कई-कई राज्यमंत्री क्या करेंगे? - Naya India modi cabinet state minister
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कई-कई राज्यमंत्री क्या करेंगे?

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modi cabinet state minister :  जिस समय केंद्र और राज्यों की सरकारों में मंत्रियों की अधिकतम सीमा तय नहीं थी तब एक समय ऐसा आया था कि बिहार में लालू प्रसाद ने अपनी पत्नी राबड़ी देवी की सरकार में 90 मंत्री बनवा दिए थे। इस पर सफाई देते हुए उन्होंने कहा था कि कहीं भूतपूर्व न हो जाएं इसलिए अभूतपूर्व मंत्रिमंडल बनवा दिया है। क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी ऐसी चिंता थी, जो उन्होंने ऐसा अभूतपूर्व मंत्रिमंडल बनाया है? सात साल के शासन में यह उनका सबसे बड़ा मंत्रिमंडल है। केंद्र सरकार में प्रधानमंत्री सहित अधिकतम 81 मंत्री हो सकते हैं और इस बार सरकार में 77 मंत्री हैं। सोचें, 2019 में मोदी ने 57 सदस्यों का मंत्रिमंडल बनाया था, जो बाद में घट कर 53 सदस्यों का हो गया था। पिछले कई महीनों से वे इतने मंत्रियों से ही काम चला रहे थे और अब अचानक 77 मंत्री बना दिए हैं। हैरानी की बात यह है कि इसके बावजूद आधा दर्जन मंत्रियों के पास अतिरिक्त प्रभार हैं।

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इस बात का ठोस कारण नहीं है कि क्यों एक-एक कैबिनेट मंत्री के नीचे चार-चार राज्यमंत्री रखे गए हैं और कई कैबिनेट मंत्रियों के पास अतिरिक्त प्रभार रखा गया है! क्या जिनको राज्यमंत्री बनाया गया है वे इस लायक नहीं हैं कि स्वतंत्र प्रभार संभाल सकें? ध्यान रहे लालू प्रसाद ने जब राबड़ी देवी के अभूतपूर्व मंत्रिमंडल बनवाया था तब कई नए विभाग बनाए गए थे, कई विभागों को बांट कर अलग अलग विभाग बना दिए गए थे और कई विभागों में जबरदस्ती राज्यमंत्री ठूंसे गए थे, जिनका कोई मतलब नहीं था। प्रधानमंत्री मोदी के मंत्रिमंडल को देखते हुए कुछ कुछ ऐसा ही आभास हो रहा है।

Modi cabinet

जैसे विदेश मंत्रालय में एस जयशंकर के साथ चार राज्यमंत्री नियुक्त किए गए हैं। पहले वे अकेले वी मुरलीधरन के साथ काम कर रहे थे। लेकिन मुरलीधरन के साथ साथ अब मीनाक्षी लेखी और राजकुमार रंजन सिंह को विदेश राज्यमंत्री बना दिया गया है। ऐसे ही कृषि से अलग पशुपालन मंत्रालय है। यह अपने आप में बहुत छोटा मंत्रालय है। लेकिन इसके लिए पुरुषोत्तम रूपाला को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है और उनके नीचे दो राज्यमंत्री बनाए गए हैं। संजीव बालियान और एल मुरुगन डेयरी और फिशरीज मंत्रालय में राज्यमंत्री हैं। इसी तरह पर्यटन मंत्रालय में चार राज्यमंत्री बनाए गए हैं। कैबिनेट मंत्री जी किशन रेड्डी के साथ श्रीपाद यशोनाईक, अर्जुन राम मेघवाल और अजय भट्ट के साथ साथ मीनाक्षी लेखी को राज्यमंत्री बनाया गया है।

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PM Modi Cabinet Expansion 2021

modi cabinet state minister : ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग में कैबिनेट मंत्री गिरिराज सिंह के साथ तीन राज्यमंत्री बनाए गए हैं। फग्गन सिंह कुलस्ते, साध्वी निरंजन ज्योति और कपिल मोरेश्वर पाटिल उनके साथ राज्यमंत्री के तौर पर काम करेंगे। इसके अलावा भी इन राज्यमंत्रियों के पास अलग-अलग मंत्रालयों की जिम्मेदारी होगी। कई विभाग ऐसे हैं, जो अपेक्षाकृत छोटे हैं लेकिन उनमें भी कई कई राज्यमंत्री नियुक्त किए गए हैं। जैसे खाद्य आपूर्ति और उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय में भी कैबिनेट मंत्री के अलावा दो राज्यमंत्री हैं, युवा और खेल-कूद मंत्रालय में भी कैबिनेट के अलावा दो राज्यमंत्री हैं, जल परिवहन मंत्रालय में भी कैबिनेट के अलावा दो राज्यमंत्री हैं। एक-एक राज्यमंत्रियों को कई कई मंत्रालयों का प्रभार दिया गया है।

status of railway minister

स्वतंत्र  प्रभार के दो राज्यमंत्री हैं लेकिन उनको भी स्वतंत्र प्रभार के अलावा दूसरे मंत्रालयों का जिम्मा भी दिया गया है। जैसे जितेंद्र सिंह प्रधानमंत्री कार्यालय के राज्यमंत्री हैं और यह अपने आप में बड़ा काम होता है लेकिन इसके अलावा उनको दो और मंत्रालयों का स्वतंत्र प्रभार दिया गया है। इसी तरह राव इंद्रजीत सिंह योजना और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय के स्वतंत्र प्रभार के राज्यमंत्री हैं लेकिन इसके साथ साथ उनको उद्योग और वाणिज्य मंत्रालय में पीयूष गोयल के साथ राज्यमंत्री भी बनाया गया है। इस तरह एक एक मंत्रालय में कई कई मंत्री हैं उन सबके साथ तालमेल कैसे बनेगा और एक मंत्री कई-कई विभागों के कामकाज के बीच कैसे तालमेल बनेगा और कैसे बेहतर ढंग से काम होगा, यह सोचना मुश्किल है। मंत्रालयों के बंटवारे में भी कोई तार्किकता नहीं दिखती है।

By हरिशंकर व्यास

भारत की हिंदी पत्रकारिता में मौलिक चिंतन, बेबाक-बेधड़क लेखन का इकलौता सशक्त नाम। मौलिक चिंतक-बेबाक लेखक-बहुप्रयोगी पत्रकार और संपादक। सन् 1977 से अब तक के पत्रकारीय सफर के सर्वाधिक अनुभवी और लगातार लिखने वाले संपादक।  ‘जनसत्ता’ में लेखन के साथ राजनीति की अंतरकथा, खुलासे वाले ‘गपशप’ कॉलम को 1983 में लिखना शुरू किया तो ‘जनसत्ता’, ‘पंजाब केसरी’, ‘द पॉयनियर’ आदि से ‘नया इंडिया’ में लगातार कोई चालीस साल से चला आ रहा कॉलम लेखन। नई सदी के पहले दशक में ईटीवी चैनल पर ‘सेंट्रल हॉल’ प्रोग्राम शुरू किया तो सप्ताह में पांच दिन के सिलसिले में कोई नौ साल चला! प्रोग्राम की लोकप्रियता-तटस्थ प्रतिष्ठा थी जो 2014 में चुनाव प्रचार के प्रारंभ में नरेंद्र मोदी का सर्वप्रथम इंटरव्यू सेंट्रल हॉल प्रोग्राम में था। आजाद भारत के 14 में से 11 प्रधानमंत्रियों की सरकारों को बारीकी-बेबाकी से कवर करते हुए हर सरकार के सच्चाई से खुलासे में हरिशंकर व्यास ने नियंताओं-सत्तावानों के इंटरव्यू, विश्लेषण और विचार लेखन के अलावा राष्ट्र, समाज, धर्म, आर्थिकी, यात्रा संस्मरण, कला, फिल्म, संगीत आदि पर जो लिखा है उनके संकलन में कई पुस्तकें जल्द प्रकाश्य। संवाद परिक्रमा फीचर एजेंसी, ‘जनसत्ता’, ‘कंप्यूटर संचार सूचना’, ‘राजनीति संवाद परिक्रमा’, ‘नया इंडिया’ समाचार पत्र-पत्रिकाओं में नींव से निर्माण में अहम भूमिका व लेखन-संपादन का चालीस साला कर्मयोग। इलेक्ट्रोनिक मीडिया में नब्बे के दशक की एटीएन, दूरदर्शन चैनलों पर ‘कारोबारनामा’, ढेरों डॉक्यूमेंटरी के बाद इंटरनेट पर हिंदी को स्थापित करने के लिए नब्बे के दशक में भारतीय भाषाओं के बहुभाषी ‘नेटजॉल.काम’ पोर्टल की परिकल्पना और लांच।

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