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सच से नहीं उठेगा परदा

देश के असली माली हाल पर से परदा हटाने को सरकार तैयार नहीं है। एनएसओ के उपभोक्ता खर्च सर्वे को जारी कराने की दूसरी कोशिश भी नाकाम हो गई है। इस बात की पुष्टि राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग (एनएससी) के अध्यक्ष बिमल कुमार रॉय ने पिछले दिनों की। करीब एक महीने पहले एनएससी ने कहा था कि आधिकारिक सर्वे रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी, लेकिन अब स्वायत्त संस्था ने रिपोर्ट न जारी करने का फैसला किया है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक रॉय ने कहा- ‘मैं कोशिश की। 15 जनवरी की एनएससी बैठक में सर्वे को जारी करने के लिए मैंने एक प्रस्ताव दिया, लेकिन मुझे कोई समर्थन नहीं मिला। मैंने अध्यक्ष के रूप में प्रस्ताव रखा था, लेकिन यह नहीं हुआ। मैं अब और कुछ नहीं कह सकता।’ ये घटना बताती है कि किस तरह सरकार के भीतर वैसी रिपोर्टों को दबाए रखने की कोशिशें की जाती हैं, जिससे सरकार के बारे में नाकारात्मक संकेत मिलते हैं। ऐसे में भारतीय आर्थिक आंकड़ों का संदिग्ध हो जाना लाजिमी ही है। ताजा मामले से एक और विवादास्पद पहलू सामने आया है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक मुख्य सांख्यिकीविद् प्रवीण श्रीवास्तव ने एनएससी की बैठक में सर्वेक्षण के आंकड़े जारी करने पर आपत्ति जताई। तब एनएससी के एक सदस्य ने आपत्तियां उठाईं और आंकड़ों को सार्वजनिक करने का दबाव बनाया। मगर वो सभी नाकाम हो गए। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक सदस्यों के बीच प्रसारित बैठक की कार्यवाही में व्यक्ति के विचारों को शामिल नहीं किया गया। जाहिर है, इसी कारण  एनएससी के अंदर होने वाली बैठकों को लेकर सवाल उठते हैं। अनुमान लगाया जा सकता है कि ये नजरिया जारी रहा तो आंकड़ों की साख बहाल करने की सरकार की कोशिश कभी सफल नहीं होगी। सरकार ने पिछले दिनों पूर्व मुख्य सांख्यिकीविद् प्रणब सेन की अगुवाई में एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया, जिसने उपभोक्ता खर्च पर नए सर्वेक्षण का काम किया। इसका उपयोग भारत में गरीबी और असमानता पर आधिकारिक अनुमान प्राप्त करने के लिए किया जाता है। मगर इसकी क्या गारंटी है कि उससे जो आंकड़े सामने आएंगे, उन्हें जारी किया जाएगा? पिछले साल नवंबर में वित्त वर्ष 2012-18 के बीच उपभोक्ता खर्च में 3.7 फीसदी कमी आने की खबर बिजनेस स्टैंडर्ड नामक अंग्रेजी अखबार ने ब्रेक की थी। मगर उसके बाद केंद्र सरकार ने एनएसओ द्वारा किए गए वित्त वर्ष 2018 के आधिकारिक सर्वे को नहीं जारी करने का फैसला किया। अब ऐसा करने की दूसरी कोशिश भी विफल हो गई है।

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