UP assembly election 2022 हर सवाल का जवाब हिंदुत्व है
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हर सवाल का जवाब हिंदुत्व है!

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UP assembly election 2022 उत्तर प्रदेश विकास के निचले पायदान पर खड़ा है, भारत सरकार के बनाए सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल यानी एसडीजी रैंक में उत्तर प्रदेश सबसे निचले रैंक वाले पांच राज्यों में है, कोरोना की पहली लहर में प्रवासी मजदूरों के पलायन का मामला हो या दूसरी लहर में लाशों के गंगा में बहने का मामला हो, सर्वाधिक बदनामी वाला राज्य उत्तर प्रदेश है, किसान आंदोलन से तीन सबसे अधिक प्रभावित राज्यों में एक उत्तर प्रदेश है, जातियों में सर्वाधिक बंटा राज्य उत्तर प्रदेश है, लेकिन जब राजनीति की या चुनाव की बात आती है तो इन सबका जवाब हिंदुत्व है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उसी हिंदुत्व के भरोसे चुनावी वैतरणी पार करने की उम्मीद लगाए हुए हैं।

हालांकि विकास के उनके अपने आंकड़े हैं और बड़े बड़े दावे हैं लेकिन भारत सरकार के आंकड़े अलग हकीकत बता रहे हैं। राज्य सरकार का दावा है कि उत्तर प्रदेश को बीमारू प्रदेशों से निकाल कर योगी ने विकसित प्रदेश बना दिया है। प्रति व्यक्ति आय दोगुनी हो गई है, राज्य का बजट साढ़े पांच लाख करोड़ रुपए का हो गया है, दर्जनों मेडिकल कॉलेज खुले हैं, इन्सेफ्लाइटिस से होने वाली मौतें कम हो गई हैं, 23 करोड़ की आबादी के बावजूद कोरोना के केसेज बहुत कम आ रहे हैं और राज्य कोरोना मुक्त होने की कगार पर खड़ा है।

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दूसरी ओर एक हकीकत केंद्र सरकार के नीति आयोग की ओर से जारी एसडीजी इंडेक्स से जाहिर होती है। इसमें 17 लक्ष्य तय किए गए हैं और उन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए किए जा रहे उपायों का पता लगाने के लिए 115 संकेतक बनाए गए हैं। इस आधार पर पिछले तीन साल से नीति आयोग एक सूची तैयार करता है। इस साल यानी 2020-21 की सूची में उत्तर प्रदेश सबसे निचले पायदान वाले पांच राज्यों में है। सौ अंकों में से उसे 55 अंक मिले हैं और वह बिहार, झारखंड, असम और अरुणाचल प्रदेश के साथ निचले पांच राज्यों में है। विकास के लक्ष्यों भुखमरी, कुपोषण, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, लैंगिक समानता, स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता, विषमता दूर करने के उपाय, पर्यावरण संरक्षण के कार्य, उद्योग व बुनियादी ढांचे का विकास, शांति, न्याय आदि शामिल हैं। इन 17 में से किसी पैमाने पर उत्तर प्रदेश अव्वल नहीं है। फिर भी देश के मीडिया समूहों द्वारा किए जा रहे सर्वेक्षणों में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री नंबर एक माने जा रहे हैं। हाल में एक मीडिया समूह द्वारा किए गए सर्वेक्षण में भी वे नंबर एक मुख्यमंत्री थे और उत्तर प्रदेश नंबर एक राज्य था।

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सवाल है कि तमाम निगेटिव बातों के बावजूद कैसे उत्तर प्रदेश नंबर एक बना है? इसके दो कारण हैं। पहला कारण तो धारणा का प्रबंधन है और जो सरकार में होता है वह बड़ी आसानी से यह काम कर लेता है। दूसरा कारण हिंदुत्व का प्रचार-प्रसार है। मुख्यमंत्री की छवि हिंदुत्व के रक्षक की बनी है इसलिए भले वस्तुनिष्ठ आकलन के समय विकास के पैमाने पर राज्य पीछे दिखे पर जब सर्वेक्षण होता है तो लोग उनकी तारीफ करते हैं। सोशल मीडिया में योगी आदित्यनाथ के समर्थकों की पोस्ट देखें तो इसकी एक झलक दिखती है। जब भी कोई विकास की बात छेड़ता है या महंगाई की बात आती है तो उनके समर्थक कहते हैं कि उनको इसलिए नहीं चुना गया है कि वे तेल, दाल, लहसुन की कीमत कम करें। उनको जिस काम के लिए चुना गया है वह काम वे कर रहे हैं। बताने की जरूरत नहीं है कि उनके समर्थकों ने उनको किस काम के लिए चुना है और वह काम वे कितनी दक्षता के साथ कर रहे हैं।

हालांकि इसके बावजूद ऐसा नहीं है कि राज्य सरकार या मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने कामकाज या विकास का प्रचार नहीं कर रहे हैं। सरकार के चार साल पूरे होने पर 64 पेज में उपलब्धियों का ब्योरा छापा गया, जिसमें कई बड़े दावे किए गए। लेकिन हकीकत यह है कि विकास के इन दावों के साथ साथ अंतर्धारा हिंदुत्व की है। वे हिंदू हितों के रक्षक हैं, इतना बहुत है। बाकी अगर कुछ काम भी करते हैं और राज्य में विकास भी हुआ है तो वह बोनस है।

By हरिशंकर व्यास

भारत की हिंदी पत्रकारिता में मौलिक चिंतन, बेबाक-बेधड़क लेखन का इकलौता सशक्त नाम। मौलिक चिंतक-बेबाक लेखक-बहुप्रयोगी पत्रकार और संपादक। सन् 1977 से अब तक के पत्रकारीय सफर के सर्वाधिक अनुभवी और लगातार लिखने वाले संपादक।  ‘जनसत्ता’ में लेखन के साथ राजनीति की अंतरकथा, खुलासे वाले ‘गपशप’ कॉलम को 1983 में लिखना शुरू किया तो ‘जनसत्ता’, ‘पंजाब केसरी’, ‘द पॉयनियर’ आदि से ‘नया इंडिया’ में लगातार कोई चालीस साल से चला आ रहा कॉलम लेखन। नई सदी के पहले दशक में ईटीवी चैनल पर ‘सेंट्रल हॉल’ प्रोग्राम शुरू किया तो सप्ताह में पांच दिन के सिलसिले में कोई नौ साल चला! प्रोग्राम की लोकप्रियता-तटस्थ प्रतिष्ठा थी जो 2014 में चुनाव प्रचार के प्रारंभ में नरेंद्र मोदी का सर्वप्रथम इंटरव्यू सेंट्रल हॉल प्रोग्राम में था। आजाद भारत के 14 में से 11 प्रधानमंत्रियों की सरकारों को बारीकी-बेबाकी से कवर करते हुए हर सरकार के सच्चाई से खुलासे में हरिशंकर व्यास ने नियंताओं-सत्तावानों के इंटरव्यू, विश्लेषण और विचार लेखन के अलावा राष्ट्र, समाज, धर्म, आर्थिकी, यात्रा संस्मरण, कला, फिल्म, संगीत आदि पर जो लिखा है उनके संकलन में कई पुस्तकें जल्द प्रकाश्य। संवाद परिक्रमा फीचर एजेंसी, ‘जनसत्ता’, ‘कंप्यूटर संचार सूचना’, ‘राजनीति संवाद परिक्रमा’, ‘नया इंडिया’ समाचार पत्र-पत्रिकाओं में नींव से निर्माण में अहम भूमिका व लेखन-संपादन का चालीस साला कर्मयोग। इलेक्ट्रोनिक मीडिया में नब्बे के दशक की एटीएन, दूरदर्शन चैनलों पर ‘कारोबारनामा’, ढेरों डॉक्यूमेंटरी के बाद इंटरनेट पर हिंदी को स्थापित करने के लिए नब्बे के दशक में भारतीय भाषाओं के बहुभाषी ‘नेटजॉल.काम’ पोर्टल की परिकल्पना और लांच।

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