ओवैसी की साफगोई के मायने

आमतौर पर हमारे देश के नेताओं की एक खास आदत यह है कि वे कहते कुछ हैं व करते कुछ और ही। मगर मेरा मानना है कि असदु्द्दीन ओवैसी इन लोगों के मुकाबले एक अपवाद है। वे अक्सर अपनी मन की बातें खुलकर कहते हैं। जैसे कि जब हाल में महाराष्ट्र में शिवसेना व कांग्रेस ने मिलकर सरकार बनाई तो उन्होंने तंज कसा कि उन्होंने कभी शिवसेना व भाजपा का समर्थन नहीं किया था और अब कांग्रेस व शिवसेना साथ आ गए हैं। देखते हैं कि यह बेमेल विवाह कितने दिन टिकता है। जो काम कभी उमा भारती, साध्वी ऋतंभरा, अशोक बंसल सरीखे नेता अपने भाषणों के जरिए हिंदुओं को प्रभावित करने के लिए करते थे कमोबेश वहीं काम ओवैसी मुसलमानों को प्रभावित करने के लिए करते आए हैं।

ओवेसी के पिता सुल्तान सलाहुद्दीन ओवैसी भी सांसद थे व आंध्र प्रदेश में 1962 के विधानसभा के बाद 1984 से लगातार हैदराबाद के चार मीनार चुनाव क्षेत्र से लोकसभा के लिए जीतते आए थे। उन्होंने 2004 में यह सीट अपने बेटे असदुद्दीन ओवैसी के लिए खाली कर दी व 2008 में उनका निधन हो गया। असदुद्दीन ओवैसी का जन्म 13 मई 1969 में हुआ था। उनके बाबा अब्दुल वाघ ओवैसीने मजसिल-ए-इत्तेहादुल मुसलमीन नामक दल शुरू किया था। जो 1957 के ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन हो गया। असद्दुदीन ओवैसी ने निमाज कॉलेज से बीए किया। वे किक्रेट के जाने-माने तेज गेंदबाज रहे व लंदन से उन्होंने वकालत की पढ़ाई की बैरिस्टर बने। उनके दो भाई अकबरुद्दीन व बुरहानुद्दीन हैं। अकबरुद्दीन तेलंगाना में विधायक हैं व बुरहानुद्दीन इटैमाद के संपादक है। उनकी शादी फरहीन ओवैसी से हुई है व उनके छह बच्चे एक बेटा व छह बेटियां हैं। उन्हें शेरवानी व चूड़ीदार पायजामा पहनने का शौक है व वे धाराप्रवाह उर्दू व अंग्रेजी बोलते हैं। इस्लामी टोपी लगाते हैं व छोटी दाढ़ी रखते हैं।

उनकी पार्टी मुसलमानों की हमदर्द मानी जाती है और वे जेहादी आतंकवाद के खिलाफ हैं। उन्होंने 1994 में आंध प्रदेश विधानसभा से अपना राजनीतिक सफर शुरू किया। उनकी पार्टी ने 1967 चारमीनार इलाके में अपना एकाधिकार बना रखा है। इस क्षेत्र के 70 फीसदी मतदाता मुसलमान हैं। जब 2006 में अमेरिका से किए गए परमाणु करार के विरोध में वामपंथी दलों से तत्कालीन यूपीए सरकार से अपना समर्थन वापस लिया व मुलायम सिंह यादव ने कहा था कि देश के मुसलमान इस समझौते के खिलाफ हैं। तब ओवैसी ने इसे वोट बांटने का सांप्रदायिक कदम करार दिया था। उन्होंने विश्वास प्रस्ताव के दौरान सरकार का साथ दिया। उनका कहना था कि उनका उद्देश्य भाजपा को सत्ता में आने व लाल कृष्ण आडवाणी को प्रधानमंत्री बनने से रोकना था। हम समय आने पर विदेश नीति की आलोचना करेंगे मगर यह सुनिश्चित करेंगे कि बाबरी मस्जिद में अभियुक्त लाल कृष्ण आडवाणी इन महान देश के प्रधानमंत्री न बन पाए और हिंदू-मुस्लिम एकता व धर्मनिर्पेक्षता को कमजोर करें। संसद के 15वें सत्र में उन्हें अपने उत्कृष्ट कार्य के लिए संसद रत्न अवार्ड मिले। उन्होंने 1080 सवाल पूछे जब कि संसद में सवाल पूछने का राष्ट्रीय औसत 292 था। उन्होंने वक्फ संपत्तियों के बारे में जमकर सवाल पूछे जब उन्होंने 2015 में बिहार विधानसभा चुनाव लड़ने का ऐलान किया तो उन पर आरोप लगाया गया कि वे ऐसा करके भाजपा को लाभ पहुंचा रहे हैं। ताकि वे मुस्लिम वोटों को बांट सके। उन्होंने सीमांचल के मुस्लिम बाहुल्य  इलाके में पिछड़ेपन के लिए नीतीश कुमार, कांग्रेस व भाजपा को जिम्मेदार ठहराया। इस इलाके में उनकी पार्टी ने छह उम्मीदवार खड़े किए व एक भी उम्मीदवार नहीं जीता। उन्होंने अपनी संपत्ति 13 करोड़ रुपए घोषित की। जब उनकी आलोचना हुई तो उन्होंने कहा कि हम कोई धर्मनिर्पेक्षता की पालकी ढोने वाले कहार नहीं है जो कि सांप्रदायिकता का गाना अलापने वाले दलों के इशारे पर नाचे व उनके कहे अनुसार अपनी राजनीति करे।

कई बार उनकी तुलना जिन्ना से की जाती है क्योंकि उनकी सोच जिन्ना की ही तरह है। वे खुद को मुसलमानों का एकमात्र सबसे बड़ा नेता मानते हैं। उनका पुराने हैदराबाद व मुंबई में मुस्लिम युवकों के बीच खासा प्रभाव है। वे जिन्ना से अपनी तुलना किया जाना पसंद नहीं करते हैं। वे देश की धर्मनिर्पेक्ष दल अपने मुस्लिम उम्मीदवारों को अपने मुस्लिम वोट दिलवा पाने में नाकाम रहे हैं। जिन क्षेत्र में उम्मीदवार मुस्लिम मतदाता थे वहां भी उनके मुस्लिम उम्मीदवार जीते नहीं। इसलिए मुसलमानों को भी दलित ओबीसी व यादवों की तरह अपनी राजनीतिक ताकत विकसित करनी होगी। जब 2008 में मुंबई में आतंकवादी हमला हुआ तो उन्होंने इसकी जमकर निंदा करते हुए जकीउर रहमान लखवी व हाजिफ सईद को निर्दोष लोगों का हत्यारा करार देते हुए उन्हें देश व मुसलमानों का दुश्मन करार दिया। वे पिछड़े मुसलमानों को आरक्षण दिए जाने के पक्ष में हैं। वे हिंदुत्व विचारधारा के खिलाफ हैं मगर हिंदुओं से प्यार करते हैं। वे हज के लिए मक्का जाने वाले मुसलमानों को हज सब्सिडी दिए जाने के खिलाफ हैं। वे चाहते हैं कि सरकार यह पैसा मुसलमानों की शिक्षा पर खर्च करें। उन्होंने जुलाई 2008 में आईएसआईएस को मुसलमानों के लिए एक समस्या करार देते हुए उन्हें कुत्ता कहा था। उन्होंने अहमदिया में मुसलमानों पर एक पक्ष मानने के कारण सरकार की आलोचना की थी।

उन्होंने गौहत्या पर रोक लगाए जाने के मुद्दे पर भाजपा की आलोचना करते हुए कहा कि वह उत्तर प्रदेश व उत्तर भारत में इस पर रोक लगाने की बात करती है। उत्तर पूर्व व गोवा, करेल में इसे अधार्मिक मानती है। उन्होंने कहा बिना वैध कारण के तीन तलाक देने वाले मुसलमानों का बहिष्कार किया जाना चाहिए। उन्होंने 2018 में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान को भारत की समर्थ राजनीति से प्रेरणा लेने की सलाह दी। पाकिस्तान में तो गैर मुसलमान राष्ट्रपति की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। उन्होंने 2019 में भाजपा के पक्ष में जबरदस्त के लिए मतदान मशीनों में गड़बड़ी किए जाने का आरोप लगाने की जगह कहा कि हिंदुओं के दिमागों के साथ छेड़छाड़ की है। उनका कहना था कि राहुल गांधी के वायनाड से लोकसभा सीट जीतने की वजह वहां की 40 फीसदी मुस्लिम जनसंख्या है।

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