बेच-बेच कर खाओ!

जीवन बीमा निगम में सरकार अपना एक बड़ा हिस्सा बेचेगी, ये एलान आम बजट में हुआ था। अब ताजा खबर यह है कि नरेंद्र मोदी सरकार ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) के जरिए स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया (सेल) में अपनी पांच फीसदी हिस्सेदारी बेचने की योजना बना रही है। इससे सरकारी खजाने को 1,000 करोड़ रुपये मिलने की संभावना है। खबरों के मुताबिक डिपार्टमेंट ऑफ इंवेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट मैनेजमेंट (दीपम) और इस्पात मंत्रालय के अधिकारियों ने सेल में हिस्सेदारी बेचने के लिए सिंगापुर और हांगकांग में रोड-शो करने की योजना बनाई है। हालांकि कोरोना वायरस संक्रमण के कारण हांगकांग में रोड शो का कार्यक्रम रद्द करना पड़ सकता है। सेल में सरकार की 75 फीसदी की हिस्सेदारी है। सरकार ने दिसंबर, 2014 में कंपनी में अपनी हिस्सेदारी बेची थी। रोड शो के दौरान निवेशक की मांगों का आकलन करने की कोशिश की जाएगी। वर्तमान बाजार मूल्य पर कंपनी की पांच फीसदी हिस्सेदारी बेचने पर सरकार को 1,000 करोड़ रुपये मिल सकते हैं। सरकार की कोशिश चालू वित्त वर्ष में सेल में अपनी हिस्सेदारी बेचने पर होगी, क्योंकि उसकी नजर चालू वित्त वर्ष में 65,000 करोड़ रुपये के संशोधित विनिवेश लक्ष्य तक पहुंचने की है। सीपीएसई में हिस्सेदारी की बिक्री के जरिए चालू वित्त वर्ष में अब तक 34,000 करोड़ रुपये जुटाए गए हैं। मार्च के आखिर तक बाकी 31,000 करोड़ रुपये जुटाया जाना है। वित्त वर्ष 2020-21 के लिए सरकार ने सीपीएसई में हिस्सेदारी की बिक्री से 1.20 लाख करोड़ रुपये जमा करने का लक्ष्य रखा है। इसे साथ ही सरकार गार्डन रिच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (जीआरएसई) की 10 फीसदी हिस्सेदारी भी बेचने की योजना बना रही है। जीआरएसई में सरकार की 74.50 प्रतिशत की हिस्सेदारी है। वर्तमान मार्केट वैल्यू के हिसाब से इससे सरकार को करीब 200 करोड़ रुपये मिल सकते हैं। इससे पहले वित्त वर्ष 2020-21 का बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया था कि सरकार का एलआईसी में आईपीओ के जरिये अपनी कुछ हिस्सेदारी बेचने की घोषणा की थी। फिलहाल एलआईसी की पूरी हिस्सेदारी सरकार के पास है। इसके पहले नवंबर 2019 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल), भारतीय जहाजरानी निगम और कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया समेत पांच प्रमुख सार्वजनिक उपक्रमों में सरकार का शेयर बेचने को मंजूरी दी थी।

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