अब चिट्ठी-पत्री भी बंद

भारत और पाकिस्तान के बीच एक नया झगड़ा शुरू हो गया है। पाकिस्तान के डाक विभाग ने भारत चिट्ठियां भेजना और भारत से जाने वाली चिट्ठियों को लेना बंद कर दिया है। खबरों के अनुसार पाकिस्तान ने भारत से आखिरी डाक 27 अगस्त को स्वीकार की थी। भारत सरकार के मुताबिक पाकिस्तान ने ऐसा कदम भारत को बिना किसी सूचना या जानकारी दिए उठा लिया। भारत सरकार के मुताबिक पाकिस्तान का यह कदम अंतरराष्ट्रीय डाक यूनियन के मानकों का उल्लंघन है। अब भारतीय डाक विभाग इस मामले में पाकिस्तान के खिलाफ कदम उठाने पर विचार करेगा। भारत में कुल 28 विदेशी पोस्ट ऑफिस हैं, जिनमें से सिर्फ दो में पाकिस्तान जानी वाली और पाकिस्तान से आने वाली चिट्ठियां ली जा सकती हैं। ये पोस्ट ऑफिस दिल्ली और मुंबई में हैं। दिल्ली स्थित कार्यालय छह राज्यों से डाक लेता है। मुंबई कार्यालय बाकी राज्यों की डाक लेता है। जानकारों के मुताबिक पाकिस्तान भेजी जाने वाली चिट्ठियों में ज्यादातर शैक्षिक और साहित्यिक सामग्री होती है। इस तरह की डाक की आवाजाही दोनों देशों के बीच व्यापार की ही तरह बहुत घुमावदार मार्ग से होती थी।

भारत से डाक सऊदी अरब की राजधानी रियाद जाती थी और फिर वहां से पाकिस्तान। रियाद से भी पहले चिट्ठियों का ये लेन-देन दुबई के जरिए होता था। भारतीय डाक विभाग पाकिस्तान भेजे जानी वाली हर 250 ग्राम वजन की डाक के लिए 810 रुपये शुल्क लेता है। कई मामलों में इसका इस्तेमाल दोनों देशों के बीच वीजा के लिए प्रायोजक चिट्ठियां भेजने के लिए भी होता रहा है। लेकिन ये सब कागजात अब ई-मेल के जरिए भी भेजे जाते हैं। मुद्दा यह है कि पाकिस्तान ने यह कदम उठाया क्यों। क्या ये कदम जम्मू और कश्मीर में लाए गए संवैधानिक बदलावों के बाद पाकिस्तान की प्रतिक्रिया का हिस्सा है? अभी तक पाकिस्तान के डाक विभाग या और भी किसी सरकारी संस्था ने इस कदम की पुष्टि नहीं की है। लेकिन भारत में इसे हाल में पाकिस्तान के उठाए कुछ कड़े कदमों के क्रम में देखा जा रहा है। फरवरी में जब भारतीय वायु सेना की बालाकोट पर कार्रवाई के बाद पाकिस्तान ने अपने हवाई क्षेत्र को बंद कर दिया था। उसे महीनों बंद रखने के बाद खोला। जाहिर है, अगर यह कूटनीतिक कदम का हिस्सा है, तो इसे कतई उचित नहीं कहा जा सकता। इससे जनता के स्तर पर संबंध बनाए रखने में नई बाधा आएगी।

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