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नहीं लाएंगे यह कहिए

राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर को लेकर केंद्र सरकार का रुख लगातार अस्पष्ट बना हुआ है। ये क्रोनोलॉजी खुद गृह मंत्री अमित शाह ने समझाई थी कि सीएए के बाद एनआरसी आएगा। मगर जब सीएए विरोधी आंदोलन तेज हुआ तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कह दिया कि एनआरसी के बारे में अभी सरकारी स्तर पर कोई चर्चा नहीं हुई है। यही बात सरकार ने फिर दोहराई है। लोकसभा में उसकी तरफ से कहा गया कि राष्ट्रीय स्तर पर एनआरसी लाने के बारे में अभी तक कोई निर्णय नहीं हुआ है। सदस्यों ने सवाल किया था कि क्या सरकार की पूरे देश में एनआरसी लाने की कोई योजना है? इस पर गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि अभी तक एनआरसी को राष्ट्रीय स्तर पर तैयार करने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है। बीते 22 दिसंबर को नई दिल्ली के रामलीला मैदान में एक रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा था कि पिछले पांच सालों की उनकी सरकार में एनआरसी पर कोई चर्चा नहीं हुई है।

उन्होंने कांग्रेस और अन्य विपक्षी पार्टियों पर लोगों में भ्रम पैदा करने का आरोप लगाया था। प्रधानमंत्री ने कहा था कि एनआरसी सिर्फ सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर असम में किया गया है। मगर एनआरसी के बारे में बनी आम धारणा के लिए विपक्ष के कथित दुष्प्रचार को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। इसलिए कि गृह मंत्री अमित शाह ने चुनावी रैलियों से लेकर संसद तक में कई बार कहा था कि पूरे देश में एनआरसी लागू किया जाएगा। दरअसल, ये बात पिछले साल संसद के संयुक्त सत्र में दिए गए राष्ट्रपति के अभिभाषण में भी कही गई थी।

2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा में अपने घोषणापत्र में वादा किया कि अलग-अलग चरणों में देश भर में एनआरसी लागू किया जाएगा। मगर हाल में सरकार इस पर कदम वापस खींचती दिखी है। इस वर्ष 31 जनवरी को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने बजट सत्र की शुरुआत पर संसद में दिए अपने भाषण में एनआरसी का उल्लेख नहीं किया। अब सवाल यह है कि सरकार ने सचमुच एनआरसी लागू करने का इरादा छोड़ दिया है कि फिलहाल सीएए विरोधी आंदोलन की धार को कुंद करने के लिए उसने इसे कुछ समय के लिए टाल दिया है? इस मामले में जो भी सच्चाई हो, उसे खुल कर कहना चाहिए। अगर योजना टाल दी गई है तो इसे बेलाग कहा जाना चाहिए।

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