रूस की असल समस्या


रूस इन दिनों राष्ट्रपति पुतिन विरोधी नेता अलेक्सी नवालनी की गिरफ्तारी की खबरों से दुनिया में चर्चा में है। लेकिन रूस के अंदर से आने वाली खबरों पर गौर करें, तो यह साफ होता है कि रूस के लोग असल में इस बात से परेशान नहीं हैं कि नवालनी के साथ क्या हो रहा है। उनकी समस्या है बढ़ती गरीबी। दरअसल, इसके कारण पैदा हो रहा असंतोष भी एक कारण है, जिसकी वजह से बड़ी संख्या में लोग पुतिन विरोधी प्रदर्शनों में हिस्सा ले रहे हैं। हकीकत यह है कि कोरोना वायरस महामारी ने रूस की खराब अर्थव्यवस्था का बुरा हाल कर दिया है। पश्चिमी देशों के प्रतिबंध, तेल की घटती कीमतें और कमजोर कारोबारी निवेश के चलते हालात और बिगड़ते जा रहे हैं। बढ़ती गरीबी, घटती कमाई और महामारी के दौर में पर्याप्त सरकार से मदद ना मिलने की वजह से राष्ट्रपति पुतिन के लिए समर्थन घटा है। यही वजह है कि प्रचंड बहुमत के साथ दो दशकों से रूस की सत्ता पर पुतिन के विरोधी मजबूत हो रहे हैं। बदहाली का आलम यह है कि रूस की मुद्रा बीते करीब आधे दशक में 3.5 फीसदी सिकुड़ चुकी है। इससे खाने-पीने की चीजों के दाम बहुत बढ़ गए हैं।

गिरते जीवन स्तर से लोगों के बढ़ते गुस्से को भांप कर ही बीते दिसंबर में राष्ट्रपति पुतिन ने मंत्रियों को महंगाई रोकने के लिए आपातकालीन उपाय करने के आदेश दिए थे। इसके बावजूद जनवरी में चीनी की कीमत एक साल पहले की तुलना में करीब 64 फीसदी ज्यादा हो गई। महंगाई के कारण बड़ी संख्या मे लोग मुफ्त में बंटने वाला खाना बांटने समाजसेवी संगठनों के पास जा रहे हैं। ऐसी एक समाज सेवी संस्था के पदाधिकारियों ने मीडिया को बताया है कि महामारी से पहले उनके यहां हर रोज 30-40 लोग आते थे। अब 50-60 लोग आने लगे हैं। कतार में खड़े हो कर जरूरी चीजें लेने आने वालों में ज्यादातर रिटायर्ड लोग हैं। हालांकि इनके साथ ही उनमें ऐसे भी लोग शामिल हो हैं, जिनकी या तो नौकरी चली गई है या फिर जिनका वेतन काटा गया है। हाल ही में एक सर्वे एजेंसी लेवाडा सेंटर के कराए सर्वे में 43 फीसदी रूसियों ने माना कि मौजूदा विरोध प्रदर्शनों को आर्थिक मांगों की वजह से बल मिल रहा है। इसका फायदा नवालनी को मिल रहा है।


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *