लैंगिक समता की ओर

पहले ऐसा फैसला सेना के मामले में आया था, अब नौसेना के लिए आया है। दोनों जगहों पर महिलाओं का समानता के लिए लंबे समय जारी संघर्ष कामयाब हुआ है। ताजा निर्णय में कोर्ट ने नौसेना में पुरुष और महिला अधिकारियों के साथ समान व्यवहार किए जाने की बात पर जोर दिया। उसने महिला अधिकारियों के लिए स्थायी कमीशन को मंजूरी दे दी। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ के नेतृत्व वाली एक पीठ ने कहा कि देश की सेवा करने वाली महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने से इनकार करने पर न्याय की हत्या होगी। गौरतलब है कि इन दोनों मामलों में केंद्र सरकार ने महिलाओं के खिलाफ रुख लिया था। उसने कई तर्क देते हुए महिलाओं को स्थायी कमीशन देने का विरोध किया था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि नौसेना में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन प्रदान करने में लैंगिक भेदभाव नहीं किया जा सकता।

अदालत ने कहा- ‘जब एक बार महिला अधिकारियों की भर्ती के लिए वैधानिक अवरोध हटा दिया गया, तो स्थायी कमीशन देने में पुरुष और महिलाओं के साथ समान व्यवहार होना चाहिए।’ स्थायी कमीशन किसी अधिकारी को नौसेना में तब तक सेवा करने का अधिकार देता है, जब तक कि वह शॉर्ट सर्विस कमीशन (एसएससी) के विपरीत सेवानिवृत्त नहीं हो जाता। वर्तमान में यह अवधि 10 साल है। इसे चार साल या कुल 14 साल तक बढ़ाया जा सकता है। कोर्ट ने केंद्र के इस रुख को खारिज कर दिया कि नौसेना में महिला अधिकारियों को समुद्री कर्तव्य नहीं दिए जा सकते, क्योंकि उनके रूसी जहाजों में महिलाओं के लिए वॉशरूम नहीं हैं। नेवी में महिला अधिकारियों को बुलाने के लिए पर्याप्त दस्तावेजी सबूत हैं। यह फैसला नौसेना में उन महिला अधिकारियों को पेंशन लाभ भी देगा है जो सेवानिवृत्त हो चुकी हैं और जिन्हें स्थायी कमीशन नहीं दिया गया था। इसके पहले सेना में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने के दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने भी मुहर लगा दी थी। तब कोर्ट ने कहा था कि केंद्र सरकार युद्ध क्षेत्र को छोड़कर बाकी सभी इलाकों में महिला अधिकारियों को स्थायी कमान देने के लिए बाध्य है। सामाजिक और मानसिक कारण बताकर महिलाओं को इस अवसर से वंचित करना न केवल भेदभावपूर्ण है, बल्कि अस्वीकार्य भी है। इस तरह कहा जा सकता है कि देश में लैंगिक न्याय की लड़ाई एक कदम और आगे बढ़ी है। यह स्वागतयोग्य है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Shares