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Monday, April 19, 2021
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कोरोनाः भारत बना विश्व-त्राता

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वेद प्रताप वैदिकhttp://www.nayaindia.com
हिंदी के सबसे ज्यादा पढ़े जाने वाले पत्रकार। हिंदी के लिए आंदोलन करने और अंग्रेजी के मठों और गढ़ों में उसे उसका सम्मान दिलाने, स्थापित करने वाले वाले अग्रणी पत्रकार। लेखन और अनुभव इतना व्यापक कि विचार की हिंदी पत्रकारिता के पर्याय बन गए। कन्नड़ भाषी एचडी देवगौड़ा प्रधानमंत्री बने उन्हें भी हिंदी सिखाने की जिम्मेदारी डॉक्टर वैदिक ने निभाई। डॉक्टर वैदिक ने हिंदी को साहित्य, समाज और हिंदी पट्टी की राजनीति की भाषा से निकाल कर राजनय और कूटनीति की भाषा भी बनाई। ‘नई दुनिया’ इंदौर से पत्रकारिता की शुरुआत और फिर दिल्ली में ‘नवभारत टाइम्स’ से लेकर ‘भाषा’ के संपादक तक का बेमिसाल सफर।

कुछ दिन पहले जब मैंने लिखा था कि कोरोना का टीका भारत को विश्व की महाशक्ति के रूप में उभार रहा है तो कुछ प्रबुद्ध पाठकों ने मुझे कहा था कि आप मोदी सरकार को जबर्दस्ती इसका श्रेय दे रहे हैं। इसका श्रेय आप जिसे चाहें दें या न दें, जो बात मैंने लिखी थी, उस पर विश्व स्वास्थ्य संगठन के महासचिव एंतोनियो गुतरेस ने मोहर लगा दी है। गुतरेस ने कहा है कि कोरोना के युद्ध में भारत ने विश्व का नेतृत्व किया है। वह विश्व-त्राता बन गया है। जैसा कि मैं दशकों से लिखता रहा हूं कि भारत को हमें भयंकर महाशक्ति नहीं, प्रियंकर महाशक्ति बनाना है, उसका अब शुभारंभ हो गया है। भारत ने दुनिया के लगभग 150 देशों को कोरोना के टीके, जांच किट, पीपीई और वेंटिलेटर उपलब्ध करवाए हैं। इन देशों से भारत ने इन चीजों के पैसे या तो नाम-मात्र के लिए हैं या बिल्कुल नहीं लिए हैं। संयुक्तराष्ट्र संघ की शांति सेना को दो लाख टीके भारत ने भेंट किए हैं। अभी तक भारत लगभग ढाई करोड़ टीके कई देशों को भेज चुका है। उन देशों के राष्ट्रपतियों और प्रधानमंत्रियों ने भारत का बहुत आभार माना है।

इसका श्रेय भारत के वैज्ञानिकों, दवा-उत्पादकों और स्वास्थ्य मंत्रालय को अपने आप मिल रहा है। यदि भारत सरकार इस संकट में आयुर्वेदिक काढ़े को भी सारे विश्व में फैला देती तो भारत को अरबों रु. की आमदनी तो होती ही, भारत की महान और प्राचीन चिकित्सा-पद्धति सारे विश्व में लोकप्रिय हो जाती लेकिन हमारे नेताओं में आत्म-विश्वास और आत्म-गौरव की इतनी कमी है कि वे नौकरशाहों के इशारे पर ही थिरकते रहते हैं। कोरोना युद्ध में भारत की विजय सारी दुनिया में बेजोड़ हैं। अमेरिका-जैसे शक्तिशाली और साधन-संपन्न देश में 5 लाख से ज्यादा लाख लोग मर चुके हैं। जो देश भारत के प्रांतों से भी छोटे हैं, उनमें हताहत होनेवालों की संख्या देखकर हमें हतप्रभ रह जाना पड़ता है। ऐसा क्यों है ? इसका कारण भारत की जीवन-पद्धति, खान-पान और चिकित्सा-पद्धति है। दुनिया के सबसे ज्यादा शाकाहारी भारत में रहते हैं। जो मांसाहार करते हैं, वे भी इन दिनों शाकाहारी हो गए हैं। हमारे भोजन में रोजाना इस्तेमाल होनेवाले मसाले हमारी प्रतिरोध-शक्ति को बढ़ाते हैं। हमारी नमस्ते लोगों में शारीरिक दूरी अपने आप बना देती है। मेरे आग्रह पर आयुष मंत्रालय ने काढ़े की कोरोड़ों पुड़ियां बटवाईं। इन सब का सुपरिणाम है कि भारत की गरीबी, गंदगी और भीड़-भाड़ के बावजूद आज भारत कोरोना को मात देने में सारे देशों में सबसे अग्रणी है। यदि भारत सरकार थोड़ी ढील दे दे और गैर-सरकारी स्तर पर भी टीकाकरण की शुरुआत करवा दे तो कुछ ही दिनों में 50-60 करोड़ लोग टीका लगवा लेंगे।

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