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लाठी चार्ज के बाद

manohar lal khattar

Lathi charge on farmers इससे टकराव का माहौल और गहरा गया है। लेकिन यह भी साफ है कि भाजपा ऐसे टकराव की फिक्र नहीं करती। उसकी गणना में अगर यह बात साफ है कि इससे उसके वोट आधार पर कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा, तो वह टकराव बढ़ाने में यकीन करती है। तो साफ है, किसान आंदोलन जारी रहेगा।

किसान आंदोलन इस हकीकत को पहले से स्वीकार कर चुका था कि नरेंद्र मोदी सरकार के सत्ता में रहते वे तीन कृषि कानून रद्द नहीं होंगे, जिस मांग के लिए वह नौ महीनों से आंदोलन चला रहा है। लेकिन इस आंदोलन की खूबी यह है कि अपने फौरी मकसद में कामयाबी की उम्मीद ना होने के बावजूद वह जारी रहा है। समझा जा सकता है कि इस आंदोलन के समर्थक किसानों में ये भाव गहराया हुआ है कि यह करो या मरो की लड़ाई है। उनमें यह भावना मौजूद है कि अगर मरना ही है, तो फिर लड़ते हुए मरा जाए। बहरहाल, इसके साथ ही आंदोलन ने अपना फ़लक फैलाने और अपनी सोच का दायरा बढ़ाने की क्षमता का प्रदर्शन किया है। उसने अपने आंदोलन के साथ खेतिहर मजदूरों और ट्रेड यूनियनों के साथ-साथ छात्र और आदिवासी-दलित आंदोलनों को भी जोड़ने की पहल की है। साथ ही यह अब साफ है कि आंदोलन ने भाजपा विरोधी चरित्र भी अपना लिया है। ऐसे में लड़ाई का मोर्चा सियासी हो गया है।

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बीते हफ्ते किसानों पर हरियाणा के करनाल में लाठी चार्ज हुआ। किसान आंदोलन का दावा है कि इसमें घायल एक किसान की मृत्यु हो गई। लाठी चार्ज से पहले करनाल के डीएम ने जिस लहजे में पुलिस को निर्देश दिए, उसने आंदोलन की आग में घी डालने का काम किया है। उससे आंदोलन में एक नई तेजी आती दिखती है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में डीएम आयुष सिन्हा को पुलिस को यह निर्देश देते सुना गया- “सर फोड़ दो”। उन्होंने एक रेखा बताते हुए कहा कि उसे जो पार करे उसके सिर पर उन्हें खून नजर आना चाहिए। जाहिर है, किसी लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रशासनिक अधिकारी का यह नजरिया स्वीकार्य नहीं हो सकता। लेकिन आज के दौर में यही रवायत बन गई है। हरियाणा के मुख्यमंत्री एमएल खट्टर ने डीएम की भाषा को अनुचित बताते हुए भी उनके रुख का समर्थन किया है। जाहिर है, इससे टकराव का माहौल और गहरा गया है। लेकिन यह भी साफ है कि भाजपा ऐसे टकराव की फिक्र नहीं करती। उसकी गणना में अगर यह बात साफ है कि इससे उसके वोट आधार पर कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा, तो वह टकराव बढ़ाने में यकीन करती है। तो साफ है, किसान आंदोलन जारी रहेगा। लाठी चार्ज के बाद उसका अधिक रुख सामने आ सकता है।

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