एक अनुकरणीय उदाहरण

जिस समय पूरी दुनिया एक असाधारण और अभूतपूर्व संकट से गुजर रही है, वैसे समय में श्रीलंका के रोमन कैथोलिक चर्च ने एक अनुकरणीय उदाहरण पेश किया है। ऐसे मौके पर उसका नजरिया राहत देने वाला महसूस हुआ है। चर्च ने कहा है कि उसने पिछले साल ईस्टर पर हुए हमलों के आत्मघाती हमलावरों को माफ कर दिया है। गुजरे रविवार को कोरोना संकट के बीच दुनिया भर में खामोश तरीके से ईस्टर माना गया। पिछले साल इसी दिन श्रीलंका से आई खबर ने सारी दुनिया को हिला दिया था। उस रोज वहां सिलसिलेवार बम धमाकों में 279 लोग मारे गए थे। 21 अप्रैल 2019 को ईस्टर की सुबह हमलावरों ने तीन चर्चों और तीन होटलों पर धमाके किए। इन हमलों में 593 लोग घायल हुए थे। उस घटना के बाद चर्च के कार्डिनल मैल्कम रंजीथ ने तत्कालीन सरकार से इस्तीफा देने को कहा था। आरोप लगाया था कि सरकार हमलों के पीछे अंतरराष्ट्रीय साजिश की जांच करने में नाकाम रही। अब कार्डिनल मैल्कम रंजीथ ने क्षमा का रुख अपनाया है। इस वर्ष कोरोना वायरस की वजह से एक टीवी स्टूडियो से उन्होंने अपना ईस्टर संदेश प्रसारित किया। इसमें उन्होंने कहा कि जिन दुश्मनों ने हमें तबाह करने की कोशिश की, हमें उन्हें अपना प्यार पेश करते हैं। हम उन्हें माफ करते हैं। कार्डिनल रंजीथ ने कहा कि जवाबी कदम उठाने की बजाय श्रीलंका का अल्पसंख्यक कैथोलिक समुदाय ईशु के आशा और तनाव कम करने के संदेश को फैलाना चाहता है।

गौरतलब है कि हमलों के बाद तत्कालीन राष्ट्रपति सिरिसेना ने इसके लिए इस्लामी कट्टरपंथियों को जिम्मेदार बताया था। लेकिन बाद में इसके लिए उन्होंने नशीली दवाओं का कारोबार करने वालों पर आरोप लगाए। कहा कि ये लोग नशीली दवाओं के कारोबार के खिलाफ उनकी सरकार की मुहिम को बाधित करना चाहते थे। पुलिस ने हमलों के सिलसिले में 135 लोगों को गिरफ्तार किया और हिंसा के लिए नेशनल तौहीद जमात नाम के चरमपंथी गुट को जिम्मेदार बताया। गिरफ्तार लोगों के खिलाफ आरोप तय होने अभी बाकी हैं। जाहिर है, चर्च की माफी से उन पर फर्क नहीं पड़ेगा। फिर सामाजिक तनाव घटाने के लिहाज से चर्च का रुख प्रशंसनीय है।

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