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आतंकवाद और ‘आपदा में अवसर’

कोरोना महामारी दुनिया के आम लोगों के लिए एक बड़ी आपदा बन कर आई है। लाखों लोग असमय मौत का शिकार हो गए। करोड़ों लोगों की जिंदगी आर्थिक रूप से तबाह हो गई। लेकिन इस महामारी में कई ताकतों ने अपने लिए अवसर देखा है। उनमें एक दुनिया भर के तानाशाह हैं, इसकी काफी चर्चा हो चुकी है। लेकिन संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट से पता चला है कि आतंकवादियों ने भी कोरोना महामारी की आपदा को अपने लिए अवसर बना लिया है। यूएन की एक एजेंसी ने “स्टॉप द वायरस डिसइंफॉर्मेशन” नाम से ये रिपोर्ट हाल में जारी की। उसमें बताया गया कि आतंकवादी और अपराधी तत्व कोविड-19 महामारी का फायदा अपना जाल फैलाने के लिए कर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र अंतर-क्षेत्रीय अपराध और न्याय शोध संस्थान (यूएनआईसीआरआई) की यह रिपोर्ट बताती है कि आतंकवादी और चरमपंथी समूह सोशल मीडिया पर ऐसी साजिशी कहानियां भी फैला रहे हैं, जिनमें सरकारों में आम लोगों के भरोसे को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है।

अल-कायदा और आईएसआईएस से जुड़े समूह कोविड-19 महामारी का फायदा उठा रहे हैं। वे मनगढ़ंत कहानियां फैला रहे हैं। वे बता रहे हैं कि नास्तिक लोगों को वायरस सजा दे रहा है। यह पश्चिम देशों पर टूटा खुदा का एक कहर है। यूएन की रिपोर्ट में कहा गया है कि आतंकवादियों को कोरोना वायरस को जैविक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने के लिए उकसाया जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह देखना चिंताजनक है कि कुछ आतंकवादी और हिंसक चरमपंथी गुटों ने सोशल मीडिया का गलत इस्तेमाल करने का प्रयास किया है। इस रिपोर्ट को तैयार करने वाले शोधकर्ताओं ने पाया कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल आतंकवाद भड़काने और आतंकवादियों को हमले करने के लिए प्रोत्साहित करने में किया जा सकता है। ऐसा ही कुछ दक्षिणपंथी गुट भी कर रहे हैं, जो अपने देश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ अभियान चलाते रहे हैं। रिपोर्ट में ऐसे मामलों का जिक्र किया गया है, जिनमें दक्षिणपंथी चरमपंथी गुटों ने खुले तौर पर अपने समर्थकों से स्थानीय अल्पसंख्यकों को वायरस से संक्रमित करने के लिए कहा। इस सिलसिले में टिमोथी विलसन के मामले का जिक्र किया गया है, जिसने अमेरिका के कंसास शहर में कोरोना वायरस का इलाज कर रहे एक अस्पताल में बम फोड़ने की साजिश रची थी। विलसन सोशल यहूदी विरोधी था। जाहिर है, दुनिया को कोरोना वायरस के साथ ऐसे खतरनाक तत्वों का मुकाबला भी करना होगा।

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