अफवाहों का दौर - Naya India
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अफवाहों का दौर

दिल्ली में दंगों का दौर तो थम चुका है, लेकिन अब उससे भी बड़ी समस्या जो खड़ी हो गई है, वह दंगों की मार से कहीं ज्यादा दहशत पैदा कर रही है। राजधानी में अब अफवाहों का दौर चल निकला है। इससे यह स्पष्ट है कि दंगों के पीछे जिनका का भी हाथ रहा हो, जिनकी भी साजिश रही हो, वे अभी शांत नहीं बैठे हैं और अफवाहें फैला कर लोगों में खौफ पैदा कर रहे हैं। रविवार शाम से दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में जिस तरह की अफवाहें फैलनी शुरू हुईं, उसके बाद लोग दहशत में आ गए और देखते ही देखते ऐसा माहौल बन गया कि जैसे कोई बड़ी अनहोनी होने वाली है। जहां जहां अफवाहें फैलीं, उन इलाकों में बाजार बंद होने लगे, लोग घरों से नहीं निकले और सड़कों व बाजारों में सन्ना पसरता गया। हालात की गंभीरता को देखते हुए थोड़े समय के लिए आठ मेट्रो स्टेशन बंद कर दिए। इससे भी लोगों को लगा कि कहीं कुछ हो गया है। हालांकि पुलिस ने सारी ताकत लगाते हुए इससे निपटने के लिए कमर कसी और इलाकों में लोगों के साथ इस तरह की अफवाहों का खंडन किया।

टीवी चैनलों के जरिए भी बार-बार यह बताया गया कि कहीं कुछ ऐसा नहीं है, बल्कि यह कुछ शरारती तत्वों का किया धरा है। इस वक्त राजधानी में जिस तरह के हालात बने हुए हैं, उसमें अफवाहों के चलते लोगों का दहशत में आना स्वाभाविक है। अभी भी दंगाग्रस्त इलाकों से जिस तरह की खबरें छन कर आ रही हैं, वे कम खौफनाक नहीं है। शनिवार को नालों से चार और शवों की बरामदगी से लगता है तो न जाने कितने लोग इस मौत मारे गए होंगे। अभी भी कई लोग लापता हैं। अब यह भी सामने आया है कि दंगों के दौरान तेजाब से हमले के लिए भारी मात्रा में तेजाब दंगाग्रस्त गोबिंद विहार इलाके की एक अवैध फैक्ट्री में बनाया जा रहा था। इन सब बातों से भी अफवाहों को बल मिल रहा है और लग रहा है कि दंगे कहीं पूरी राजधानी में न फैल जाएं। इसमें कोई शक नहीं कि इस तरह की अफवाह को हवा देने में सोशल मीडिया का इस्तेमाल हुआ है। इसलिए पुलिस ने बार-बार यही अपील की है कि जो भी संदेहास्पद संदेश आए, उसे किसी को आगे न भेजें, पहले उसकी सच्चाई का पता लगाएं। इसके लिए पुलिस का आईटी सेल और अधिकारी चौबीसों घंटे उपलब्ध हैं। हालांकि पुलिस ने दंगों के दौरान इस्तेमाल हुए सोशल मीडिया के चालीस से ज्यादा अकाउंट बंद करवाए हैं। पर अफवाहें तो सेंकड में फैलती हैं और दंगों में आग में घी का काम करती हैं, तेजी से नफरत और भ्रम फैलाती हैं। इसलिए ऐसे वक्त में स्वविवेक से ही काम लेना लेना होगा।

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