अब कितना पड़ेगा फर्क?

ऐसे न्यायिक फैसले पहले भी आए हैं। लेकिन उनसे ना तो हिरासत में यातना रुकी और ना पुलिस के हाथों मौतें। इसलिए ये उम्मीद रखना कठिन है कि मद्रास हाई कोर्ट के ताजा फैसले से बहुत फर्क पड़ेगा। लेकिन ये अच्छी बात है कि तमिलाडु में पुलिस हिरासत में हुई मौत एक राष्ट्रीय मुद्दा बनी। उस पर चर्चा हुई। वरना, पिछले कुछ वर्षों से देश में जो माहौल है, उसके बीच ऐसी बातें आम मान ली गई हैं। मीडिया और मध्य वर्ग का रुख मोटे तौर पर पुलिस के पक्ष में रहने लगा है। इसीलिए तमिलनाडु की घटना अहमियत रखती है। मद्रास उच्च न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि आरोपी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करने के लिए पर्याप्त सबूत हैं। आरोप है कि उन अधिकारियों ने हिरासत में पिता और पुत्र को यातनाएं देकर मार डाला। यह फैसला मृतकों को आई चोट और न्यायिक मजिस्ट्रेट की जांच रिपोर्ट के आधार पर दिया गया। तमिलनाडु पुलिस ने 19 जून को 60 वर्षीय पी जयराज और उनके 31 वर्षीय पुत्र जे फेनिक्स को हिरासत में लिया था।

आरोप था कि कोविड-19 लॉकडाउन नियमों के तहत तय समय सीमा से ज्यादा देर तक उन्होंने अपनी दुकान को खुला रखा। चार दिन बाद दोनों की मौत हो गई। गौरतलब है कि हिरासत में मौतें अलग-थलग घटनाएं नहीं हैं। भारत में पुलिस किसी जवाबदेही के बगैर आम तौर पर यातना देती है या दुर्व्यवहार करती है। इस क्रम में गिरफ्तारी प्रक्रियाओं को धता बता दिया जाता है। ऐसा ही इस मामले में भी हुआ। इसके पहले कई विस्तृत निर्णयों में अदालतों ने कहा है कि पुलिस गिरफ्तार लोगों की चिकित्सकीय जांच कराए। चिकित्सकों को चाहिए कि पहले से मौजूद ज़ख्मों को वो सूचीबद्ध करें, क्योंकि नए जख्म हिरासत में पुलिस उत्पीड़न के सबूत होते हैं। इसके अलावा प्रत्येक गिरफ्तार व्यक्ति को 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाना चाहिए। मजिस्ट्रेट तब गिरफ्तारी से संबंधित दस्तावेजों की जांच करते हैं और संदिग्धों से पूछताछ कर उनकी कुशलक्षेम सुनिश्चित करते हैं। जयराज और फेनिक्स दोनों को 20 जून को चिकित्सकीय जांच के लिए ले जाया गया और फिर मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया था। लेकिन गवाहों ने बताया कि पुलिस अधिकारियों ने रात में उनकी पिटाई की। यौन उत्पीड़न का आरोप भी पुलिस पर लगा। जाहिर है, ये हृदय-विदारक जानकारियां हैं। लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा अपने देश में होना एक सामान्य सी बात है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Shares