हर सेक्टर से जुड़े लोग बिना काम के बैठे हुए हैं। इस नुकसान की बड़ी वजह इंटरनेट का बंद होना है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इंटरनेट बंद होने की वजह से हर क्षेत्र का शख्स प्रभावित हुआ है। अक्सर कारोबार के ऑर्डर इंटरनेट से आते हैं। ईमेल और व्हाट्सऐप के जरिए जो  ऑर्डर कारोबारियों को मिलते थे, वो इंटरनेट ठप होने की वजह से बंद हो गए। हाल ही में कश्मीर के कारोबारियों ने जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल गिरीश चंद्र मुर्मु से मुलाकात कर इन परेशानियों के बारे में बताया था। उपराज्यपाल ने उचित कार्रवाई का भरोसा दिया। लेकिन हुआ कुछ नहीं। दरअसल, कश्मीर के लोग बहुत-सी मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। व्यापारी समुदाय, छात्र और जनता को लगता है कि पाबंदियां एक तरह की सजा हैं। इसका असर उनकी मानसिक स्थिति पर पड़ा है। सबसे दुखद यह है कि बाकी देश में इसकी किसी को चिंता भी नहीं है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Shares