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सरदार परमजीत, वाह

वाह! इसे संयोग ही कहे या कुछ औरजो सिखों, पंजाब व अकाली दल से मेरा शुरु से ही बहुत जुड़ाव रहा है। जब पंजाब में आतंकवाद अपने चरम पर था तब उसे लगातार कवर किया। दुर्दांत आतंकवादियों से अपने संबंध रहे। अकाली सिख नेताओं से मित्रता रही। सच कहूं तो मैंने जम्मू कश्मीर और पंजाब दोनों को ही आतंकवाद के दौरान रिपोर्ट व कवर किया पर मुझे कभी भी पंजाब में आतंकवाद या आतंकवादियों से भय नहीं लगा। सच कहूं तो इन सबने मेरी मदद  की। जरनैल सिंह भिडरावाला ने तो मेरी व मेरे तत्कालीन फोटोग्राफर मित्र सुभाष भारद्वाज को मां. की दाल में खाना खिलाने के साथ हमें तंदरुस्त होने की कई सलाह दी थी। दिल्ली के अकाली व सिख राजनीति में मेरे बड़े दोस्त थे। कुछ दिनों पहले मैंने सिखों के बारे में लिखा था कि उनके अंदर काफी सेवा भावना होती है व वे धर्म कर्म में मदद करने को लेकर नहीं घबराते है। हाल ही में कोरोना वक्त के दौरान मैने जो कुछ देखा उसके बारे में इससबका वर्णन करना जरुरी हो जाता है।

उन दिनों संयोग से एक सिख नेता सरदार परमजीत सिंह चंडोक से मेरी काफी मित्रता हो गई थी। वे उस समय हिंदुस्तान से सिखों का धार्मिक जत्था पाकिस्तान ले जाते थे। वे सरकार से परमिट प्राप्त ऐसे नेता थे जो कि हर साल चार बार सिखों के जत्थे ले जाते थे व वहां जाने  के पहले  और  आने के बाद वे मुझसे जरुर मिलते थे। एक रिपोर्टर के रुप में मेरे लिए वे काफी काम के इंसान थे। जब मेरी उनसे दोस्ती हुई उन दिनों पंजाब में आतंकवाद अपनी चरम सीमा पर था व पाकिस्तान जाने वाले जत्थों को वहां के खुफिया एजेंसी आईएसआई व सेना के अधिकारी भारत के खिलाफ बरगलाते थे।

परमजीत सिंह की एक खास आदत थी कि वे वहां होने वाले हर भारत विरोधी मामले की मुझे पूरी रिपोर्ट देते थे। वहां बांटे जाने वाले भारत विरोधी गानों के टेप मुझे देते। सिखों के धार्मिक जत्थे में आने वाले आतंकवादियों के फोटो खींच लाते व वहां की सरकार की हरकतों की मुझे पूरी जानकारी देते थे। यही कारण था कि गुप्तचर ब्यूरो के आला अफसर भी जनसत्ता में छपने वाली रिपोर्ट को बहुत ध्यान से पढ़ते थे।

हाल ही में उनके बारे में जो कुछ सुनने को मिला तो उससे मन खुश हो गया। पता चला कि परमजीत सिंह इन दिनों दिल्ली के ऐतिहासिक व जाने माने गुरुद्वारा बंगलासाहिब गुरुद्वारे में चेयरमैन बन गए हैं। इसके अलावा वे दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अंतरराष्ट्रीय मामलों के सलाहकार भी हैं। कोरोना काल के दौरान आम इंसान व मानवता की सेवा करने वाला यह गुरुद्वारा काफी चर्चा में आया है। जब से दिल्ली में लाॅकडाउन घोषित किया गया है उनकी अध्यक्षता वाले गुरुद्वारा बंगलासाहिब द्वारादो लाख लोगों के लिए खाना बंटवाया जा रहा है। इसके अलावा गुरुद्वारा कमेटी के तहत आने वाले शीशगंज साहब, मोतीबाग व नानकपुरा के गुरुद्वारा के लंगरों में भी भूखे लोगों के लिए खाना तैयार करने का काम चल रहा है। वे बताते हैं कि इस पुण्य काम में गुरुद्वारा कमेटी के सभी 46 सदस्य भी उनका सहयोग कर रहे हैं व गुरुद्वारों से खाना डिस्ट्रिक कमिश्नर के दफ्तर भेजा जाता है। जहां से वह लोगों में बंटवाया जाता है।

इसके अलावा गुरुद्वारे में काम करने वाले कर्मचारियों को भी वहां से सूखा राशन, जैसे गेहूं, चावल, दाल, छोले आदि मुफ्त में दिया जा रहा है। उनके गुरुद्वारे से इस दौरान अस्पताल में कार्य करने वाले डाक्टरों व दूसरे कर्मचारियों को अपने वातानुकूलित अतिथिगृह में रहने व खाने आदि की सुविधाएं भी प्रदान की गई है। वे बताते हैं कि इस काम में उन्हें किसी चीज की दिक्कत नहीं हो रही है। एक भक्त ने तो61 क्विंटल राहत का सामान भेजा है। एक भक्त का जब 51,000 का चैक किसी कारण से बैंक से वापस आ गया तो उसने 1.25 लाख रुपए का दूसरा चैक जारी किया। इसमें हिंदू व सिख दोनों ही है जो कि दिल खोल के दूसरों की मदद कर रहे है।

गुरुद्वारे कीराहत भूमिका को देखते हुए पिछले दिनों दिल्ली पुलिस के जवानों ने वर्दी पहनकर अपने वाहनों पर सवार होकर राहत  व गुरुद्वारे के सम्मान में उसकी सड़कों पर जुलूस निकाला था। वे सभी धर्म के धर्मगुरुओं, स्वामी चिदानंद सरस्वती, लोकेश मुनि, उमर अहमद इलियासी, गोस्वामी सुशील महाराज सरीखे धार्मिक नेताओं के साथ मिलकर कोरोना से आम आदमी को मुक्त करने के लिए पूजा आदि भी करते रहते हैं।

जब मैं रिपोर्टिंग करता था तब यह खुलासा करता था कि किस तरह से राहत में भ्रष्टाचार हो रहा है। गैस के सिलिंडरो के खरीद से लेकर राशन तक की खरीद में भ्रष्टाचार व्याप्त हो गया है। वहीं आज इस संकट की घड़ी में यह गुरुद्वारा व उसके चेयरमैन मानवता की रक्षा के लिए सामने आए हैं। अब उन्होंने देश भर के सिखों से अपील जारी करके कहा है कि वे गुरु अर्जन देव व शहीदी पर्व पर लंगर व छबील आदि लगाने में होने वाले खर्च लोगों को खाने पीने की राहत देने के लिए खर्च करे। सबको उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्होंने साबित कर दिया है कि कैसे धर्म मानवता की सेवा कर सकता है।

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