छोटे कर्जदारों पर बड़ा बोझ

गहराते आर्थिक का असर छोटे कर्जदारों पर पड़ा है। हालत यह है कि वे कर्ज नहीं चुका पा रहे हैं। नतीजतन, ऋण देने वाले बैंकों की चिंता बढ़ रही है। इस हफ्ते ये चिंता भारतीय रिजर्व बैंक ने सार्वजनिक तौर पर जताई। बैंक के डिप्टी गवर्नर एमके जैन ने छोटे कारोबारियों को कर्ज उपलब्ध कराने के लिए शुरू की गई मुद्रा ऋण योजना में कर्ज वसूली की बढ़ती समस्या पर चिंता जताई। उन्होंने बैंकों से कहा कि वह इस योजना के तहत दिए जाने वाले कर्ज पर करीबी नजर रखी जाए। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2015 में मुद्रा लोन योजना की शुरुआत की थी। यह योजना सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों को जरूरी वित्तपोषण सुविधा उपलब्ध कराने के लिए शुरू की गई है। जैन ने भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) के सूक्ष्म वित्त (माइक्रोफाइनेंस) पर आयाजित कार्यक्रम में कहा कि मुद्रा योजना पर हमारी नजर में है। इस योजना से जहां एक तरफ देश के कई लाभार्थियों को गरीबी रेखा से ऊपर उठाने में बड़ी मदद की है, वहीं इसमें कई कर्जदारों के बीच नॉन परफॉर्मिंग एसेट के बढ़ते स्तर को लेकर कुछ चिंता भी है। उन्होंने बैंकों को सुझाव दिया कि वो इस तरह के कर्ज देते समय दस्तावेजों की जांच-परख के स्तर पर कर्ज किस्त के भुगतान की क्षमता पर भी गौर करें और इस तरह के कर्ज का उनकी पूरी अवधि तक करीब से निगरानी करें।

इसके पहले सामने आया था कि मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री मुद्रा योजना का एनपीए (गैर निष्पादित परिसंपत्तियां यानी बैंकों का फंसा हुआ क़र्ज़) बढ़कर एक साल के भीतर में दोगुना से भी ज्यादा हो गया है। 31 मार्च 2018 तक में मुद्रा योजना के तहत सार्वजनिक बैंकों का एनपीए 7,277.31 करोड़ रुपये था। हालांकि माइक्रो यूनिट्स डेवलपमेंट एंड रिफाइनेंस एजेंसी लिमिटेड (मुद्रा) से प्राप्त आंकड़े दर्शाते हैं कि 31 मार्च 2019 तक 16,481.45 करोड़ रुपये का मुद्रा लोन एनपीए हो गया। इस हिसाब से 12 महीनों में मुद्रा योजना के तहत सार्वजनिक बैंकों के एनपीए में 9,204.14 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई है। एक अन्य खबर के मुताबिक 31 मार्च 2018 तक एनपीए वाले खातों की संख्या 17.99 लाख थी। इस तरह एक साल में एनपीए खातों में 12.58 लाख की बढ़ोतरी हुई है। हालांकि मुद्रा योजना के तहत दिए गए कुल लोन की तुलना में एनपीए राशि बहुत ज्यादा नहीं है, लेकिन इसमें धीरे-धीरे बढ़ोतरी हो रही है। क्या सरकार को इसकी चिंता है?

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