भाजपा का ‘राम- कार्ड’

ये तो पहले से जाहिर है कि भारतीय जनता पार्टी ने दिल्ली विधान सभा चुनाव में अपना सारा दांव झोंक रखा है। ऐसा लगता है कि गृह मंत्री अमित शाह ने अपनी छवि को यहां दांव पर लगा दिया है। ऐसे में कोई हैरत नहीं कि चुनाव प्रचार का अंत आते- आते केंद्र सरकार ने राम मंदिर कार्ड भी खेल दिया। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर आगे बढ़ते हुए अयोध्या में राम मंदिर  बनाने के लिए ट्रस्ट का गठन कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद संसद में अपनी सरकार के इस फैसले का एलान किया। उन्होंने बताया कि राम की जन्मभूमि में भव्य और दिव्य मंदिर बनेगा। इसके लिए उन्होंने अपनी सरकार का विस्तृत प्लान सामने रखा। मोदी सरकार के ट्रस्ट गठन के फैसले के बाद तुरंत उत्तर प्रदेश सरकार के प्रवक्ता का बयान आया। बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मुताबिक उप्र सरकार सुन्नी वक्फ बोर्ड को पांच एकड़ जमीन देने का प्रस्ताव पास कर चुकी है। अगर सरकार चुनाव आचार संहिता का ख्याल करती तो यह एलान चार दिन टाल सकती थी। लेकिन उसने संसद के पटल का सहारा लेकर मंदिर से जुड़ा संदेश मतदाताओं को भेज दिया है। दिल्ली विधान सभा चुनाव में भाजपा का मुद्दा हिंदुत्व है। प्रधानमंत्री की तस्वीरों के साथ लगे होर्डिंग्स पर धारा 370 हटाने, ट्रिपल तलाक कानून पारित कराने और नागरिकता संशोधन कानून का जिक्र था। राम मंदिर उससे गायब था। अब सरकार ने उसका श्रेय भी ले लिया है। इससे भी भाजपा जीत पाएगी या नहीं- ये दीगर बात है। चुनाव प्रचारके साथ-साथ भाजपा का पूरा फोकस चुनावी माइक्रो मैनेजमेंट पर रहा है। भाजपा नेताओं का मानना है कि गृह मंत्री अमित शाह और उसके बाद उप्र के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की रैलियों ने जहां दिल्ली के चुनावी माहौल को बदलने का काम किया, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैलियों के बाद माहौल भाजपा के पक्ष में बनता दिखने लगा। इस दावे के पीछे पार्टी का एक इंटरनल सर्वे है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली के ठीक बाद दिल्ली के सभी विधानसभा क्षेत्रों में करवाया गया था। इस सर्वे के नतीजों के आधार पर कहा गया है कि शाहीनबाग, सर्जिकल स्ट्राइक, बाटला हाउस जैसे मुद्दों पर मोदी ने जिस तरह खुलकर अपनी बात सामने रखी, उसका लोगों पर काफी असर पड़ता दिखा। संभवतः इसी असर को मजबूत करने के लिए राम मंदिर संबंधी एलान भी किया गया। अब यह स्वच्छ चुनाव की भावना के अनुरूप है या नहीं- इसकी चिंता किसे है?

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