सोशल मीडिया का ऐसे मखौल उड़ाना

सेलफोन की नवीनतम तकनीक मेरे लिए काला अक्षर भैंस बराबर है। मैं सोशल मीडिया से कोसों दूर रहता हूं। पिछले दिनों व्हाट्सअप को डाउनलोड महज इसलिए कराया था ताकि घर बैठे जरूरी दस्तावेज भेज व मंगवा सकूं। इसके बावजूद मैंने जो कुछ पढ़ा व समझा है उससे लगता है कि पिछले दो चुनावों में भाजपा को सत्ता में लाने में सोशल मीडिया की बहुत अहम भूमिका रही थी। मगर इन दिनों सोशल मीडिया पर भाजपा सरकार व नरेंद्र मोदी को लेकर जो कुछ आ रहा है उसे पढ़कर मैं स्तब्ध हूं। समझ में नहीं आता कि उसे पढ़कर क्या करूं।

मैंने अपने जीवन में सिर्फ दो नेताओं राष्ट्रपति ज्ञानी जैलसिंह व प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह का पत्रिकाओं में मखौल बनते देखा। जब ज्ञानी जी राष्ट्रपति बने तो उनकी तस्वीर व इस बयान के साथ दिल्ली की दीवारो पर एक पोस्टर नजर आया कि अगर इंदिरा जी कहे तो मैं झाडू भी लगा सकता हूं। डा. मनमोहन सिंह द्वारा प्रियंका गांधी के बेटे को नमस्ते करते हुए तस्वीर छपी। मगर मोदी के मामले में तो गजब हो गया।

मेरा अपना मानना है कि संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के कामकाज की आलोचना तो की जानी चाहिए मगर शालीनता की सीमा के अंदर रहते हुए। भले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यह कह चुके हो कि वे लोगों द्वारा उनके बारे में कुछ भी कहे जाने की परवाह नहीं करते हैं। मगर सोशल मीडिया पर जो कुछ भी आ रहा है वह मेरे गले नहीं उतर रहा है।

नया इंडिया के पाठक बहुत बुद्धिमान व प्रतिक्रियाशील है। अतः मैं अब उन पर ही यह फैसला छोड़ता हूं कि सोशल मीडिया पर हमारे प्रधानमंत्री नरेंद मोदी को लेकर की जाने वाली चर्चा व बातों का क्या अर्थ लिया जाना चाहिए? हाल में जब वे चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिलने महाबलीपुरम गए तो स्वच्छता अभियान के दीवानों द्वारा वहां तट पर फैली गंदगी की सफाई में नरेंद्र मोदी की पहल पर तस्वीरे पोस्ट सोशल मीडिया में बहुत आई।

जो पोस्ट मेरे पास आई है उनके मुताबिक किसी ने लिखा कि हमारी औकात की बराबरी तुम क्या करोगे पाकिस्तान वालो, हमने तो कचरा बीनने के लिए भी प्रधानमंत्री रखा हुआ है तो कोई लिखता है कि प्रधानमंत्रीजी,आपके किसी स्थान पर जाने के एक महीने से 15 दिन पहले ही सारे शहर की सफाई और सुरक्षा की जांच की जाती है। चप्पे-चप्पे तक को जांचा जाता है।

सुरक्षा की दृष्टि से उनका हर कार्यक्रम, स्थान, मार्ग सब कुछ पूर्वनिर्धारित होता है। मॉक ड्रिल भी 2-3 बार होती है। क्या इस बार मोदी बिना सुरक्षा के अचानक चले गए? जबकि पिछले दिनों यह भी प्रचारित कराया गया थाकि मोदी और अमित शाह को जान का खतरा है।

प्रधानमंत्रीके समुद्र तट पर सफाई फोटो के प्रचार के बाद सोशल मीडिया पोस्ट से मखौल बनाते हुए कहा गया कि मोदी के साथ कैमरामैन तो गए थे तभी ऐसे फोटो, वीडियो शूट किया गया। कैमरामैन आगे और शूट करते चल रहे थे क्योंकि पूरा बीच तो खाली है। अंतः में एक व्यक्ति आता है जिसे थैली पकड़ा देते हैं। मोदी की सुरक्षा व्यवस्था के कमांडो कहां है? मोदी कचरा उठा रहे है तो किसी सुरक्षा कर्मी ने क्यों नहीं कचरा लपका? जबकि एक बुके भी जब कोई देता है तो तुरंत सुरक्षाकर्मी उसे लपक लेते हैं!

कचरे से भरी बहुत सारी थैलियां नेपथ्यमें नजर आती है। वो सभी थैलियां पारदर्शी साफ-सुथरी है। क्यों वे सभी मोदी ने बीच में कचरा बीन कर भरी? इतना समय होता है मोदी को? जबकि वे छुट्टियां बिताने नहीं बल्कि चीन के राष्ट्रपति से महत्वपूर्ण मुलाकात के लिए गए थे। यदि कचरे की इतनी सारी थैलियां सफाई व्यवस्था के तहत पहले से ही भरी गई थी। कचरा पारदर्शी थैली में जान-बूझकर प्रदर्शन के लिए रखा गया था जबकि क्योंसारे विश्व में कचरा काली थैलियों में ही भरा जाता है और यदि पूर्व में ही बीच साफ कर दिया गया था तो इस नौटंकी के लिए इतना कचरा जगह-जगह छोड़ा गया था, यह सिद्ध होता है।

जाहिर है कि ऐसी पोस्ट लिखने वाला प्रधानमंत्री मोदी की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंतित है अथवा उनके द्वारा कूडा बीने जाने की घटना का उपहास. उड़ा रहा है।

वहीं किसी का कहना है कि प्रधानमंत्री के दक्षिण भारत दौरे के दौरान एक बहुत बड़ी चूक सामने आई। एसपीजी सुरक्षा के लिए सुरक्षा निर्देश वाली बुक के अनुसार प्रधानमंत्री या एसपीजी सुरक्षा प्राप्त कोई भी बगैर पूर्व सूचना के कहीं आ-जा नहीं सकते हैं। उनके आने के पूर्व सारे इलाके का सेनीटाइजेशन (जांच-पड़ताल) होता है। तीन स्तर पर की जाने वाली इस जांच के तहत उस इलाके के कूड़े को सबसे पहले हटवाया जाता है क्योंकि उसमें संदिग्ध वस्तु होने की संभवना रहती है। अब प्रधानमंत्री को महाबलीपुरम के समुद्र तट पर मोर्निंग वाक के लिए जाना था और वह पूर्व नियोजित था कि किस इलाके में जाना है। फिर राज्य सरकार ने उस इलाके में इतना कूड़ा क्यों छोड़ा? यहीं नहीं सुरक्षा एजेंसियों ने भी प्रधानमंत्री के आगमन स्थल पर इतनी खाली बोतलें, कचरे को नजरअंदाज क्यों किया? हमारे उत्तर प्रदेश में तो एक मंत्री भी कहीं आए तो पूरी सड़क को पानी से धुलवा कर, पूरे शहर के सफाई कर्मचारी लगवा कर कूड़ा साफ करने और वहां चूना डलवाना अनिवार्य है।

लेकिन देखों यह बहुत शर्मिंदा करने वाला वाक्या है कि जिस इलाके में देश के और चीन के राष्ट्रपति को आना था वहां इतनी गदंगी रही। सबकुछ ठीक है लेकिन कचरा पोलीथीन में रखा है। जनता पीएम का चालान काटे। जो हो एक चीज मेरी समझ में नहीं आ रही है कि क्या इन हालात में भी प्रधानमंत्री व भाजपाइयों का सोशल मीडिया पर पहले जितना ही विश्वास है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Shares