फिर रूसी दखल का साया

अमेरिका राष्ट्रपति चुनाव के मोड में प्रवेश कर चुका है। इसके साथ ही चुनाव प्रक्रिया में रूस के संभावित हस्तक्षेप की चर्चा शुरू हो गई है। आशंका यही है कि रूस एक बार फिर डोनल्ड ट्रंप को जितवाने की कोशिश में है। खबरों के मुताबिक अमेरिका के खुफिया विभाग के अधिकारियों ने अमेरिकी सांसदों को बताया है कि रूस एक बार फिर राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप को निर्वाचित करवाने के लिए अमेरिका के चुनावी अभियान में दखल दे रहा है। इस चेतावनी से चुनावी अभियान की विश्वसनीयता पर सवाल उठ खड़े हुए हैं। यह सवाल भी उठा है कि 2016 के चुनावों में जो छेड़छाड़ की बात सामने आई थी, उसे दोबारा होने से रोकने के लिए क्या ट्रंप प्रशासन ने कोई पुख्ता कदम उठाए हैं? प्रत्यक्ष तौर पर इसके कोई संकेत नहीं हैं। सामने आई जानकारी के मुताबिक पिछले हफ्ते हुई अधिकारियों की ब्रीफिंग 2020 के चुनावों को प्रभावित करने के बारे में थी। यह अमेरिकी मतदाताओं के बीच मतभेद पैदा करने की रूस की कोशिशों पर केंद्रित थी। इस चेतावनी के बारे में पहले द न्यूयॉर्क टाइम्स और द वॉशिंगटन पोस्ट में खबर छपी। बताया जाता है कि इस खबर से ट्रंप क्रोधित हो गए और कहा कि अब डेमोक्रेट सांसद इस जानकारी का इस्तेमाल उनके खिलाफ करेंगे। अपने पूरे कार्यकाल के दौरान ट्रंप ने 2016 के चुनावों में रूस के दखल के बारे में इंटेलिजेंस एजेंसियों के इस आकलन को साजिश बताया है। अमेरिका की इंटेलिजेंस एजेंसियों का कहना है कि रूस ने 2016 के चुनावों में सोशल मीडिया अभियान और डेमोक्रेटिक ईमेल खातों से ईमेल को चुराया। उनका कहना है कि रूस ट्रंप के अभियान को बढ़ावा देने और अमेरिका की राजनीतिक प्रक्रिया में उथल पुथल बढ़ाने की कोशिश कर रहा था। विशेष काउंसल रोबर्ट म्युलर इस निष्कर्ष पर पहुंचे थे कि रूस की तरफ से छेड़छाड़ व्यापक और सुनियोजित थी। लेकिन उन्हें रूस और ट्रंप के बीच कोई आपराधिक षड़यंत्र की कड़ी नहीं मिली। वो रिपब्लिकन सांसद जो पिछले हफ्ते डीएनआई के मुख्य चुनाव अधिकारी की ब्रीफिंग में थे, उनका कहना है कि ऐसे आरोपों के प्रति ट्रंप का रूस के प्रति रुख सख्त रहा है। मगर अब नए सिरे से रूसी हस्तक्षेप की आशंकाएं जताई जाने लगी हैं। यहां तक कि डेमोक्रेटिक पार्टी में राष्ट्रपति चुनाव में उम्मीदवार बनने की चल रही होड़ में अब सबसे आगे चल रहे बर्नी सैंडर्स ने भी ये आशंका जताई है। इस आशंका से मुक्ति अमेरिकी राजनीति के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है।

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