सट्टेबाज संजीव चावला पर फैसला कब!

जब मैं एमए कर रहा था तब मेरे शहर कानपुर में बहुत कम लोग ही एमबीए करते थे। आज तो सेल्स, मार्केटिंग से लेकर हयूमन रिसोर्स तक विषय में इंजीनियर से लेकर डॉक्टर तक एमबीए कर रहे हैं। मगर मेरा मानना है कि हमारे देश में कुछ ऐसे प्रतिभावान लोग भी हैं जो कि बिना पढ़े लिखे ही सेल्स व मार्केटिंग के क्षेत्र में महारथ हासिल कर लेते हैं। संजीव चावला भी ऐसे ही लोगों में से एक हैं जो कि कभी अपने पिता के भोगल स्थित दुकान में सिले सिलाएं कपड़े बेचते-बेचते क्रिकेट के खेल को ही बेचने लग गया। वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मैच फिंक्सिग करता था व दक्षिण अफ्रीका क्रिकेट टीम का तत्कालीन कप्तान हैंसी क्रोनी उसका करीबी था। अब उसे लगभग दो दशक के बाद मैच फिक्सिंग के अपराध में ब्रिटेन से भारत लाया गया है। यह कहानी बेहद मजेदार व किसी हिंदी फिल्म थ्रिलर जैसी है।

करीब 21 साल पहले 1999 में दिल्ली पुलिस की फिरौती वसूली विरोधी सेल में करोलबाग के एक जाने माने दवा व्यापारी ने फिरौती वसूलने का मामला दर्ज करवाया। उसे दुबई से फोन करके किसी ने मोटी फिरौती मांगी थी। पुलिस ने उसके फोन को टेप करना शुरु कर दिया। यह मामला तो आगे नहीं बढ़ा मगर पुलिस ने जिन फोन नंबरों को टेप करना शुरु किया तो उनमें से एक संजीव चावला का भी था। उस व्यापारी का अपहरण कर लिया गया था। कुछ महीनों के लिए संजीव चावला ने अपना फोन आफ कर दिया। मगर जब मामला ठंडा पड़ने लगा तो उसने फोन फिर से शुरु कर दिया। पुलिस ने उसे एक विदेशी के साथ अंग्रेजी में बातें करता हुआ पाया।

मामले की पड़ताल कर रहे पुलिस इंस्पेक्टर ईश्वर सिंह ने सुना कि वह जिससे अंग्रेजी में बात कर रहा है वह कोई और नहीं अफ्रीकी क्रिकेट टीम का कप्तान हैंसी क्रोनी है। जब पुलिस इसकी तह में गई तो पता चला कि वह तो मैच फिक्सिंग मामले के बारे में सुन रहे थे। चावला यह धधा करने वालों के संपर्क में था जो कि देश के क्रिकेट पर करोड़ों रुपए का सट्टा लगाते हैं। उन्हें पता चला कि चावला दिल्ली के एक पांच सितारा होटल में उस कप्तान से 14 मार्च 2000 को मुलाकात करने वाला था। पता चला कि वह व्यक्ति हैंसी क्रोनी था व मार्च 2000 में भारत व अफ्रीका से होने वाला वन डे क्रिकेट मैच फिक्स किया जा चुका था। इसके लिए हैंसी क्रोनी को बहुत मोटी रकम दी गई थी। चावला बहुत ही शक्तिशाली था। कपड़े बेचते-बेचते वह क्रिकेट मैच पर सट्टा लगवाने के लिए उन्हें बेचने लगा। वह इस धंधे को आगे बढ़ाने के लिए विदेशों के दौरे कर वहां के सट्टेबाजों से संबंध स्थापित करने लगा।

वह दुनिया में होने वाले क्रिकेट के परिणामों का फैसला पहले से ही कर उन पर सट्टा लगवाता था। इनमें शारजाह में होने वाले मैच भी शामिल था। वह दिल्ली की पेज थ्री पार्टियों में दिखाई देने वाला एक नियमित व्यक्ति था व बड़े बड़े फिल्म स्टारों, खिलाड़ियों, उद्योगपतियों व नेताओं के साथ इनमें शामिल होता। उसने पांच सितारा होटलों को अपना अड्डा बनाया व पैसे वाले ग्राहकों से उसने इतना जयादा पैसा कमाया कि पहले उसने दिल्ली में सबसे मंहगे इलाके ग्रेटर कैलाश-2 में एक मंहगा घर किराए पर लिया व फिर ‘लंदन’ में किराए का घर लेकर रहने लगा। वह भारत व लंदन आया जाया करता था। वहीं से अपना धंधा चलाता था। वहां की सरकार ने उसे 2003 से 2005 तक लंदन में ही रहने देने की इजाजत दे दी व बाद में उसे पैसे व संबंधों के बल पर ब्रिटिश नागरिकता मिल गई। उसका परिवार वहीं रहने लगा व एक पार्टी में उसकी मुलाकात राजेश कालरा से हुई जो कि क्रोनी व उसके बीच एक कड़ी था व उसके फोन से ही क्रोनी, चावला से मैच फीक्सिंग की बातें करता था। इस बीच यह मामला ठंडा पड़ा व चावला व कालरा के संबंधों व रसूख के कारण इसमें कोई प्रगति नहीं हुई। जब 2013 में नीरज कुमार दिल्ली पुलिस के आयुक्त की प्रेस कान्फ्रेंस में एक पत्रकार ने उनसे कहा कि इस मामले में अभी तक एफआईआर तक दर्ज क्यों नहीं की। उन्होंने पुलिस उपायुक्त (आलोक कुमार) से इस मामले में जांच कर कार्रवाई करने को कहा। वह सीबीआई के संपर्क में आए पता चला कि इस मामले की फाइलें अशोक विहार पुलिस थाने में धूल खा रही थी व नीरज कुमार ने रिटायर होने के एक दिन पहले एफआईआर फाइल करवा दी। मगर 2014 में एक अपराधी गैंग ने दिल्ली में एक कार से 14 करोड़ की रकम लूट ली जो कि कालरा की बताई जाती थी व पुलिस ने यह पैसा जब्त कर लिया व जांच आयकर विभाग के पास चली गई।

कालरा ने दावा किया कि उसका व संजीव चावला का संबंध 2000 में ही खत्म हो गया क्योंकि दक्षिण अफ्रीका व भारत के बीच होने वाली मैच फिक्सिंग उसके मन मुताबिक नहीं थी। भारत व ब्रिटेन के बीच प्रत्यार्पण संधि होने के कारण चावला के लाए जाने का मामले में वहां सरकार ने 2016 में उसे भारत लाए जाने के लिए प्रत्यर्पण की कार्रवाई शुरू की मगर चावला ने भारतीय जेलों की दुर्दशा की आड़ में अदालत में उसे प्रत्यार्पण का मामला लटकता रहा। मगर 2018 में भारत ने ब्रिटिश अदालत में यह कहा कि अभियुक्त को वहां सुरक्षा व सुविधा के साथ रखा जाएगा।

अंततः दिल्ली से उसे लंदन से भारत लेकर आ गई। अब यहां उसका क्या होगा यह तो समय ही बताएगा। अपराध करने के बाद उसे भारत तक लाने में 20 साल लग गए। अब अपराध साबित करने में कितना समय लगेगा यह तो निर्भया कांड के दोषियों को अब तक फांसी पर न लटका पाने से मिलता है। हैंसी क्रोनी की 3 मई 2002 को एक विमान दुर्घटना में मौत हो गई।

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