south koreas entertainment softpower सोचें दक्षिण कोरिया विश्व कथाकार
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सोचें, दक्षिण कोरिया विश्व कथाकार!

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दक्षिण कोरिया का नया कमाल है, जो वह चुपचाप मनोरंजन का सॉफ्टपॉवर है। दुनिया के घरों में, लोगों में हौले-हौले उसकी कहानियों, उसके बनाए शो की वह धूम बनी है कि हॉलीवुड, बॉलीवुड ताकते हुए हैं। हाल में ऑक्सफोर्ड इंग्लिश डिक्शनरी ने कोरियाई मूल के 26 शब्द अंग्रेजी में इस बयान के साथ शामिल किए कि ‘हम इस समय कोरियाई वेव के शिखर पर हैं’! South koreas entertainment softpower

कैसे कोई देश, वहां के लोग, वहां की सरकार वह कर देती है, जो दुनिया उसकी दिवानी हो जाए और उससे कहानी सुनने लगे? उसकी सभ्यता-संस्कृति, रहन-सहन, खानपान, भाषा जानने लगे?  यों दुनिया को कहानी सुनाने में, कहानी की कला में, सृजनात्मकता में अमेरिका और उसके हॉलीवुड की मोनोपॉली रही है। चाहें तो ख्याल में बॉलीवुड को भी रखें। लेकिन हॉलीवुड, बॉलीवुड अब आउट हैं और दुनिया है कोरियाई ड्रामों की दिवानी! सहज प्रेम, रोमांस भरी मगर साफ-सुथरी कोरियाई कहानियों की! हम सब मानते हैं दक्षिण कोरिया ने पश्चिमी तकनीक की नकल से, प्रोडक्ट उम्दा बना एलजी, सैमसंग जैसे ब्रांड को पृथ्वी के घरों में पहुंचाया लेकिन अब नया कमाल है, जो वह चुपचाप मनोरंजन का सॉफ्टपॉवर है। दुनिया के घरों में, लोगों में हौले-हौले उसकी कहानियों, उसके बनाए शो की वह धूम बनी है कि हॉलीवुड, बॉलीवुड ताकते हुए हैं। हाल में ऑक्सफोर्ड इंग्लिश डिक्शनरी ने कोरियाई मूल के 26 शब्द अंग्रेजी में इस बयान के साथ शामिल किए कि ‘हम इस समय कोरियाई वेव के शिखर पर है’! तो नेटफ्लिक्स ने नौ एपिसोड के कोरियाई ‘स्क्विड गेम’ सीरियल से नौ सौ मिलियन डॉलर मुनाफे की घोषणा की…सोचें एक गैर-अंग्रेज मुल्क की गैर-अंग्रेजी जुबान वाले सीरियल से!

छोटे, अदने से दक्षिण कोरिया का यह चमत्कार नहीं तो क्या? कैसे बनी यह उपलब्धि? शुरुआत तब हुई जब देश एशियाई वित्तीय संकट में था। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से कर्ज लेने के बाद डूबता हुआ। विदेशी मुद्रा के घटे हुए भंडार के लिए पैसे चाहिए थे। तब राष्ट्रपति किम डे जुंग ने सोचा, प्लान बनवाया कि मनोरंजन उद्योग आर्थिक इंजन हो सकता है। लिहाजा संस्कृति मंत्रालय का पुनर्गठन हुआ। कोरियन फिल्म कौंसिल को पैसे दिए गए। सुनिश्चित किया गया कि विश्वविद्यालयों से अभिनय, कहानियां लिखने-शो बनाने वाली प्रतिभाएं निकलें। कहानी के मनोरंजन उद्योग में आहार, विदेश मामले, खेल और पर्यटन के कई मंत्रालय एक साथ निवेश के लिए जुटे!

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और नेतृत्व, विजन, व्यवस्था व लोगों का कमाल जो 1999 से कोरियन शो का धमाल शुरू हुआ तो अब उसका शिखर वैश्विक। सैमसंग, एलजी जैसे ही कोरियाई शो उर्फ के-सीरिज, ‘हालयू’ हालयू का धमाल वैश्विक ब्रांड। 22 साल बाद कोरियाई मनोरंजन उद्योग अब वह मुकाम लिए हुए है, जहां दुनिया उसकी दिवानी है। एक नई वैश्विक सांस्कृतिक परिघटना। सिर्फ शो और संगीत ही नहीं इसके जरिए वेबटून, भोजन, फैशन से भी लोकप्रिय बनती दक्षिण कोरियाई जीवनशैली।

मैं तीन साल पहले राजस्थान के छोटे शहर की एक लड़की से मिली। उम्र तीस वर्ष से कम व दुनियादारी से लगभग बेखबर। अपने विषय-पेशे में खोए हुए। सही अर्थों में काम को ही पूजने वाली। न कोई शौक, न आराम, मौजमस्ती या मनोरंजन की चाह। मैंने पूछा कुछ तो दिलचस्पी होगी? तो बताया- उसे कोरियाई शो पसंद है। मैं उन्हें चाव से देखती हूं।…मैं हैरान। भला कोरियाई शो क्यों! कैसे समझती हो? क्या है खास? उसने मुस्करा कर कहा- बस, वे अलग हैं …. वह शो देख-देख कर कोरियन शब्द जान गई थी। शाकाहारी होने के बावजूद वह कोरियाई खाद्य पदार्थों के प्रति आकर्षित थी। भविष्य में यात्रा की उसकी सूची में सिर्फ कोरिया की जगहें थीं। मैंने जब उससे इस जुनून पर और कुरेदा तो तो फिर कहा, ‘वे अलग हैं … उमंग भरने वाले’।‘they are different…uplifting’.

मुझे कौतुक हुआ। (यह बात दक्षिण कोरिया की बोंग जून हो की ‘पैरासाइट’ फिल्म के अंतरराष्ट्रीय कल्ट क्लासिक होने से पहले की है)। मैने घर आकर तब नेटफ्लिक्स पर याकि जैसा कहा जाता है, ‘के-ड्रामा’ के कोरियन शो तलाशे और ताबड़तोड़ कुछ शो देखे तो समझ आया कुछ-अलग, नई बात तो है। ज्यादातर रोमांटिक कॉमेडी शो। अच्छी और प्यारी कहानियां, मुझे भी उनसे लगाव हो गया। सबसे पहले आंखों के लिए आसान। यों लड़के-लड़की से जुड़ा आम ड्रामा पर साथ-साथ रोमांटिक मोड वाला मसाला भी। पर भदेस, भोंडा, बॉलीवुडी बकवास और तमाशों जैसा नहीं बल्कि मीठी, प्यारी सी क्यूट कहानी। भावनात्मक ड्रामा, सॉफ्ट कॉमिक और वास्तविक जीवन की सघनता को धीरे-धीरे उकेरती, बढ़ाती-गहराती कहानी भिन्न किस्मों के मनोरम दृश्यों से मनभावक। मेलोडी लाइट और परिवेश इतना मजेदार, हवादार कि मानो आप परियों की दुनिया में हैं। लगभग सभी एपिसोड का समापन कगार, सस्पेंस के उन द्श्यों से कि दर्शक अगले एपिसोड में स्थिति स्पष्ट होने तक कुलबुलाता रहे। तनाव, कौतुहल को ऐसी सुविज्ञता से पकाया जाता है कि दर्शक अगले एपिसोड तक बेचैन रहे। वह तब तक भावनात्मक रूप से जुड़ा व इंतजार करते हुए होगा जब तक कि नायक-नायिका की जोड़ी एक दूसरे का हाथ थाम नहीं ले। हां, शो के अधबीच प्रेमी-प्रेमिका के हाथ थामने का मामूली अंदाज, सीन वह भाव बनवा देता है जो पश्चिम के शो में अक्सर बेडरूम सीनों से दर्शाया जाता है। दूसरा, मामला फैशन का है। फैशन साफ-सुथरा, सलीकेदार, शानदार और चुस्ती व परफेक्शन को दर्शाता हुआ ऐसा कि दर्शक सोचेगा, चाहेगा कि ऐसी ड्रेस उसके वार्डरोब में भी हो। यहां तक कि उनके भड़भड़ाते, शोशेबाज चरित्रों के कपड़े भी मनभावक लगेंगे। तीसरे, अभिनेता और उसका अभिनय सॉफ्ट, दबा होगा, यदि कोई सीन टॉप का है, चेहरे में मुस्कान या वाह या चमत्कृत करने वाला हुआ तब भी के-ड्रामा के शो में कलाकारों का अभिनय म्यूट मिलेगा। हम अपने शो में ओवरऐक्टिंग से झुझलाते है उन्हें फास्ट फॉरवर्ड कर देते हैं। पर के-ड्रामा में ऐसा नहीं होता है क्योंकि ये तो बस अच्छे, कहानी को सहज अभिनय से बढ़ाते हुए होते हैं। चौथा और सबसे महत्वपूर्ण है कहानी, कथा लिखने-बुनने की उम्दा, श्रेष्ठ-चुस्त गढ़ाई, अंदाज तो प्रोडक्शन की गुणवता व क्वालिटी भी।

कोरियाई शो में भारतीय दर्शक निश्चित ही सांस्कृतिक समानताएं बूझते होंगे। बड़ों का सम्मान, जूते अंदर नहीं, स्नेह-प्रेम का बड़बोला प्रदर्शन नहीं, बल्कि म्यूटेड प्रदर्शन, बुजुर्गों और महत्वपूर्ण पदों वाले लोगों के लिए टाइटिल का उपयोग, सम्मान के महत्व सहित व्यवहार अनुभव में भारतीय दर्शक अपनी संस्कृति की प्रतिध्वनि बूझते हैं। तभी भारत के छोटे शहरों और गांवों में भी कोरियाई शो से संबंध जुड़ता हुआ है। वह पश्चिम के तिरस्कार में अब ईस्ट एशिया के सीरियलों में अपनापन खोज रहा है।

मसला संस्कृति की समानता का नहीं है असल बात लोकप्रियता का है, मनोरंजन का है और कोरियाई शो का जादू न सिर्फ भारत में है, बल्कि सारी दुनिया में है। मेरी परिचित कई और दुनिया भर में लाखों लोग मानो कोरियाई संस्कृति के भाग बन गए हैं, जिसे ‘हालयू’ कहा जाता है। ओटीटी प्लेटफॉर्म, बड़े पर्दे, संगीत के ‘सीन’, फैशन हर नई चीज में कोरियाई छाप आ रही है। सब कुछ कोरिया से जुड़ता हुआ। सभी और कोरियाई आंधी! लड़कियां और लड़के, मिलेनियल्स और जेन जेड बीटीएस, रेड वेलवेट और ब्लैकपिंक से जुड़े रहते हैं। बबलगम फ्लेवर वाला गाथा गीत इन दिनों दुनिया भर के युवाओं में पसंद हैं। ये न सिर्फ आकर्षक ट्यून्स हैं, बल्कि नई पीढ़ी के लिए प्रेरक और उन्हें आगे बढ़ाने वाले भी। भारत में इनकी लोकप्रियता हैरान करने वाली। सोशल मीडिया पर लोग प्रशंसा करते हुए मिलेंगे कि कैसे बीटीएस के गीतों ने उनका जीवन बदल दिया है। कैसे मुश्किल समय में, अकेलेपन में बीटीएस गीत और उसके बोल प्रेरक लगते हैं और साथ देते हैं।

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फिर सवाल, कोरियन शो, फिल्म और संगीत से इतनी शिद्दत से इतना लगाव क्यों?

जैसा मैने सुना…‘वे अलग हैं … उमंग भरने वाले’! कोई दो राय नहीं कि रोमांटिक कॉमेडी व्यक्ति को ऐसी स्थिति में पहुंचा देती है, जिसमे खोते हुए उसे भान नहीं होता है कि असल में क्या हो रहा है। क्योंकि कार्यक्रम बेहद दिलचस्प (घंटे भर या ज्यादा समय तक चल सकता है) होते हैं। भाषा अलग होने के बावजूद लगता है कि एक से ज्यादा तरीके से समान है। शो वास्तविक, सच्चा, बिना मिलावट वाला लगता है, जिसमें गुण-अवगुण का लोड नहीं है। ‘पैरासाइट’ जैसी फिल्में और ‘स्क्विड गेम’ जैसे शो ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सारे रिकार्ड यदि तोड़े हैं तो कोरियाई मनोरंजन की अलग तासीर अपने आप जाहिर है। ये ऐसी कृतियां हैं, जो व्यक्ति को काल्पनिक जीवन की मृगतृष्णा से बाहर करती हैं। ये रियलिटी, वास्तविकता, संघर्ष को चतुराई से ऐसे दर्शाती हैं, जिससे सामाजिक रूप से जागरूक युवा दर्शकों के लिए भी सुंदर, सार्वभौमिक मनभावक कहानी होती है तो वैश्विक राजनीतिक अव्यवस्था व अमीर बनाम वंचित की बहस और उसके सरोकारों को अभिव्यक्त भी करती है। फिलहाल ‘स्क्विड गेम’ नेटफ्लिक्स का नंबर वन शो है। यदि मैं हॉरर थ्रिलर्स की शौकीन होती तो इस शो के सभी नौ एपिसोड देखती। पर मैं (दो एपिसोड बाद) कहूंगी कि यह शो शुरुआत के बाद अच्छा कर रहा है। पैसे और अच्छे जीवन के लिए बेकरार लोग बच्चों के ‘डेडली’ गेम्स खेल रहे हैं ताकि पैसे जीत सकें। यह बर्बर, मनहूस है, लेकिन यह पैसे की गैर-बराबरी की वैश्विक चिंता में नई और उससे भी नई पीढ़ी को जोड़ने वाला वह खेल है जो दिल-दिमाग में लगाव बनाए रखता है।

बात सिर्फ हृदय को छूने वाले रोमांस या मनहूस शो अथवा मूवी की नहीं है। ऐसे शो हैं, जो कानूनी कार्यवाही की वास्तविक जानकारियां और टीआरपी के लिए कवरेज को सनसनीखेज बनाने की मीडिया संस्थानों की हताशा को पेश करते हुए हैं। कोरियाई पौराणिक कथाओं, यौनिक पहचानों और मिथकों व संकटों की कहानियों के भी शो हैं। कुल मिलाकर दो टूक तथ्य सभी क्षेत्रों और सभी वर्गों के लिए बने कोरियाई शो वैश्विक तौर पर हिट हो रहे हैं तो वजह रियलिटी की रियल कहानियां है और ऑब्जरवेशन व प्रस्तुति के लिहाज से भी रियल, सच्ची, धांसू।

इसलिए यदि आप दुनिया की नई क्रांति ‘हालयू’ के भाग नहीं हैं तो कूद पड़ने का समय है क्योंकि दिवानगी, क्रेज शुरू ही हुआ है। भारत के हम लोगों को सोचना चाहिए कि बॉलीवुड और मनोरंजन के ढांचे में इतना पुराना सब कुछ होते हुए भी हम कहां और कोरियाई फिल्म उद्योग कैसे वैश्विक बन गया? कैसे दक्षिण कोरिया ने फिल्म- सीरियलों से अपनी संस्कृति को लेकर दुनिया भर में उत्सुकता बना दी?

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