mamta banerjee loksabha elections ममता से है खूब झाग
हरिशंकर व्यास कॉलम | गपशप | बेबाक विचार| नया इंडिया| mamta banerjee loksabha elections ममता से है खूब झाग

ममता से है खूब झाग!

Mamta Banerjee

Mamta Banerjee Loksabha elections तय मानें भाजपा और नरेंद्र मोदी की सरकार के खिलाफ व सन् 2024 के चुनावों में ममता बनर्जी का सियासी बवाल जबरदस्त होगा। गुजरे सप्ताह दिल्ली आ कर ममता बनर्जी ने जो हल्ला बनाया, विरोधी राजनीति का जो झाग बनाया वह मामूली नहीं है। हां, झाग शब्द का अर्थ यह भी है कि फटाफट सब खत्म। मगर ध्यान रखें भारत की झाग राजनीति से ही जन भावनाएं बनती-बिगड़ती हैं। सन् 2014 से पहले मनमोहन सरकार के खिलाफ अनवरत बनते झागों से ही तो नरेंद्र मोदी का ग्राफ बना था। याद करें कि मनमोहन सरकार के वक्त में लोगों के जनजीवन में क्या ऐसे बुरे दिन थे, जिससे नरेंद्र मोदी के अच्छे दिनों के झाग, वादे के पीछे लोग भागे? रामदेव, अन्ना हजारे का आंदोलन हो या लोकपाल-भ्रष्टाचार या मंहगाई के तब के झाग में कितना दम था? कुछ नहीं। यह बात अब पिछले सात सालों के अनुभव से प्रमाणित है।

Read also कांग्रेस भी घर ठीक कर रही है

तभी झाग, हल्ला और हवा में यदि ममता बनर्जी लगातार जनसंघर्ष वाले अपने तेवर प्रदर्शित करती रहीं तो विपक्ष जहां अखिल भारतीय स्तर का टकराव बना लेगा वही अपने आप विरोधी पार्टियों में वह साझा बनेगा, जिसमें आपस में वोट न काटने की समझ (कम से कम लोकसभा चुनाव में) बन सकती है। ममता बनर्जी के कई फायदे हैं। उनके प्रति उत्तर भारत में भी कौतुक बना है। यदि वे यूपी के चुनाव में अखिलेश यादव के मंच पर भाषण करेंगी तो लोग न केवल सुनने आएंगे, बल्कि ब्राह्मण मुख्यमंत्री के नाते यूपी के ब्राह्मणों पर असर डालेंगी तो मुस्लिम वोट भी गोलबंद होंगे।

अभिषेक बनर्जी कहां राष्ट्रीय

Read also घटनाओं के आगे लाचार मोदी

जाहिर है ममता बनर्जी का ब्रांड नरेंद्र मोदी को हराने की पहचान और जनसंघर्ष और लड़ाकू नेता वाला बना है। इसकी काट में भाजपा के पास कोई नेता नहीं है। ममता बनर्जी ने यदि प्रधानमंत्री बनने की भूख नहीं दिखाई, अपने इगो को दबा कर सभी विरोधी नेताओं का भरोसा बनाए रखा और हल्ला सिर्फ मोदी हटाओ, देश बचाओ का बनवाया तो तय मानें सन् 2024 के लोकसभा चुनाव में ममता बनर्जी वह धुरी होंगी, जिससे सभी विरोधी दल और नेता अपने आप जुड़े होंगे।

Read also घबराहट में भाजपा के प्रदेश नेता

ममता बनर्जी को फायदा यह है कि जनता के मूड अनुसार ढलने की सलाह देने के लिए उनके साथ प्रशांत किशोर हैं। यदि नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार ने प्रशांत किशोर को तोड़ा, फोड़ा, फुसलाया नहीं और ममता बनर्जी को पटा कर (या डरा कर) निष्क्रिय नहीं बनाया तो इन दोनों से 2024 के चुनाव की वह स्क्रिप्ट बनेगी, जिससे पार पाने का नरेंद्र मोदी के पास तरीका एक ही होगा। और वह वहीं होगा जो 2019 में था!

Mamta banerjee Loksabha elections

By हरिशंकर व्यास

भारत की हिंदी पत्रकारिता में मौलिक चिंतन, बेबाक-बेधड़क लेखन का इकलौता सशक्त नाम। मौलिक चिंतक-बेबाक लेखक-बहुप्रयोगी पत्रकार और संपादक। सन् 1977 से अब तक के पत्रकारीय सफर के सर्वाधिक अनुभवी और लगातार लिखने वाले संपादक।  ‘जनसत्ता’ में लेखन के साथ राजनीति की अंतरकथा, खुलासे वाले ‘गपशप’ कॉलम को 1983 में लिखना शुरू किया तो ‘जनसत्ता’, ‘पंजाब केसरी’, ‘द पॉयनियर’ आदि से ‘नया इंडिया’ में लगातार कोई चालीस साल से चला आ रहा कॉलम लेखन। नई सदी के पहले दशक में ईटीवी चैनल पर ‘सेंट्रल हॉल’ प्रोग्राम शुरू किया तो सप्ताह में पांच दिन के सिलसिले में कोई नौ साल चला! प्रोग्राम की लोकप्रियता-तटस्थ प्रतिष्ठा थी जो 2014 में चुनाव प्रचार के प्रारंभ में नरेंद्र मोदी का सर्वप्रथम इंटरव्यू सेंट्रल हॉल प्रोग्राम में था। आजाद भारत के 14 में से 11 प्रधानमंत्रियों की सरकारों को बारीकी-बेबाकी से कवर करते हुए हर सरकार के सच्चाई से खुलासे में हरिशंकर व्यास ने नियंताओं-सत्तावानों के इंटरव्यू, विश्लेषण और विचार लेखन के अलावा राष्ट्र, समाज, धर्म, आर्थिकी, यात्रा संस्मरण, कला, फिल्म, संगीत आदि पर जो लिखा है उनके संकलन में कई पुस्तकें जल्द प्रकाश्य। संवाद परिक्रमा फीचर एजेंसी, ‘जनसत्ता’, ‘कंप्यूटर संचार सूचना’, ‘राजनीति संवाद परिक्रमा’, ‘नया इंडिया’ समाचार पत्र-पत्रिकाओं में नींव से निर्माण में अहम भूमिका व लेखन-संपादन का चालीस साला कर्मयोग। इलेक्ट्रोनिक मीडिया में नब्बे के दशक की एटीएन, दूरदर्शन चैनलों पर ‘कारोबारनामा’, ढेरों डॉक्यूमेंटरी के बाद इंटरनेट पर हिंदी को स्थापित करने के लिए नब्बे के दशक में भारतीय भाषाओं के बहुभाषी ‘नेटजॉल.काम’ पोर्टल की परिकल्पना और लांच।

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

ट्रेंडिंग खबरें arrow