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एक सराहनीय पहल

कॉस्मेटिक उत्पाद मनुष्य में कई तरह की भ्रांति भरते हैं, ये शिकायत पुरानी है। वे शरीर और सुंदरता को लेकर एक खास तरह का मॉडल लोगों के दिमाग में बैठते हैं, जिसका उन लोगों पर खराब मनोवैज्ञानिक असर होता है, जो उस मॉडल में फिट नहीं बैठते। इसलिए इस चलन से मुक्ति पाने के हर कदम का स्वागत होना चाहिए। पिछले साल अमेरिका और यूरोप में हुए ब्लैक लाइव्स मैटर आंदोलन के बाद फेयर एंड लवली क्रीम की निर्माता कंपनी यूनिलीवर ने इससे फेयर (गोरा) शब्द हटाने का एलान किया था। अब यूनिलीवर कंपनी ने तय किया है कि वो अपने सौंदर्य उत्पादों पर से त्वचा और बालों के बारे में बताने के लिए “सामान्य” शब्द का प्रयोग बंद कर देगी। सामान्य का मतलब यह था कि जिनकी त्वचा या बाल उस कथित सामान्य जैसे नहीं हैं, वे कुछ असामान्य हैं। यूनिलीवर ने कहा कि वो अपने विज्ञापनों में अपने मॉडलों के शरीर की बनावट और त्वचा के रंग को डिजिटल तरीके से बदलने की प्रथा को भी खत्म कर देगी। यूनिलीवर दुनिया के सबसे बड़े विज्ञापनदाताओं में से है। हाल ही में उसे अपने विज्ञापनों की वजह से काफी आलोचना का सामना करना पड़ा है। जाहिर है, कंपनी अब इन आलोचनाओं को शांत करने का प्रयास कर रही है।

अब कंपनी ने कहा है कि उसे यह अहसास है कि सिर्फ “सामान्य” शब्द हटा देने भर से समस्या हल नहीं हो जाएगी। लेकिन यह सौंदर्य की ज्यादा समावेशी परिभाषा की तरफ ले जाने की दिशा में एक कदम है। हालांकि इस दावे पर अभी भी सवाल हैं, फिर इसे एक सही दिशा में पहल माना जाएगा। कंपनी के मुताबिक उसने पूरी दुनिया में करीब 10,000 लोगों के बीच एक सर्वेक्षण करवाया था। उसमें आधे से भी ज्यादा लोगों ने कहा कि त्वचा या बालों के लिए “सामान्य” शब्द का इस्तेमाल करने से लोगों को भेदभाव महसूस होता है। 70 प्रतिशत लोगों ने कहा कि विज्ञापनों में इस शब्द के इस्तेमाल से नकारात्मक असर पड़ता है। तो अब ये कंपनी अपने मॉडलों और अपने इन्फ्लुएंसरों के शरीर के आकार, डील-डॉल, अनुपात और त्वचा के रंग को डिजिटल रूप से बदलना भी बंद कर देगी। 2017 में कंपनी को अपने डव बॉडी वॉश उत्पाद के एक विज्ञापन को लेकर सोशल मीडिया पर काफी आलोचना झेलनी पड़ी थी। विज्ञापन में एक अश्वेत महिला को दिखाया गया, जो अपनी टी-शर्ट उतारते ही एक श्वेत महिला के रूप में नजर आने लगती है।

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