मोदी सरकार एसएफजी पर ध्यान दे

जब कभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मन की बात करते सुनता हूं तो मुझे एक घटना याद हो आती है। जब संचार क्रांति आई तो मेरे दफ्तर में तत्कालीन संपादकजी ने कुछ पेजर मंगवा कर अपने चहेते संवाददाताओं को दिए। इनके जरिए वे उन लोगों को संदेश भेजा करते थे। उन्होंने मुझे पेजर तो नहीं दिया पर इतना जरूर कहा कि अगली बार मैं तुम्हें भी पेजर दूंगा। अपनी उपेक्षा से दुखी मैंने उनसे कहा कि मुझे यह पसंद नहीं है क्योंकि मैं ऐसी कोई चीज पसंद नहीं करता हूं जोकि एकतरफा हो। पेजर के जरिए आप अपने संवाददाताओं को संदेश तो भेज सकते हैं मगर उनका संदेश हासिल नहीं कर सकते हैं। जब मैं मोदी की मन की बात सुनता हूं तो मुझे वह घटना याद आ जाती है। मुझे इस बात का दुख है कि मैं उनसे अपने मन की बात नहीं पहुंचा सकता हूं।

अगर मेरी बात उन तक पहुंच सकती तो मैं उनसे अनुरोध करता कि जब वे 5 अगस्त को अयोध्या में मंदिर का भूमिपूजन करने जाए तो अपने साथ अपनी व देश की जन्मपत्री भी लेते जाए व इस अवसर पर वहां आए महान पंडितो व ज्योतिषियो को उन्हें दिखा दे। मैंने तो बचपन में यक्ष राजा तथा प्रजा की कहावत पढ़ी मगर जब मोदी जीतनमकर सत्ता में आए व तेल के दाम गिरने लगे तो उन्होंने इसके लिए खुद को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा था कि मेरे भाग्य का असर देश पर पड़ रहा है। आज जबकि देश की बुरी दशा चल रही है तो उन्होंने इसकी वजह का पता लगाने के लिए अपनी व देश की जन्मपत्री पंडि़तो को जरूर दिखा देनी चाहिए।

इसलिए कि ग्रह-नक्षत्र खराब दिख रहे है। आज हमारे पड़ोसी देश ही हमें आंखे दिखा रहे थे मगर अब लगता है कि वे बरसो से शांत पड़ी पंजाब समस्या को फिर हवा देने लगे हैं। पिछले कुछ महीनो से मेरे सेलफोन पर किसी एसएफजे नामक संगठन की और से अपना पंजीकरण करवाने के लिए अमेरिका व कनाड़ा से संदेश भेजे जा रहे हैं। पता लगाया तो बहुत चिंतित हो गया वास्तव में एसएफजे का पूरा नाम सिख फॉर जस्टिस है जोकि विदेशों में काफी सक्रिय है व पजाब में सिख बाहुल्य हिस्से को उससे अलग करने के लिए मतदान करवाना चाहती है।

अमेरिका से चल रहे इस पृथकतावादी संगठन के प्रमुख गुरपतवंत सिंह पन्नू नामक व्यक्ति है। उसमें तमाम पृथकतावादी नेता भी शामिल है। पंजाब सरकार ने केंद्र को बहुत पहले ही इस संगठन की गतिविधियों के बारे में आगाह किया था व पिछले साल केंद्रीय गृह मंत्रालय ने उस पर प्रतिबंध लगा दिया था। मगर यह संगठन खालिस्तान के मुद्दे पर देश भर में जनमत संग्रह करवाना चाहता है। यहां यह याद दिलाना जरूरी हो जाता है कि 2011 में इस संगठन ने मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री व कुछ अन्य कांग्रेसी नेताओं के खिलाफ नवंबर 1984 के दंगों में संलग्न होने का आरोप लगाते हुए अमेरिका में उनके खिलाफ मुकदमे दायर किए थे। मगर अदालत ने यह कहते हुए इन्हें रद्द कर दिया था कि इन दंगों से अमेरिका का कुछ लेना-देना नहीं है।

मगर सिंतबर 2013 में इन लोगों ने सोनिया गांधी पर अपनी पार्टी के नेताओं पर संरक्षण देने का आरोप लगाते हुए नवंर 1984 कें दंगों के लिए उनके खिलाफ मुकदमा दायर किया। सबूतों के अभाव में अदालत ने यह मुकदमा भी ठुकरा दिया। मगर संगठन के लोग चुप नहीं बैठे व उन्होंने फरवरी 2014 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डा मनमोहन सिंह के खिलाफ मुकदमा दायर कर उन पर वित्तमंत्री रहते हुए सिखों के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया। संगठन ने 2014 में राहुल गांधी के उस बयान पर मुकदमेबाजी बढ़ाई जिसमें उन्होंने 1984 कें दंगों के पीछे कुछ कांग्रेसियों का हाथ होने की बात कही थी।

उन्होंने संयुक्त राष्ट्र संघ के मानवाधिकार आयोग को नवंबर 1984 के दंगों को लेकर संपर्क किया। पिछले साल एसएफजे ने पंजाब को भारत से अलग करके दुनियाभर में जनमत संग्रह अभियान चलाने का ऐलान किया। गुरपतवंत सिंह पन्नू ने इस संबंध में मतदाताओं के पंजीकरण व सिखों को भावी जानकारी देने क लिए लाहौर में अपना दफ्तर स्थापित करने का भी ऐलान किया। उसने खालिस्तान की मांग वाले जरनैल सिंह भिंडरावाले के बैनर ननकाना साहब के आस-पास लगवाए। उसने गैर-सिंखों से भी मतदान के लिए अपना नाम पंजीकृत करवाने का अनुरोध किया।

पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता रहे आप पार्टी के विधायक सुखपाल सिंह खैरा ने कहा कि वह जनमत संग्रह का समर्थन तो नहीं करते हैं मगर तमाम सरकारों द्वारा पंजाब व सिखों के दमन के खिलाफ है। जहां एक और अकाली दल व भाजपा ने खैरा के इस बयान की आलोचना करते हुए अरविंद केजरीवाल से उसके खिलाफ कार्रवाई करने को कहा वहीं प्रधानमंत्री की अमेरिका यात्रा के दौरान तमाम सिख संगठनो ने उनसे मुलाकात करके खैरा व पन्नू की आलोचना की। उनका कहना था कि ये लोग सिखों के नाम पर अपना अलग एजेंडा चला रहे हैं। पिछले साल एनआईए, पंजाब पुलिस व उत्तराखंड पुलिस ने एसएफजे से जुड़े 39 लोगों को गिरफ्तार करके उनके खिलाफ मामले दर्ज किए। इंटरपोल ने पन्नू के खिलाफ रेड कार्नर नोटिस जारी किया। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह का कहना था कि ये लोग पंजाब में पुनः आतंकवाद को पनपाना चाहते हैं। इन्हें आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया जाना चाहिए। इनके पीछे पाकिस्तान का हाथ है।

कुछ समय पहले सरकार ने पंजाब के तमाम डेरो के प्रमुखों की हत्या करने आए कुछ एसएफजे आतंकावादी को गिरफ्तार किया था। जिसे पन्नू परमजीत सिंह नामक आतंकवादी के काफी करीब माना जाता है। पाकिस्तान करतारपुर गलियारा के शुरुआत से इस मामले को और भड़काना चाहता है।एसएफजे अपने दुष्प्रचार के लिए गूगल प्ले का दुरुप्रयोग करने की योजना बना रहा था। अंतः गूगल ने पिछले दिनो इसे हटा दिया। भारत सरकार ने 5 जुलाई से इस संगठन से जुड़ी 40 वेबसाईटो को प्रतिबंधित किया है।

हाल में कनाड़ा की जस्टिन ट्रूडो सरकार ने इस साल नवंबर माह में कराए जाने वाले इस जनमत संग्रह के नतीजो को स्वीकार करने से इंकार करते हुए कहा है कि हम भारत की सार्वभौमिकता व क्षेत्रीय अधिकारो में विश्वास रखते हैं। हमारे लिए भारत के साथ द्विपक्षीय संबंध कहीं ज्यादा मायने रखते हैं। संगठन ने कनाडा सरकार से अनुरोध किया था कि वह वेंकूवर, टोरंटो व कैलनोरी व एडमेंटन में लोगों को वोट करने की सहायता प्रदान करे।

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