मोदी-शाह बना रहे 2024 की पिच

सौ टका सिर्फ और सिर्फ हिंदू बनाम मुस्लिम भावनाओं का खेल। एक वक्त ऐसा दंगों से हुआ करता था अब राष्ट्र-राज्य के हर मुद्दे, नैरेटिव में संस्थागत तौर पर पंचवर्षीय योजना के अंदाज में इस मैसेजिंग से हो रहा है कि मुसलमान को किस-किस तरह से हैंडल करना है! कह सकते हैं आजादी के बाद कांग्रेस सरकारों ने जो लापरवाहियां बरती, धार्मिक-सामाजिक-राजनैतिक और व्यवस्थागत तौर पर हिंदूओं के जहन में जो मुस्लिम चिंता, समस्या बनती गई तो हिंदूवादी राष्ट्रवादी सरकार भला क्यों न एक-एक कर सब पर काम करें। तलाक पर काम करें। कश्मीर पर काम करें। मंदिर-मस्जिद पर काम करें और नागरिकता, अवैध घुसपैठ पर काम करें। क्यों न भारत को मुस्लिम कंट्रास्ट में हिंदुओं की पुण्य भूमि, मूल मातृ, शरण भूमि बनाया जाए?

यही नरेंद्र मोदी-अमित शाह की 2019-2024 की पंचवर्षीय योजना है! योजना का लक्ष्य है और वोट बटोरने वाली पिच का निर्माण। इस रणनीति को विपक्ष, भारत की सेकुलर जमात, लुटियन एलिट बूझ नहीं पा रहा है! सोचे, मोदी-शाह ने किस फुर्ती से पांच दिन में नागरिकता संशोधन विधेयक पारित करा लिया? फैसला राष्ट्रपति से दस्तखत व फटाफट गजेट नोटिफिकेशन तक जा पहुंचा। मतलब जैसे कश्मीर से अनुच्छेद-370 खत्म करने, दो नए केंद्र शासित प्रदेशों के गठन का कानून, विधायिकी काम एक सप्ताह में हो गए तो तो वहीं रफ्तार नागरिकता संशोधन बिल की भी!

क्यों? क्यों नहीं रत्ती भर दुविधा या झिझक? इसलिए कि सब तयशुदा है। दुनिया कुछ भी कहे, आंदोलन कुछ भी हो, जब देश को पांच साल हिंदू-मुस्लिम क़ड़ाव में ही पकाना है तो इधर-उधर की चिंता क्यों करनी? कंफ्यूजन या निश्चय में गड़बड़ाना क्यों? अमित शाह को पता है कि कहने को कुछ कहें पर नागरिकता संशोधन बिल से सवर्त्र मैसेज होगा कि मुसलमान के साथ भेदभाव है! प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की किसी सफाई का कोई मतलब नहीं। एक अकेला अर्थ बनेगा कि हिंदू को, बाकि धर्मो के लिए भारत शरण है मगर इस्लाम को मानने वालों के लिए नहीं।

यही सत्व-तत्व वाली बात है। मोदी-शाह की हिम्मत को दाद देनी होगी जो कश्मीर के तुरंत बाद दुनिया को, इस्लामी देशों को मैसेज बनने दिया कि भारत सरकार पड़ोस के इस्लामी देशों को हिंदू उत्पीड़न वाला मानती है और मुस्लिम शरणार्थियों को देश निकाला दिया जाएगा। इसी के चलते अमेरिका, वैश्विक मीडिया में चर्चा है। उस नाते पाकिस्तान सरकार को कूटनैतिक तौर पर मोदी सरकार के खिलाफ प्रचार का नया प्रमाण मिला है। यह कूटनैतिक तौर पर भारत के लिए मुश्किल वाली बात है। बावजूद इसके मोदी-शाह का फैसला है तो बुनियादी वजह पंचवर्षीय वोट योजना का रोडमैप है। दोनों को पता है कि जब सब तरफ मोदी-शाह के बनाए कानून के खिलाफ हल्ला होगा, उसमें बार-बार मुस्लिम एंगल उभरेगा तो हिंदूओं में अपने आप सोच पुख्ता होती जाएगी कि कुछ भी हो हिंदू के हितरक्षक हैं दोनों!

इसलिए विपक्ष, कांग्रेस, राहुल गांधी सब अपने पांवों पर कुल्हाड़ी मार रहे हंै जो नागरिकता कानून के पिच पर मोदी-शाह के खिलाफ खेल रहे हैं। हिसाब से विपक्ष को संसद में विरोध करके मौन बैठ जाना चाहिए। ये इस पर जितना हल्ला करेंगे उतना ही अपना नुकसान करेंगे। इन्हे हिंदू -मुस्लिम एंगल लिए हुए हर मुद्दे की अनदेखी करनी चाहिए और फोकस आर्थिकी पर, अराजकता पर, प्रादेशिक मुद्दों पर, लोगों की बदहाली पर बनाना चाहिए। मगर दिक्कत यह है कि राहुल गांधी हो या कपिल सिब्बल सब सोच रहे हंै कि महाराष्ट्र, हरियाणा (आगे झारखंड, दिल्ली) में लोगों के कम वोट मिले तो वजह मोदी-शाह की सांप्रदायिक राजनीति याकि हिंदू राजनीति के खिलाफ माहौल बनना है। ऐसा कतई नहीं है। जान लिया जाए कि मोदी-शाह को प्रदेशों में जीत-हार की अब ज्यादा चिंता नहीं है। इनका टारगेट सिर्फ और सिर्फ संसद में हिंदू हितकारी फैसले कराते हुए, उनका हल्ला बनवाते हुए 2024 तक 20-24 करोड़ हिंदू वोट पक्के बनवाना है ताकि ऐन वक्त सर्जिकल स्ट्राइक जैसे नुस्खे में माहौल बने कि मोदी-शाह का विकल्प नहीं है! और राहुल गांधी तो कतई नहीं!

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