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Friday, May 14, 2021
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कहानी से संभलेगी बात?

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म्यांमार के सैनिक शासक अपनी छवि सुधारना चाहते हैं। यानी वे चाहते हैं कि जिस तरह का दमन कर रहे हैं, दुनिया उस पर ध्यान ना दे। या ध्यान दे तो यह समझे कि आखिर वे क्यों ऐसा कर रहे हैं। विश्व मीडिया में छपी तस्वीरों और वीडियो में देखा गया है कि सैनिक प्रदर्शनकारियों पर बर्बर कार्रवाई कर रहे हैं। इसे देखते हुए खास कर पश्चिमी देशों में उनकी कड़ी आलोचना हुई है। पश्चिमी देशों ने तखता पलट कर सत्ता हथियाने वाले सैनिक शासकों को म्यांमार का अवैध शासक बताया है। साथ ही उस पर मानवता के खिलाफ अपराध करने के आरोप लगाए हैँ। तो बढ़ती अंतरराष्ट्रीय आलोचना के बीच अब सैनिक शासकों ने विदेशों में अपनी छवि सुधारने के लिए एक पब्लिक रिलेशन्स (पीआर) एजेंसी की मदद ली है।

उन्होंने एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय लॉबिस्ट की नियुक्ति की है, जो अतीत में भी तानाशाहों को अपनी पीआर सेवा दे चुका है। म्यामांर के सैनिक शासन ने कहा है कि उसकी नियुक्ति दुनिया को ‘असली स्थिति बताने’ के लिए की गई है। लॉबिस्ट एरी बेन-मेनाशे उसने इस बात की भी पुष्टि की है म्यांमार सरकार से उसे ‘एक बड़ी रकम’ मिली है। साथ ही अगर वह म्यांमार के सैनिक शासकों की छवि सुधारने में कामयाब रहा, तो उसे बोनस भी मिलेगा। बेन-मेनाशे ने कहा कि उसकी पॉलिटकल कंसल्टिंग फर्म- डिकेन्स एंड मैडसन कनाडा- अमेरिका और अन्य सरकारों से कहेगी कि म्यांमार के सैनिक शासकों को उन्होंने गलत ढंग से समझा है। कंपनी पश्चिमी देशों में यह कहानी फैलाएगी कि नेशनल लीड फॉर डेमोक्रेसी की नेता आंग सान सू ची ने रोहिंग्या मुसलमानों के कत्ल-ए-आम में उससे कही ज्यादा बड़ी भूमिका निभाई, जितना पश्चिमी देशों में समझा जाता है। साथ ही ये बात भी वहां बताई जाएगी कि सू ची देश को चीन की गिरफ्त में सौंप रही थीं। इसे रोकने के लिए सेना ने अपने हाथ में सत्ता ली। बेन-मेनाशे की फर्म यह बात भी पश्चिमी देशों को बताएगी एनएलडी ने धांधली के जरिए चुनाव जीता। कहा जाएगा कि मौजूदा लोकतंत्र समर्थक आंदोलन को म्यांमार की बहुसंख्यक जनता का समर्थन हासिल नहीं है। लेकिन क्या ये बात सचमुच ये एजेंसी उन लोगों के गले उतार पाएगी, जो रोज के मीडिया कवरेज में कुछ अलग हकीकत देख रहे हैं? बहरहाल, यह तो साफ है कि म्यांमार के शासक इस हकीकत को बदलने का अभी कोई इरादा नहीं रखते।

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साभार - ऐसे भी जाने सत्य

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