दक्षिण चीन सागर में चीन की दादागिरी

पूरी दुनिया में कोरोना के बाद यदि कोई सबसे ज्यादा चर्चा वाली खबर है तो वह दक्षिण चीन सागर है। इस बात की अहमियत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इस स्थान पर कोई भी चीनी खुराफात को रोकने के लिए विश्वशक्ति अमेरिका ने अपने तीन जंगी जहाजी बेड़े वहां भेज कर तैनात कर दिए हैं ताकि वहां की तमाम हरकतों पर वह नजर रख सकें। सामरिक व आर्थिक दृष्टि से दक्षिण चीन सागर बहुत अहमियत रखता है। इसके कब्जा करने को लेकर चीन बहुत बैचेन है व उसके पड़ौसी देश उसकी मनमानी हरकतों से परेशान व नाराज है। इस सागर की अहमियत इस बात से लगाई जा सकती है कि चीन के करीब स्थित इस सागर से होकर दुनिया के एक-तिहाई पानी के जहाज गुजरते हैं जो कि दुनिया भर में जरुरी सामान लेकर जाते हैं।

भारत में दुनिया भर से सामान लाने वाले अधिकांश जहाज यहीं से गुजरते है। चीन को 80 फीसदी उर्जा जिसमें तेल व प्राकृतिक गैस शामिल है की आपूर्ति यही से होती है। यहां पर बहुत बड़े तेल भंडार हैं। वह इस इलाके में अपनी मनमानी, गुंडागर्दी दिखाता है जिसके कारण उसके पड़ौसी देश ही नहीं भारत व अमेरिका तक परेशान है। प्रशांत महासागर के इन देशों में इंडोनेशिया, ताइवान, फिलीपींस, वियतनाम, ब्रुनेई, मलेशिया आदि देशों के साथ उनकी जमीन पर जबरन अपने दावों के कारण चीन का इनके साथ विवाद  अर्से से चल रहा है। सामरिक जानकार बताते हैं कि 2017 के बाद पहली बार इस क्षेत्र में चीन व अमेरिका के बीच इतना विवाद गरमाया है। यहां से दुनिया के साथ 3 खरब डालर का व्यापार होता है। इसके अलावा यहां दक्षिण पूर्व एशिया के लोगों का पेट भरने के लिए हर साल अरबों रुपए की मछलियां पकड़ी जाती है। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान यह इलाका जापान के कब्जे में आ गया था। अब चीन का पड़ौसियों एवं अमेरिका के साथ उसका तनाव है। अमेरिका ने बता दिया  है कि वह मुक्त व्यापार जारी रखने के लिए किसी भी देश की इस 35 लाख वर्ग किमी क्षेत्र में दादागीरी स्वीकार नहीं करेगा।

पूरी दुनिया में इस्तेमाल किया जाने वाला 50 फीसदी तेल इस सागर से होकर गुजरता है। तभी दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए यह महत्व व अंहम इलाका है। जहां एक ओर पूरा विश्व कोरोना के संकट से जूझ रहा है वहीं चीन पूरी दुनिया के लिए एक नई चुनौती पेश कर रहा है। वहां चीनी सैनिक बहुत तादाद में तैनात कर दिए गए है। उधर 1 लाख टन वजनी अमरीका के लड़ाकू जहाजों को 2017 में अमेरिका ने उत्तरी कोरिया से टकराव के दौरान भेजा था और अब भेजा है। 35 लाख वर्ग किलोमीटर के इलाके का दक्षिण भाग ही चीन को स्पर्श करता है । वह मलक्का व सुमत्रा प्रायद्वीप को भी छूता है। यह दुनिया का भव्यतम जलमार्ग है। दक्षिण चीन सागर को लेकर चीन व उसके पड़ौसियों के बीच टकराव पुराना है जिसमें है जड़  तेल के समृद्ध द्वीप हैं। एक द्वीप मलेशिया के कब्जे में, 20 द्वीप वियतनाम के कब्जे में व आठ चीन के कब्जे में हैं।

हाल ही में चीन ने इस क्षेत्र में सैनिक अभ्यास किया था। यह दुनिया का व्यस्तम जलमार्ग है। चीन के चलते कोरोना काल में इस क्षेत्र के देशों के लिए  चीन दोहरी चुनौती पैदा कर रहा है। इसके साथ चीन शब्द जुड़ा होने के कारण चीन इसे अपना मानने का दावा कर रहा है जबकि पूरी दुनिया का कहना है कि फिर तो भारत पूरे हिंद महासागर क्षेत्र को अपना मानने का दावा करेगा। भारत सरकार ने इस क्षेत्र के व्यापारिक व सामरिक महत्व को समझते हुए ही इस पर ध्यान देना शुरु कर दिया है। लुक ईस्ट की नीति अपनायी। वह चीन को भी उसकी हद में रखना चाहता है। माना जा रहा है कि इस देश की स्थिरता व शांति को लेकर इस इलाके में सबसे बड़ी सामरिक अशांति होने का खतरा है। याद करा दे कि 2014 में पूर्वी एशिया सम्मेलन में भारत ,अमेरिका वियतनाम ने इस क्षेत्र में एशिया को सुरक्षा मार्ग के तौर से जलमार्ग की सुरक्षा करने की बात हुई थी ताकि वहां बिना किसी रोक टोक से दुनिया भर के जहाज आ-जा सके। इस मार्ग के जरिए ही भारत का पूर्वी एशिया के तमाम देश के साथ व्यापार होता है। भारत कई बार यह कह चुका है कि वह इस क्षेत्र में अपने समारिक हितों की रक्षा के लिए अपनी नौसेना तैनात कर सकता है।

भारत का55 फीसदी व्यापार इसी मार्ग के जरिए होता है। जापान व अमेरिका चाहते हैं कि इस क्षेत्र में भारत का हस्तक्षेप बढ़े। इन इलाकों में चीन की दादागीरी रोकने के लिए अमरीका कहता आया है कि वह अंर्तराष्ट्रीय जलमार्ग को स्वतंत्र रखने के लिए किसी भी हद तक जा सकता है। चीन इस मामले में अमेरिका पर हस्तक्षेप करने के आरोप लगाता आया है। चीन के तमाम पड़ौसी देशों का दक्षिण चीन सागर पर एक्सक्लूसिव इकोनामिक जोन या यूएन कनवेंशन या ला आफ द सी के अंतर्गत पूरा अधिकार है। मगर चीन उनके इस अधिकार को नहीं मानता है। फिलीपीन ने चीन की इस मनमानी को संयुक्तराष्ट्र की पंचाट में चुनौती देते हुए इस मामले को हल करने का अनुरोध किया है।

पंचाट ने फिलीपीन के हक में फैसला सुनाया मगर चीन ने उसे मानने से इंकार करते हुए धमकी दी है कि वह अपने शर्तो को सेना के जरिए हासिल व साबित करे। अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए चीन ने आसपास के द्वीपों से पत्थर व रेत हासिल कर वहां एक नया मानव निर्मित द्वीप बना दिया है जिस पर दो रनवे भी है। एक रनवे 30,000 मीटर लंबा व दूसरा 2600 मीटर लंबा है। यहां वह बड़ी आसानी से अपनी सेना के बम वर्षक व सैन्य सामान लाने ले जाने वाले जहाजों को उतार सकता है जो कि इस क्षेत्र पर उसे अपना कब्जा बनाए रखने के बहुत मदद करेंगे।

वह यह कब्जा कर ताईवान व भारत के जहाज रानी उद्योग को भी खतरा पैदा कर सकता है। जापान भी उसकी बातों पर विश्वास नहीं करता है। जब 2010 में उसका जापान के साथ तनाव शुरु हुआ तो उसने जापानी इलेक्ट्रानिक उद्योग के लिए जरुरी रेयर अर्थ दुर्लभ अयस्क की सप्लाई वहां नहीं होने दी थी । इन इलाकों के जरिए वह जापान, दक्षिण कोरिया व भारत के लिए व्यापारिक दिक्कते पैदा कर सकता है। अमेरिका को भारत जापान व दक्षिण कोरिया के हितों को चिंता है। यह याद दिलाना जरुरी हो जाता है कि अक्टॅूबर 2015 में ओबामा प्रशासन ने चीन को उसकी इस दादागीरी के लिए आगाह किया था पर उस पर कुछ असर नहीं पड़ा है। अब ट्रंप की बारी है।

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