कनाडा में टर्की खाना रह गया - Naya India
बेबाक विचार | रिपोर्टर डायरी| नया इंडिया|

कनाडा में टर्की खाना रह गया

मैं पूजा-पाठ करने वाला व अपने धर्म की मान्यताओं का आदर करने वाला एक हिंदू हूं। इसके बावजूद न जाने क्यों मुझे ईसाई धर्म काफी अच्छा लगता है। इसकी एक बड़ी वजह उनके द्वारा मनाए जाने वाले त्यौहारो में तमाम परिचितो का आपस में मिलना, भेंट कर लेन-देन करना व बढि़या पकवान खाना-खिलाना शामिल है। मुझे क्रिसमस बहुत अच्छा लगता है व इस मौसम में गिरिजाघरों की सजावट व वहां होने वाले कार्यक्रम तो देखते ही बनते हैं।

जब पिछले साल मैं इन दिनों कनाडा में था तो मेरी बहुत इच्छा थी कि मैं किसी पड़ोसी कनाडाई व ईसाई के घर जाकर क्रिसमस में शामिल हूं। मगर मेरा दुर्भाग्य कि किसी भी पड़ोसी ने मुझे आमंत्रित नहीं किया। वैसे भी कनाडा के लोग लोगों को अपने घर आमंत्रित करना पसंद नहीं करते हैं। मगर मुझे एक बात का अफसोस रहेगा किमैं कनाडा में होने के बावजूद इस दौरान टर्की खाना क्यों भूल गया।

वैसे तो मैंने पिछले कुछ समय से मांसाहार छोड़ दिया है मगर मैं चिकन व मछली सरीखी चीजे खा लेता हूं। मैंने टर्की के बारे में बहुत कुछ सुन पढ़ रखा था। जब अमेरिकी दूतावास या ब्रिटिश उच्चायोग में होने वाली क्रिसमस की पार्टियों में जाता था तो वहां जाकर टर्की का वाइन के साथ सेवन करने में आनंद लेता था। अब फिर क्रिसमस आ रहा है तो मुझे टर्की की याद आ गई। वास्तव में टर्की एक मुरगी व बत्तख सरीखा पक्षी होता है जिसे अमेरिका, यूरोप समेत पूरी दुनिया में बहुत चाव से खाया जाता है। अमेरिका में तो इसे लेकर कुछ परंपराएं भी शुरू हो गई है।

टर्की मूल रूप से कनाडा का पक्षी है जोकि पहले टर्की पहुंचा व वहां से होते हुए यूरोप गया। टर्की को अमेरिका व कनाडा के मूल का माना जाता है। उसकी चोच के नीचे लाल मांस का लोथड़ा सा लटकता रहता है व वे काफी बड़ी होती है। नर टर्की मादा टर्की से बड़ा होता है। ऐसा माना जाता है कि टर्की को यूरोप तक लाने में एक व्यापारी का बड़ा हाथ था।

इंग्लैंड के विजियम स्ट्रिक लैड नाम नागरिक ने अपने देश में टर्की का प्रवेश करवाया था। वहीं कुछ लोगों का दावा है कि टर्की भारतीय मूल की है। इसलिए इसे फ्रेंच, रूसी व पोलिश भाषा में हिंदी कहते हैं। माना जाता है कि क्रिप्टोफर कोलंबस उन्हें भारत से लेकर आया। पहले यह जंगलों में पाई जाती थी मगर फिर इन्हें मुरगी की तरह पाला जाने लगा।

टर्की को लेकर कई किस्से कहानियां जुड़ी हुई हैं। टर्की का अमेरिका, कनाडा समेत तमाम देशों द्वारा दिए जाने वाले थैंक्स गिविंग डे में बहुत अहम स्थान है। यह पर्व हमारे पर्व जैसा होता है जिसमें पिछले साल पैदा हुई अच्छी फसलो के लिए लोग ईश्वर व अपने पूर्वजो को धन्यवाद देते हुए भावी अच्छी फसलो के लिए उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। अमेरिका में यह नवंबर के चौथे गुरुवार को व कनाडा में अक्तूबर में दूसरे सोमवार को मनाया जाता है व उस दिन पूरे देश में छुट्टी रहती हैं।

उस दिन विशेष प्रार्थनाओं के जरिए धन्यवाद दिया जाता है व भोज में टर्की बनाई जाती है व खाने पर तमाम पकवानों के साथ इसे भी परोसा जाता है। उस दिन पूरे अमेरिका में लोग 4.50 करोड़ टर्की खा जाते हैं। मजेदार बात यह है कि वहां नेशनल थैंक्स गिविंग प्रेजेंटेशन डे भी मनाया जाता है। उस दिन अमेरिका के राष्ट्रपति को उनके सरकारी आवास व्हाइट हाऊस में नेशनल टर्की फैडरेशन की ओर से एक नर टर्की उपहार में दी जाती हैं। बताते है कि पहले उन्हें देश में अंडे व मुरगी बोर्ड द्वारा यह दोनों वस्तुएं भी भेंट में दी जाती थी। यह परंपरा 1940 से शुरू हुई थी। उस दिन राष्ट्रपति को भेंट में टर्की के जीवन को बख्शते हुए उसे क्षमा कर दिया जाता है।

सत्ता में आने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हर साल इस मौके पर दो टर्कियो को क्षमादान देते आए हैं। उन्हें क्षमा दिए जाने के बाद में अपना बचा हुआ जीवन बिताने के लिए विशेष फार्म हाउस में भेज दिया जाता है। यह परंपरा जैसे शुरू हुई इसे लेकर तरह-तरह की बातें कहीं जाती हैं। बताते हैं कि राष्ट्रपति हैनरी ट्रमैन को सबसे पहले भेंट में टर्की दी गई थी। बाद में हर साल राष्ट्रपति की भेंट में टर्की दिए जाने की परंपरा शुरू हो गई।

कहते हैं कि 1963 में तत्कालीन राष्ट्रपति जॉन एफ केनेडी ने जब भेंट में टर्की प्राप्त की थी व उन्होंने उसे क्षमा करते हुए बख्श दिया व बाद में राष्ट्रपति जेराल्ड फोर्ड व रोनाल्ड रीगन ने टर्की को क्षमा करने की परंपरा को जारी रखा। इसको असली अहमियत तब मिली जब 1989 में जार्ज डब्ल्यू ब्रुश ने जानवरों के अधिकारो की रक्षा को व्हाइट हाउस के बाहर मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों से कहा कि वे टर्की को राष्ट्रपति द्वारा क्षमादान देते हैं वह फार्म में जीवित रहेगी। बाद में लोग उन्हें विशेष रूप से देखने के लिए जाते हैं।

बताते हैं कि ब्रिटेन का भी टर्की के लिए विशेष महत्व रहा है। जब 1700 के दशक में तत्कालीन महारानी यह सुनकर डर गई कि स्पेन उन पर हमला करने के लिए आ रही है तो बाद में उन्हें खबर मिली की वह जहाज डूब गया है। इस पर खुश होकर उन्होंने खानसामे को खाने के लिए टर्की पकाने का आदेश दिया। तब से वहां टर्की की अहमियत काफी बढ़ गई है। कुछ भी हो यह अमेरिका की विशेषता ही कही जाएगी कि पहले वहां टर्की को थैंक्स गिविंग डे पर बख्शा जाता है व उसी दिन पूरा देश करोड़ो की संख्या में उसे पका कर चाव से खा जाता है।

Latest News

बूचड़खानों पर रोकः बुनियादी सवाल ?
उत्तराखंड की सरकार ने हरिद्वार में चल रहे बूचड़खानों पर रोक लगा दी थी। वहां के उच्च न्यायालय ने इस रोक को…

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

});