बात तो शर्म की ही है

जस्टिस रंजन गोगोई को लेकर जैसी प्रतिक्रिया हुई, उससे ये जाहिर है कि उनको लेकर समाज के एक तबके में कितनी नाराजगी है। मगर बात महज इतनी नहीं है। मुद्दा कहीं बड़ा है। सवाल न्यायपालिका की छवि का है। रिटायर होने के सिर्फ चार महीने बाद अगर सर्वोच्च न्यायपालिका के जज सरकारी या राजनीतिक पद स्वीकार करने लगें तो कठघरे में उनके द्वारा पहले दिए गए सारे फैसले खड़े हो जाते हैं। फिलहाल ऐसा ही हुआ है। ‘‘शर्म करो, शर्म करो” के नारों के बीच भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने भारतीय संसद के ऊपरी सदन राज्य सभा की सदस्यता की शपथ ली। नारे लगाने वाले विपक्ष के सांसद थे। विपक्ष ने एक सुर से सरकार के जस्टिस गोगोई को मनोनीत करने और जस्टिस गोगोई द्वारा इस प्रस्ताव को स्वीकार करने की आलोचना की है। नारे लगाने के बाद विपक्षी सांसद सदन से बाहर चले गए। विपक्ष ने जस्टिस गोगोई को मनोनीत किए जाने को संविधान के मूल ढांचे पर एक गंभीर, अभूतपूर्व और माफ ना करने लायक हमला माना है। कहा है कि हमारा संविधान न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच शक्तियों के विभाजन पर आधारित है।

न्यायपालिका आस्था और विश्वास के परसेप्शन पर चलती है। आज इन सबको धक्का लगा है। वैसे यह पहली बार नहीं है जब किसी पूर्व मुख्य न्यायाधीश को रिटायर होने के बाद सरकार ने कोई पद दिया है। लेकिन इस मामले में कई बातें ऐसी जरूर हैं, जो पहले कभी नहीं हुई। इससे पहले सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीशों को आयोगों या पंचाटों का अध्यक्ष बनाया जाता था। कुछ वर्ष पहले पूर्व मुख्य न्यायाधीश पी सदाशिवम को एनडीए सरकार ने ही केरल का राज्यपाल बनाया था। लेकिन राज्य सभा के लिए मनोनीत किए जाने वाले वे पहले पूर्व प्रधान न्यायाधीश हैं। सेवानिवृत्ति और बतौर सांसद मनोनीत किए जाने के बीच महज चार महीनों का अंतराल भी गौरतलब है। उनके मनोनीत होने पर सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं कि उनकी अध्यक्षता में सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे कई फैसले दिए, जिन्हें सरकार के या सत्तारूढ़ भाजपा के हित में देखा जा सकता है। उन पर अनैतिकता का भी आरोप लगा था, जब उन्हीं के खिलाफ यौन शोषण के एक मामले पर सुनवाई करने वाली पीठ के अध्यक्ष भी वो खुद ही बन गए। इसीलिए बहुत से लोग पूर्व न्यायाधीश जस्टिस मदन लोकुर के इस सवाल में अपनी भावना देखी कि ‘क्या आखिरी दुर्ग गिर गया है?’

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Shares