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जिंदा समाज की मिसाल

एक साल के अंदर ब्रिटेन में गैस और बिजली कीमतें बढ़ कर तीन गुना हो चुकी हैँ। इस बीच कंपनियों का मुनाफा बढ़ता चला गया है। तो सही बात है। आखिर लोग किस हद तक बर्दाश्त करें!

ब्रिटेन में महंगाई के खिलाफ जन अभियान तेज हो गया है। लोग अब चुपचाप बैठे मुसीबत झेलने को तैयार नहीं हैं। बात सोशल मीडिया पर शुरू हुई। लेकिन पूरे ब्रिटेन में 50 रैलियां आयोजित करने का एलान किया गया है। ये विरोध प्रदर्शन अगले हफ्ते शुरू हो जाएंगे। लोगों का सवाल वाजिब है। राजनीतिक नेतृत्व अगर कंपनियों के मुनाफे को सर्वोच्च प्राथमिकता देता हो, तो आखिर लोग इसे कब तक और क्यों सहें। और फिर मौजूदा संकट यूक्रेन मामले में नेतृत्व के निर्णय का परिणाम है। तो उसके परिणाम नेतृत्व को जरूर भुगतने चाहिए। तो दो अभियान शुरू हो गए हैं। पहले खबर आई कि एक समूह ने प्राकृतिक गैस की बढ़ी कीमतों को ना चुकाने का अभियान शुरू किया है। इसका नाम- कॉन्ट पे, वोन्ट पे- (यानी बढ़ी कीमत को चुकाने में सक्षम नहीं हैं, इसलिए हम उसे नहीं चुकाएंगे) रखा गया है। उसके बाद एक दूसरे समूह ने रैलियां आयोजित करने का कार्यक्रम बनाया।

इस समूह का नाम ‘इनफ इज इनफ’ (अब हद हो गई है) रखा गया है। कॉन्ट पे, वोन्ट पे अभियान के तहत एक लाख से अधिक लोग गैस और बिजली कनेक्शनों के बदले अगले अक्टूबर से भुगतान ना करने का संकल्प जता चुके हैँ। इनफ इज इनफ अभियान में कई ट्रेड यूनियनें, सामुदायिक संगठन, किरायेदारों के संगठन और राजनीतिक संगठन शामिल हैं। इस अभियान की पहली रैली अगले बुधवार को दक्षिणी लंदन में होगी। अभियान से जुड़े नेताओं का कहना है कि हर बार जब नया संकट खड़ा होता है, तो उसकी कीमत चुकाने के लिए मजदूरों से ही कहा जाता है। लेकिन अब हद हो गई है। तो इनफ इज इनफ ने मांग की है कि आने वाली सर्दियों में गैस की कीमत में संभावित वृद्धि पर रोक लगाई जाए, ताकि आम घरों पर बोझ ना बढ़े। हकीकत यही है कि महंगाई के कारण ब्रिटेन में हजारों लोगों की जिंदगी मुश्किल हो गई है। एक साल के अंदर इन दोनों चीजों की कीमतें बढ़ कर तीन गुना हो चुकी हैँ। इस बीच कंपनियों का मुनाफा बढ़ता चला गया है। तो सही बात है कि आखिर लोग किस हद तक बर्दाश्त करें!

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