किसान खुदकुशी क्यों बढ़ी?

महाराष्ट्र किसान आत्म-हत्या की घटनाओं के लिए खास बदनाम रहा है। लेकिन पिछले नवंबर में कुछ ऐसा हुआ, जो इस राज्य के आम रिकॉर्ड की तुलना में भी असामान्य है। राज्य में नवंबर 2019 में लगभग 300 किसानों ने आत्महत्या कर ली। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक राज्य में आखिरी बार एक महीने में 300 से ज्यादा आत्महत्याएं 2015 में हुई थीं। किसानों की आत्महत्या महाराष्ट्र के लिए पिछले तीन दशक से एक ऐसी चुनौती बना हुआ है। साफ है कि इसका सामना करने में एक के बाद एक हर सरकार विफल साबित हुई है। ताजा आंकड़ों का संकेत है कि हालात और गंभीर होते जा रहे हैं। पिछले वर्ष जनवरी से नवंबर तक की अवधि में पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले ज्यादा आत्महत्याएं हुईं। 2018 में इसी अवधि में 2,518 आत्महत्याएं हुई थीं। 2019 में इसी अवधि में ये बढ़कर 2,532 हो गईं। जानकारों के मुताबिक इसके पीछे दो कारण हैं।

भारत में यूं तो कृषि क्षेत्र की हालत हमेशा ही खराब रहती है, पर पिछले 20 साल का डेटा देख कर यह पता चलता है कि चुनावी वर्ष में कृषि की हालत और बिगड़ जाती है। इसकी वजह यह है कि किसान एक कृषि मौसम के खत्म होने के बाद दूसरे की शुरुआत की तैयारी कर रहा होता है और ऐसे में चुनावों की वजह से कृषि अधिकारी सक्रिय नहीं होते। नतीजतन, कर्ज ठीक से नहीं मिलते हैं और सब कुछ ठप्प पड़ जाता है। अक्टूबर में ही यानी जिस महीने में विधान सभा चुनाव हुए, बेमौसम बरसात ने पूरे राज्य में किसानों की फसल को बर्बाद कर दिया था। पूरे राज्य में कम-से-कम एक करोड़ किसानों का नुकसान इस बरसात की वजह से ही हुआ। जानकारों का कहना है कि जब कहीं से मदद नहीं मिलती, तो किसान असहाय हो जाता है। पहले से परेशान किसान की हताशा और बढ़ जाती है। ऐसे में वो ऐसा निर्णय ले लेता है, जिनसे उसे बाद में नुकसान उठाना पड़ता है। दरअसल, पिछले चार-पांच सालों में कृषि का संकट और गहरा गया है। इसका कारण कृषि उत्पादों के दामों में लगातार होती गिरावट और दूसरी तरफ खेती के खर्च और आम खर्चों में लगातार हो रही वृद्धि बताई जाती है। जानकारों के मुताबिक आत्म-हत्या की बढ़ी घटनाएं भारत सरकार की प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के विफल होने का भी संकेत है। जाहिर है, ये गंभीर स्थिति है।

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